पौराणिक कथाओं का हमारे जीवन में विशेष स्थान है जो सामाजिक व्यवस्था को एक नई सोच के साथ शुद्धता प्रदान करने का प्रयास करते है जैसे वनवास में माँ सीता की सुरक्षा के लिए उनके देवर लक्ष्मण ने लक्ष्मण रेखा की सुरक्षा रेखा खींची थी और वह लक्ष्मणरेखा मां सीता के लिए नहीं थी जिसके निहितार्थ हमारे लिए थे, समाज के लिए संदेश था कि लक्ष्मण रेखा तो स्वयं खींचकर उसका पालन करना पड़ता है चाहे वह धन एकत्र करने की, रूप सौंदर्य पाने की हो, सत्ता प्राप्ति में रुचि हो अनाचार की हो या सदाचार की हो. सीमा का पालन करना प्राकृतिक तो है.
उसी प्रकार भगवान श्रीराम ने कई बार अपने दूतों को भेज कर रावण और रावण की लीला को विवेक अनुसार निर्णय लेने के लिए समझाये देने के प्रयास किया परंतु रावण को नहीं समझना था तो ना समझे, बाकी इतिहास है.
एक अन्य प्रसंग में भगवान शिव ने अपनी एक भक्त को प्रसन्न होकर वरदान दिये कि वह जिस भी सिर पर हाथ रखें तो वह भस्म हो जाए.
इन सभी कथानकों में यह शिक्षा प्राप्त होती है कि विवेक के प्रयोग से ही सुधिपूर्वक विकास की प्राप्त की जा सकती है.
एक अन्य आधुनिक उदाहरण में मानव समाज के भस्मासुर जैसी गलती की संभावनाएं प्रतीत हो रही है. आज के राजनीतिक परिदृश्य में और वैज्ञानिक उन्नति के परिदृश्य में ए. आई. याने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का बड़ा जोर है जिसमें ए.आई. सर्वर्स को ठंडा रखने के लिए अत्यधिक पानी की ज़रूरत पड़ती है.
अब पानी के स्रोत और भंडार सीमित है परंतु जीव और मानत जीव के लिए पानी की प्रचुर मात्रा है. परंतु यदि यही पानी आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस के सर्वर के तापमान को ठंडा रखने के लिए प्रयोग में लाया जाने लगे जिसमें वैश्विक स्तर पर बहुत बड़ी मात्रा में पानी की आपूर्ति लगेगी तो निश्चित रूप से जान जीवन के लिए की पानी की कमी पड़ेगी.
इस तरह के विकास को लक्ष्मण रेखा और राम के दूतों द्वार विवेकपूर्ण निर्णय लेने की क्षमता की और ध्यान दिए जाने की आवश्यकता है अन्यथा मानव जाति भस्मासुर की तरह स्वयं नष्ट होने की और अग्रसर होगी.
विचार कीजिए

Leave a comment