अपनी शराब – पराई शराब

जीवन के सबक हर व्यक्ति के दिन और रात के पाठ होते हैं और सुधी व्यक्ति अपनी जीवन के सीखे हुए सबकों से ही नहीं सीखता बल्कि दूसरों से सुने उदाहरण से भी सीख लेता है. एक बार एक बैंक में क्लर्क की भर्ती हो रही थी तो इंटरव्यू अधिकारी थक गए तो उन्होंने एक... Continue Reading →

लिखाड़ी की उड़ान और पुस्तक प्रकाशन में शोषण

आप तो अच्छा लिखते हैं और आज आपका लेख अख़बार में छपा है और बड़ा ही उत्तम है! एक पड़ोसी ने अपनी लेखक पड़ोसी से यह बात कही. लेखक पड़ोसी ने आभार व्यक्त किया तो पाठक पड़ोसी ने कह दिया कि आप अपनी आलेखों कविता और कहानी का संग्रह क्यों नहीं छपवाते हैं तो लिखाड़ी... Continue Reading →

छोटी सी असफलता – ना कर आत्महत्या

संवेदनशील होना अच्छा हैसंवेदनशील व्यक्ति भावुक होता हैसंवेदनशील होना सामाजिक न्याय हैसंवेदनशील, समाज में प्रेम की धरोहर हैसंवेदनशील, एकरसता का प्रतीक हैसंवेदनशील, एकता की धुरी हैसंवेदनशील, भावना का धनी हैपरंतुसंवेदनशील का ह्रदय कमजोर हैसंवेदनशील भावनाओं में बह जाते हैंसंवेदनशील बहुत अधिक भयभीत हो जाते हैंऔरसंवेदनशील आत्मघात तक कर लेते हैंअतःसंवेदनशील बस, अंतर्मुखी न होने पाए,... Continue Reading →

स्वयं प्रेम में ही मुग्ध!

Narcissistic जब वो पैदा हुआ वह स्वयं में एक बड़े घर में धनवान व्यक्ति के रूप में था और सामान्य शिक्षा के बावजूद व्यवसाय में बहुत तेज गति से सफल हुआ और शहर में राज्य में उसका बड़ा नाम पैदा हुआ परंतु अच्छे बाप की बिगड़ेल औलाद अपने आप से सबसे ज़्यादा प्यार करती है... Continue Reading →

Health & Hygiene- Directly Proportional!

होशियारी सदा सुखारी हिंदी में भी Health is very much proportionate to the hygiene. If a good health has to be enjoyed. A good practice of keeping a clean hygiene is everybody’s need and requirement. Good health is good hygiene and good hygiene leads to good health. Now a good hygiene practice and tops the... Continue Reading →

Organic!?

The word organic is now in fashion, being acceptable, fancy and precious as organic products are much in demand. Be it vegetables , Grains or even dry fruits. What actually organic means? The simple understanding about organic product nowadays is a produce produced in untadulterated soil without any help of chemicals, fertilisers, or insecticides or... Continue Reading →

सभ्यता के पहले!(605)

जब मानव सभ्य नहीं हुआ,उसका जीवन अंदाजिया था,तब वनोपज ही भोजन हुआखेत खेतिहर जैसा कुछ न था. ज्यों समाज जब बने तबजीवन मंथर मन्त्रवत था,त्यों नैतिक विकास का दौर बनापर विवाह जैसा कुछ न था. ज्ञान बहा वेद लिखे जबवह काल भी बुद्धि का था,धीमा युग था शैशवकाल मेंत्वरित आज जैसा न था. समय यूँ... Continue Reading →

माँ की बातें

बचपन में जहाँ तक याद जाती है माँ के द्वारा सिखाई गई शिक्षाएँ और कहावतें-मुहावरे यदा कदा नहीं सदा ही बहुत याद आते है. तब समझ में नहीं आते थे अब आते हैं. कोहनी में लगा गुड,ख़राब समय हो तो खूंटी भी हार निगल जाती है,गूँगे का गुड़,रहिमन चुप हो बैठिए देख दिनन का फेर,समय... Continue Reading →

छोटी ख़ुशी, 600 वें ब्लॉग की

छोटी ख़ुशी, येन केन प्रकारेण, यत्र तत्र सर्वत्र, यथा एवं तथा उपलब्ध हैं जहाँ छोटी ख़ुशी का संसार बिखरा पड़ा है. छोटी ख़ुशी कुछ जितने हौले से मन शरीर और आत्मा को छूकर निकल जाती है कि अनेकों बार उसकी उपस्थिति एक नियमित घटना की तरह मानव मन में अंकित हो जाती है. सुबह उठते... Continue Reading →

Eternal Hari

छोड़ने को हम राजी नहींएक सूत भर भी ज़मीनऔर साथ कहते फिरते हमहै तो सबै भूमि गोपाल की और तो और मौक़ा मिलेतो हड़पी ऐसे ज़मीन भीतेरी लीला अपरंपार कहते हैंसदा दबाई भूमि गोपाल की हरि अनंत हरि कथा अनंताफिर भी लड़े जड़ जोरू ज़मीनअमरौती खाके कोई आया नहींदो जून की रोटी गोपाल की दर्द... Continue Reading →

तंबाकू कैसे छूटे?

हालांकि तंबाकू के सेवन करने वाले यह कहते पाए जाते हैं कि अब उन्हें इसकी आदत लग चुकी है और यह छूटती नहीं है. जब कि मेरा अनुभव ये रहा है कि यदि दृढ़ इच्छा शक्ति से प्रण कर लिया जाए कि “आने वाले दस दिन में कुछ भी हो जाए मैं आज से तंबाकू... Continue Reading →

महामूर्ख़शिरोमणि

कभी आपने सोचा के मूर्खों की श्रेणियाँ क्या संभव है. तो अल्प बुद्धि या मूर्खता की - प्रथम श्रेणी है मूर्खश्रीद्वितीय महामूर्खतृतीय महामूर्खश्रीचतुर्थ महामूर्खाधिराज औरपंचम महामूर्ख़ाशिरोमणि यह कहना कठिन है कि मूर्ख की 1-5 की श्रेणी के मध्य कौन उपस्थित है और कौन अनुपस्थित. थोड़ी मूर्खता तो वो हर व्यक्ति में होती ही है मानो... Continue Reading →

Forgive Easily !

There is an Old saying goes like FORGET & FORGIVE. It simply means the situations and people who don’t continue to be suitable to your own philosophy, Psychology or psyche should be forgotten and forgiven for whatever good or bad they have done to you. Normally, it happens like we come across with variety of... Continue Reading →

सहारे का कंधा

Organ Mania इंसान के शरीर में सबसे भरोसेमंद सोशल - ऑर्गन कोई और नहीं बल्कि आपका कंधा है। यह सुनने में अजीब लग सकता है। इंसान के शरीर के एलीट और प्रीमियम ऑर्गन्स के साथ, यह असल में नामंज़ूर करने योग्य वाक्य लगता है। सबसे ऊपर तो वह अंग प्रतीत होता है जिसमें 'ऑल ऑर... Continue Reading →

What Can You Be?

What can you be apart from being a Mother, grandson, son, brother, sister, father or anything in relation? What else can you be from being a friend, a colleague, a subordinate, an officer, a helper or a true leader ? What else can you be apart from being a Netizen or a citizen or just... Continue Reading →

अनुशासित अमेरिका

अमेरिका जब भी जाओ एक नए प्रकार से अचंभित करता है पायनियर है याने अग्रणी है आविष्कार करते रहने की अवधारणा के लिए और उसे लागू करने के अभिनव विचार और प्रयास की प्रतिबद्धता आश्चर्यचकित करती है. यहाँ के नागरिकों का सड़क पर कार परिचालन में अनुशासन राष्ट्र के चरित्र का एक उदाहरण प्रस्तुत करता... Continue Reading →

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