माया में आनंद कहां!

जो मज़ा तलब में है
वो हासिल में कहाँ.
जो मज़ा यात्रा में है
वो मंज़िल में कहां. !


मिला है उसमें रह ख़ुश
अनंत की तलाश कहां.
भक्ति में जो उतरे गए
माया में आनंद कहाँ.!


प्यार में डूबने को सदा तरसे
पा गए प्रेम तो विरक्ति यहाँ.
जो किया न्योछावर सब कुछ
धोखा खाने का नियम यहाँ !

दौड़ ऐसी माया की अनंत
लथपथ घिसते तलवे यहाँ
जमा करते धन यश अपयश
छूटता सब अंतिम दिन यहाँ !

जन्म ऐसे भोगता जैसे अमर
लोभ अन्याय स्वार्थ को हाँ
कर्म का पीठ छोड़ेगा नहीं
जीवित रहते भूलते सब यहाँ!

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