बचपन से ही एक कथा सुनते आते हैं कि हर मानव के अंतर्मन में दो भेड़िये रहते हैं.एक अच्छा और एक बुरा.और दोनों आपस में लड़ते रहते हैं!यह पूछे जाने पर कि आख़िर इन भेड़ियों की लड़ाई में जीतता क़ौन है ? तो उत्तर मिलता था जिस भेड़िए को तुम भोजन कराते हैं वह भेड़िया... Continue Reading →
That’s none of my business.
Sun is rising, winds are flowing,Seas have high tide or low tide,Whatever is being happened,That’s none of my business. You are being analysed,good or bad, dumb or wise.Whatever is being thought,That’s none of my business. Get abused or be disliked,You will be cursed or blessed,Whatever is abysmally coming,That’s none of my business. Possess money or... Continue Reading →
सही होना तेरा, तय है(548)
जो आप रीढ़ की सीधी हड्डी लिए हैंतो आप पर आरोप लगना तय है जो आप सज्जन और सत्यवादी हैंतो आपका सजा भुगतना तय है. जो घर में या परदेश में ख़ुश हैंतो आपका साधु सम भाव तय है जो अकेले के संगति में तुष्ट हैंतो आध्यात्मिक होना तय है जो मांगते वक़्त लजा जाते... Continue Reading →
थमो कभी
थमो कभी किसी पेड़ के नीचेसुनो पत्तियों की सरसराहटबहती हवा हौले से कहती कुछसुनो हृदय से सन्नाटे में हर आहट थमो कभी किसी बहती नदी किनारेतको नदी को जैसे बहता समय हौले हौलेलहरें उठती गिरती नाचती नृत्य करतीसुन सको तो सुनो क्या कहती हौले हौले थमो कभी यूँ ही किसी पहाड़ के नीचेकरो वार्ता कि... Continue Reading →
60 बरस कम नहीं होते
60 बरस कम नहीं होते जब आए थे गर्भ मेंसोचा सदा रहेंगे छोटेरोटी पानी छत की दौड़ मेंबने रहे हैं भागते इकलौते कहने को समय सदा शाश्वत हैबीतते समय के कभी पाँव न होतेदेख देख काल को अपना समझतेसमय बीतता ख़र्चा हम होते उम्र यूं ही दराज़ होती हैज्ञानी होते हैं कभी खोतेबरसों की बाजीगरी... Continue Reading →
बदला
जीव मात्र का स्वभाव बदला लेने का है और जो क्षमा कर बदले का भाव छोड़ दिया दिया तो प्रकृति की लीला के सद्भाव के दौर की और एक क़दम बढ़ा दिया है यहाँ मज़बूत से मज़बूत लोहा टूट जाता हैकुछ झूठ इकट्ठे हो तो बेशक़ सच्चा टूट जाता है आप सबको ख़ुश नहीं कर... Continue Reading →
Black Sheep
Title, Black Sheep is a physical entity at a first go, but in the scale of virtues & vices, the White sheep is on one hand while the Black sheep is on the other. Greed to amass Millions with all injustice has been characteristic vice, which everybody possess in quantity variable to everybody’s maturity, psych,... Continue Reading →
पुस्तक: संभोग से समाधि की ओर
1970 के दशक के अंतिम दौर में मानव जीवन के विभिन्न आयामों और आध्यात्मिकता के अनमोल और अद्वितीय व्याख्या के तर्कशास्त्री आचार्य रजनीश (कालांतर में ओशो) के द्वारा रचित “संभोग से समाधि की ओर” पढ़ने का अनुपम अनुभव हुआ. जितना उत्तेजक पुस्तक का शीर्षक है 464 पृष्ठों में उतने ही तीव्र और चुभने वाले विचार... Continue Reading →
मेरा पुनर्जन्म कैसा हो?
अगले जनम में क्या बनना चाहोगे?? इस अजूबे प्रश्न को सुनकर मुझ पर तो जैसे वज्रपात हुआ और एक क्षण को मेरे प्रिय मित्र के प्रश्न का उत्तर आने से पहले यह भाव जनित हुआ कि बेटा अनिल यह प्रश्न अब किसी भी दिन सर्वशक्तिमान परम पिता के द्वारा भी पूछा जा सकता है जिसके... Continue Reading →
दो भाई(541)
दो भाईसुलझे हुएउच्च स्तरीय किसानअपने काम से काम रखने वालेराजनीति से दूरसधा अपने में मस्तमाता पिता ने जीते जी अपनी विशाल खेती आधी आधी बाँट दी, यह सोच कि कोई झगड़ा न हो, असंतोष न हो भाइयों में और यदि हो तो तो मेरे सामने हो, मेरे बाद नहीं. नवाचार सोच भाई भी ऐसे दोनों... Continue Reading →
बीज में वृक्ष, वृक्ष में बीज
इस गर्मियाँ आरंभ हो रही हैं और पतझड़ का मौसम प्रभावी है. पेड़ों से उनके आभूषण रूपी पत्तों के साथ साथ उनके बीज भी अपनी पौध रूपी संतति को आगे बढ़ाने के लिए यात्रा तत्व सर्वथा बिखरे पड़े दिखाई देते हैं जो 1 नई परिकल्पना को जन्म देते हैं एक बीज विशेष गुणसूत्रों से निर्मित... Continue Reading →
मित्र संग, यात्रा रंगारंग
चार हैं अभिन्न मित्रबचपन के पुराने मित्र52 साल पुराने मित्रफिर मिले जहरीले मित्र जंगल में मिले मित्रमंगल करने मिले मित्रऔर कुछ ऐसे मिले मित्रजो धींगामस्ती के मित्र . आज वो ग़ज़ब गपशप हुई जिसकी कल्पना भी नहीं की गई थी कुछ ऐसा हुआ है इस बार कि मैंने अपनी स्कूल की क्लास २ की मित्र... Continue Reading →
रुक जाना नहीं तू कहीं हार के
538 रुक जाना नहीं तू कहीं हार के……के प्रेरक गीत का धनात्मक संज्ञान भारतीय मानस में इस गीत के सृजन वर्ष 1974 ( इम्तिहान फ़िल्म) से अपेक्षित था परंतु इस एक प्रेरक गीत का सकारात्मक प्रभाव कमोबेश भले हुआ हो देश की प्रगति में, नकारात्मक रूप से इस गीत का प्रयोग यदा कदा, यत्र तत्र... Continue Reading →
Curing
Curing is a simple looking yet mysterious word in literal means. Curing pertains to a process where in an object, a subject, an event for a life is developed in such a way with inclusion of time, material and correct orientation that the purpose of object or subject or of event of life is fulfilled.... Continue Reading →
Truth & Lie
दो सगे भाई की कहानी कुछ इस प्रकार है एक का नाम सच और एक का नाम झूठ ! जहाँ सच एक सीधा कुलीन और साधु व्यक्तित्व का अधिकारी हो सदैव ख़ुश रह कर प्राकृतिक न्याय के अनुरूप अपनी जीवन यात्रा को सफल करने का प्रयास करता है वहीं झूठ मलिन विचारधारा और मानसिकता के... Continue Reading →
Transfer
दो मित्रों का गरमागरम संवाद- पीड़ित- इसने मेरा ट्रांसफर किया है मैं इसकी 12 बजा दूँगा. मित्र- ये 12 बजाना क्या होता है ? पीड़ित- मतलब मैं इस अधिकारी की व्यवस्था लगा दूँगा ! मित्र- अरे भाई, व्यवस्था लगाने में क्या होता है ? पीड़ित- अरे मेरे कहने का मतलब ये हैं कि मैं इनका... Continue Reading →
Ignore Disposables!
534 Happened to visit a premium theatre to watch a highlighted movie and look, what did I find? The water dispenser near washroom was maintained with high-quality along with disposable tumblers made from paper. People were coming & having the paper glass like a drop down menu from glass dispenser filling potable water from the... Continue Reading →
Deshi? A Little Bit!
एक अति चर्चित और लोकप्रिय मूवी देखने के लिए एक उच्च कोटि के थिएटर में जाने का अवसर हुआ और देखो, मुझे क्या मिला? वॉशरूम के पास पीने के पानी का एक उच्च स्तरीय जल काउंटर था (जिसे प्याऊ नहीं कहा जा सकता) और पानी पीने के लिए कागज़ से बने डिस्पोजेबल गिलास भी एक... Continue Reading →
Dhurandhar
No Spoiler, Just Movie Review कहने को तो धुरंधर शब्द का शाब्दिक अर्थ जांबाज, शक्तिशाली, वीर और बलशाली - मेधावी माना जाता है परन्तु देश की सुरक्षा में लगे जासूस की कहानी इस चलचित्र धुरंधर में पहली बार कुछ ऐसा दृश्य प्रस्तुत करती है जो हम भारतीयों के लिए ना केवल आश्चर्य का विषय है... Continue Reading →
Whose Fault?
परिवार की गंभीर बैठक में बड़े बुजुर्ग बैठ पंचायत कर झगड़ा शांत करने की कोशिश कर रहे थे.आख़िर बड़ा भाई बोल पड़ा, गलती किसकी ? माहौल में एक तल्ख़ चुप्पी पसार गई.बड़े भाई ने कहना जारी रखा. गलती तो मैं छोटे और मंझली की नहीं मानता. गलती का पुराना विज्ञान है कि सही व्यक्ति ही... Continue Reading →
Conspiracy
छोटी सी कॉर्पोरेट कहानी कुछ ऐसा हुआ जब एक कॉरपोरेट हॉस्पिटल के उच्चाधिकारी ने एक वरिष्ठ चिकित्सक पूछ लिया कि क्या आप मेरे विरुद्ध साज़िश कर रहे हैं ? चिकित्सक ने आश्चर्यचकित होते हुए कहा, मैं और साज़िश ! किसी के भी प्रति मेरे मन में कोई द्वेष भाव नहीं है आता. साज़िश का तो... Continue Reading →