यथा विक्रांत गाथा

क्या अजीबोगरीब तंत्र है,कभी पेट्रोल डीज़ल की महँगाई है तो कभी गैस की समस्या है. सड़क पर चलने का तौर-तरीक़ा नियंत्रण करने वाला कोई नहीं है. यहाँ हम इनकम टैक्स और इनडायरेक्ट टैक्स भर कर परेशान हुए जा रहे हैं और कोई सामाजिक सुधार ही नहीं रहा है इस देश की कुछ नहीं हो सकता देश. This country has no future.!!!

जूनियर मित्र के ये कड़वे वाक्य सुन मेरा मन भर आया. सोचने लगा, बात तो सही ही कही है और खीज भी सही है कि देश के तंत्र का कौन तारणहार है.

फिर भी समूह में वार्ता और विचार पैदा करने को मैं कूद गया.

पूछ लिया प्रश्न.

कितना टैक्स भरते हो ?

9 लाख और हर खरीदी पर इनडायरेक्ट टैक्स अलग जो जीएसटी है.

इतना टैक्स देने के बाद आपकी देश समाज और तंत्र से उम्मीद उचित है और आप का सोच सही है परंतु आपको एक सलाह दूं?

जी हाँ आदरणीय, पर सरकारों के पक्ष या विपक्ष में सांत्वना और नैतिकता पर व्याख्यान न दें. जूनियर मित्र ने कहा.

अरे नहीं भाई. थोड़ा वरिष्ठ हूँ तो सलाह दूँगा. 15 दिन की छुट्टी दूँगा तुम्हें!

अरे सर, ये क्या कह रहे हैं.

नहीं, मेरी राय है कि इस रोज़ की रोटी-बाटी से बाहर निकलो, कुएँ से बाहर आओ और थोड़ा भारत घूमो.

वह क्यों?

इसलिए कि तुम देख सको कि तुम्हारा टैक्स क्या कर रहा है.

अरे सर ये तो पता है. आप ही अपने अनुभव से बतला दो.

तो सुनो. तुम्हें तो पता है कि मैं अभी गोवा गया था न !

जी सर.

मैं कारवार गया था जहाँ मैं ने भारत में ही बना देशी विमानवाहक पोत देखा.

ये क्या होता है?

Air Craft Carrier.

जी समझा नहीं.

इसीलिए कह रहा हूँ कि देशाटन करो.

फ़ालतू के चोंचले हैं सर.

देश चलाने के लिए नीति नियंताओं और तंत्र के लोगों को त्याग, मेहनत और दूरदृष्टि से भारत को चारों दिशाओं से सुरक्षित बनाये रखने के लिए श्रमसाध्य प्रयास करना होते हैं और इस हेतु कानों का नहीं आँखों का सहारा लेना पड़ता है तभी तन्त्र पर भरोसा आयेगा.

सन्नाटा!

चलो छोड़ो ये बातें. मैं बताता हूं. गोवा से दक्षिण में नब्बे किलोमीटर दूर कर्नाटक में एक नौसेना बेस है “कारवार”, जहाँ मुझे नौसेना के रूस से आयातित विमान वाहक पोत विक्रमादित्य के दिव्य और लोमहर्षक दर्शन हुए.

पर आप तो विक्रांत बोले थे.

हाँ. विक्रांत को भारत ने कोचीन शिपयार्ड में 2021 में बना है जिसे मुझे मेरे पुत्र के नौसेना में सेवारत वायु संचालन अधिकारी मित्र शौर्य ने अंदर- बाहर से विजिट कराई और मुझे धन्य किया.

ऐसा क्या देख लिया आपने जो यूट्यूब और गूगल में नहीं मिलता है.

हमारे ईष्ट सदैव हमारे हृदय में रहते हैं परंतु जब आप मंदिर में जाकर दर्शन करते हैं तो आपकी भावना भिन्न होती है. यही मेरे साथ हुआ. जब मैं नौसेना बेस में प्रविष्ट हुआ और सुरक्षा बलों के जवानों की ड्यूटी देखी. समुद्र में खड़े जब विक्रांत नामक भारत की शान देशी विमान वाहक पोत का दर्शन हुआ तो मेरे नेत्रों में विशालकाय विक्रांत समा नहीं पाया और मैं बस आश्चर्यचकित हो मुटूर मुटूर देखता ही रह गया!

मुटूर मुटूर?

इसीलिए कहता हूँ कुएँ के मैंढक न बने रहो. यात्रा करो तो तुम्हें पता चलेगा कि जब आश्चर्य होता है तो शब्द नहीं सूझते हैं और आप निशब्द रह जाते हैं.

श्रोता निशब्द थे. आतुर थे, आगे की अनुभव सुनने को.

विक्रांत का सामने से नंगी आँखों से इस विहंगम आकर की मानवीय रचना को देखना, मंत्रमुग्ध कर देने वाला है.

विक्रांत के सामने उपस्थित हो आप निशब्द हो स्तब्ध रह जाते हैं.

विक्रांत को पानी में खड़ा देखकर आप आश्चर्य में डूब जाते हैं जो लगभग 500 घरों की एक कॉलोनी नुमा तैरता नगर है.

विक्रांत की संरचना और कर्मियों की उपस्थिति को देखकर आप हैरान रह जाते हैं कि यह हमारे जल्दबाजी में दिए गए टैक्स का सही उपयोग हो रहा है.

विक्रांत को देखकर हमारे तंत्र की गंभीरता और सुरक्षा चिंताओं के बारे में हमारी शिकायतें गहरे समुद्र में डूब जाती हैं.

कितना बड़ा है जो आप इतना चकित हो गए.?

कभी 100 मीटर दौड़े हो और कितने सेकंड में. यदि दौड़े हो तो बताओ तो तुमको सही सही अंदाज़ लगेगा.

एक ने पीछे से हाथ उठाया.

तो सुनो. ये लोहे के हज़ारों टन से बना 16 मंजिला पानी में तैरता पोत 262 मीटर लंबा है और 62 मीटर चौड़ा है जिस के फ्लाइट डेक पर 36 लड़ाकू विमान और हेलीकॉप्टर खड़े हो सकते हैं. ये इतना बड़ा है जो तीन फुटबॉल मैदान के बराबर है. वही फ्लाइट डेक के नीचे हेंगर है जो 2 मंज़िला है.

हेंगर क्या होता है.

हेंगर, लड़ाकू विमानों को शांतिकाल में और प्रशिक्षण काल के अंतराल अवधि में सुरक्षित रखने का स्थान है. आश्चर्य तो तब होता है जब हेंगर के मध्य में खड़े हों तो इस हेंगर में छत को सहारा देने के लिए किसी भी पिलर के दर्शन नहीं होते हैं.

1200 से 1500 कर्मियों से सज्जित इस बड़ी नाव में 1500 फीट के प्लॉट साइज बराबर दो लिफ्ट स्थापित हैं जो हेंगर में सुरक्षित रखे लड़ाकू विमान को ऊपर स्थित फ्लाइट डेक तक ले आती हैं जहाँ से समंदर में तैरते इस जहाज़ से विमान उड़ान भर सकते हैं. नाविकों, अभियंताओं, सहायकों, विमान-चालकों, नेविगेटर, भोजन निर्माता, नाई, धोबी, स्वच्छक, पेंटर और सैनिकों से भरा ये टावरिंग सिस्टम अद्भुत है. 16 मंजिलों में फैला हुआ ये लौह धातु का संसार.

सीढ़ी दर सीढ़ी,

क्यूबिकल नुमा रहवासी कक्ष,

ऊर्जा की निरंतर सप्लाई,

प्रत्येक मोड़ पर फर्स्ट-ऐड बॉक्स,

वातानुकूलित कक्षों की अनगिनत श्रृंखलाएं,

फायर सेफ्टी के लिए प्रत्येक गलियारे में शमन यंत्र, अतिशय स्वच्छता,

प्रतिदिन होने वाली आयल पेंट की पुताई और उसकी महक से विस्मित कर देने योग्य साक्षात्कार हुआ.

और जब खुले आसमान के नीचे शिप की छत याने फ्लाइट डेक पर पहुँचे तो आँखें फटी की फटी रह गईं क्योंकि लोहे का बना इतना बड़ा विमान रनवे कभी सोचा ही न था. देखने की तो बात ही दूर.

चारों ओर संतरी पहरे पर. नियन्त्रण कक्ष का विहंगम दृश्य फ्लाइट सुपरवाइजर ने लड़ाकू विमान के विक्रांत के फ्लाइट डेक से उड़ान भरने और लैंडिंग के सूक्ष्म बिंदुओं को विस्तृत रूप से समझाया तो तकनीक, साहस और खतरे का वह दृश्य उपस्थित हुआ कि मेरे तो रोंगटे खड़े हो गए. देश की सुरक्षा इसी प्रकार विभिन्न क्षेत्रों में समुचित रूप से हो इसलिए शासन, प्रशासन और राजनीतिक प्रतिबद्धता एकरूप हो कार्य करती है. हम छोटा सा दृष्टिकोण लेकर अपने आप में खीजते रहते हैं जबकि कुएँ से बाहर निकले तो चीन की सीमा से लगे तवांग, पाकिस्तान की सीमा से लगे कारगिल और सियाचिन में प्रतिदिन 24 घंटे हमारा अप्रत्यक्ष सहयोग कार्यरत रहता है और सदैव रहता रहेगा.

सभा में निपट सन्नाटा था.

2 thoughts on “यथा विक्रांत गाथा

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  1. INS Vikrant का विवरण पढ़कर उसे देखने की उत्कंठा बढ़ गई है l कराधान से प्राप्त आय का नियोजन किस प्रकार हो रहा है, इसका एक उत्कृष्ट उदाहरण INS विक्रांत है l उत्तम तथ्यपरक आलेख के लिए साधुवाद l

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