Sex Act (INTERCOURSE) - It’s a very natural act and even every land or aquatic animal knows how to perform. It’s not rocket science & requires just cool state of mind & mutual consent.BE PHYSICALLY FIT. Go slow in the Sex Act. Don’t press the panic button during the sex act. Foreplay is the key... Continue Reading →
Analyse India !
A. India is running after two affirmative things since last two and half decades as a Society.….. A1. The first thing on a good note is desperate money making at all levels, from individual to corporate to national level by all hooks & crooks. A2. And the second looking like factor is India is running... Continue Reading →
मैं भी भगवान बनूं!!! (630)
भगवान को परिभाषित करना कठिन नहीं लगभग असंभव है क्योंकि भगवान की अवधारणा मूलतः भौतिक और शारीरिक अधिक है. समझ ना आने वाली अभौतिक या अशरीरी शक्ति के ईश्वरीय सिद्धांत से आलोकित हो तो भी आश्चर्य नहीं है. साकार रूप से हम अपने पूजनीय आराध्य के भक्त होते हैं. हमारे माँ पिता सबसे पहले परम... Continue Reading →
रोता मानव!
पैदा होते ही समय पर रोना, मानव के नवजात शिशु के लिए अनिवार्य है. बाक़ी सब मिथ्या है.! नाटक है! दिखावा है और विदा होती दुल्हन की रुदन भी रस्म अदायगी ही है! क्या ये सही है. परंतु एक अलग तरह कारण बड़ा सामान्य है जो बिना आंसुओं के साथ रोए प्रस्तुत होता है जो... Continue Reading →
पिता बनना आसान नहीं!
पिता स्थूल जीव मात्र नहींपिता ऐसे प्राणप्राण होतेघर की धुरी में अनमोलधन-मशीन मात्र नहीं होते पिता उस जीव के वाहकसंतान के जनक मात्र नहींनौ माह के गर्भ से आगे होजीवन सुरक्षा के हामी होते पिता एक नाम मात्र नहींएक अलौकिक दायित्व हैसंतान के फलने फूलने काएक अलिखित साहित्य है पिता की निगाह सदा गोचरपलते बढ़ते... Continue Reading →
यात्रा तो पृथ्वी की है!
यात्रा तो पृथ्वी की हैबना लो अनुपम स्वर्गकर्म अपना निर्णय करया बना लो दर्द का नर्क यात्रा सात समुंदर की हैबना लो सुंदर जीवनअनुशासन प्रेम दया सेया बना लो दर्द का नर्क यात्रा तो पंचतत्व की हैबना लो हरा भरा मैदानसदस्यता से रहे भरपूरया कष्ट अहंकार का नर्क यात्रा तो सद्भाव की हैहरेक को बना... Continue Reading →
भस्मासुर 625
पौराणिक कथाओं का हमारे जीवन में विशेष स्थान है जो सामाजिक व्यवस्था को एक नई सोच के साथ शुद्धता प्रदान करने का प्रयास करते है जैसे वनवास में माँ सीता की सुरक्षा के लिए उनके देवर लक्ष्मण ने लक्ष्मण रेखा की सुरक्षा रेखा खींची थी और वह लक्ष्मणरेखा मां सीता के लिए नहीं थी जिसके... Continue Reading →
मेरी फाँस
फाँस लकड़ी अथवा बाँस की वह छोटी से छोटी छिलपट होती है जो पैर या हाथ की त्वचा में धँस जाए तो दर्द और चुभन से निरंतर अपनी उपस्थिति को न केवल अंकित करती चलती है बल्कि जातक को बेचैन कर देती है कि कैसे इस फाँस से मुक्ति पाई जाए !! कुछ फाँस ऐसी... Continue Reading →
ये हरा भरा
ये हरा भराकितना खरासदा हर्षितकभी नहीं बुरा डाल डगालीहरा हरियालीजड़ है चेतनस्वर जैसे जुगाली हरे हरे लचकदारकोमल निर्मल पत्तेछोटा सा जीवनवर्ष होते झड़ते है मजबूत तनासीना ताने खड़ाझंझावतों को झेलकर्तव्य को अड़ा
Movie: Ladies First
ये जुमला बचपन से सुनते चले आए और उसका पालन भी करते आए कि “लेडीज फर्स्ट” को वरीयता दी जाए. और इसी नाम की एक अंग्रेज़ी चलचित्र (नेटफ़्लिक्स- डब्बड हिंदी भाषा में भी उपलब्ध) के देखने का सौभाग्य हुआ. पुरुष प्रधान समाज में पुरुषों की श्रेष्ठता की हेकड़ी, दंभ और घमंड उन्हें सामाजिक रूप से... Continue Reading →
Movie: The Bucket List
हॉलीवुड के चलचित्रों में प्रयोग, नवाचार और पुरातन पंथी विचारों से अलग होकर सोचने की प्रवत्ति उन्हें नए नए विषय पर चलचित्र बनाने के अक्सर प्रदान करती है यह प्रयोगधर्मिता तब और भी रुचिकर और रोमांचक हो जाती है जब जैक निकलसन और मॉर्गन फ्रीमैन द्वारा अभिनीत “द बकेट लिस्ट” की अभिनव कथानक के माध्यम... Continue Reading →
अघोषित ट्रैफ़िक सुरक्षा नियम
Indian Traffic Psychology जहाँ चौराहे पर तेज गति से प्रवेश करने की आदत है यह जानते हुए भी कि तीन अन्य रास्तों से भी लगभग अंध-गति से वाहन प्रवेश कर रहे हैं ! धीमे प्रवेश से सुरक्षा सौ प्रतिशत है. ✔️सचेत रहें - उपचार महँगा है ! Indian Traffic Psychology जब आप वन-वे पर हों... Continue Reading →
सर्वस्व समर्पण (619)
भगवान तुल्य बौद्ध से सम्बंधित कहानियाँ बचपन में पढ़ी कहानियाँ एक विभिन्न स्थान रखती है. एक घटनाक्रम में गाँव-गाँव से गुज़रते हुए बुद्ध को सभी गांववासी अपना कुछ न कुछ श्रद्धास्वरूप समर्पित कर रहे थे. कोई सोने का कटोरा, कोई शॉल, कोई छड़ी, कोई जूते या कुछ न कुछ परंतु वे किसी भी भेंट को... Continue Reading →
माया में आनंद कहां!
जो मज़ा तलब में हैवो हासिल में कहाँ.जो मज़ा यात्रा में हैवो मंज़िल में कहां. ! मिला है उसमें रह ख़ुशअनंत की तलाश कहां.भक्ति में जो उतरे गएमाया में आनंद कहाँ.! प्यार में डूबने को सदा तरसेपा गए प्रेम तो विरक्ति यहाँ.जो किया न्योछावर सब कुछधोखा खाने का नियम यहाँ ! दौड़ ऐसी माया की... Continue Reading →
आज के दौर में विवाह संस्कार की रस्मे
एक दौर था जब शादी के लिए जब घर परिवार में भाई - भतीजे, मामा - चाचा या उनके बच्चों की शादी के लिए गाँव जाना होता था तो खेलकूद और खानपान की मस्ती के साथ विवाह संस्कार की रस्म रिवाजों से भी साक्षात्कार हुआ करता था जिसमें मंडप छाने के बाद हल्दी की रस्म... Continue Reading →
Water Borne Diseases & Our Health
यह एक अटूट सत्य है कि भारत में 60 प्रतिशत जल प्रदूषित है. हमारे देश में जल जनित रोग प्रति वर्ष लगभग छह करोड़ 20 लाख मानव कार्य दिवसों को नष्ट कर देते हैं जिसका प्रत्यक्ष कारण जल जनित रोग है जिसमें सभी प्रकार के सूक्ष्मजीव जीवाणुओं विषाणु बीजाणु कोशाणु और हर नकारात्मक रसायनिक तत्वों... Continue Reading →
Fibre Rich Diet
आम तौर पर चिकित्सकों द्वारा एक सलाह अवश्य दी जाती है और वह है फाइबर रिच डाइट लेने की. अब प्रश्न उठता है कि आख़िर फाइबर होते क्या है और इनकी आवश्यकता शरीर में क्यों होती है ? ख़ासतौर से कब्जियत से पीड़ित रोगी और मधुमेह से पीड़ित रोगी के लिए चिकित्सक रेशेदार भोजन के... Continue Reading →
यथा विक्रांत गाथा
क्या अजीबोगरीब तंत्र है,कभी पेट्रोल डीज़ल की महँगाई है तो कभी गैस की समस्या है. सड़क पर चलने का तौर-तरीक़ा नियंत्रण करने वाला कोई नहीं है. यहाँ हम इनकम टैक्स और इनडायरेक्ट टैक्स भर कर परेशान हुए जा रहे हैं और कोई सामाजिक सुधार ही नहीं रहा है इस देश की कुछ नहीं हो सकता... Continue Reading →
No God !
It seems as such there is NO God. Right or am I Wrong? God OR Ancestors!!! As soon as a human Baby is born, the baby sender or executioner God -Almighty, disowns the newborn human and leaves the baby to Best of his surrounding & appropriate parenting to take a decision to lead a good... Continue Reading →
जीवन पहाड़ा 21 का
जन्म होते हीपहले 21 दिनबड़े खास हैंजीवन आगे के अगले 21 दिनबच्चा बचता हैविकास हो दूध सेखूब पनपता है 21 का पहाड़ा42 दिन का होस्वस्थ शिशु आगेबढ़ता खुश होता 63 दिन का बच्चापिये दूध और सोयेपैरों की साइकिलिंगरात को खूब जागे 84 दिन का शिशुगर्दन को होल्ड करेदेखे टुकुर टुकुरनैना इधर उधर जो 120 दिन... Continue Reading →