ये हरा भरा

ये हरा भरा
कितना खरा
सदा हर्षित
कभी नहीं बुरा

डाल डगाली
हरा हरियाली
जड़ है चेतन
स्वर जैसे जुगाली

हरे हरे लचकदार
कोमल निर्मल पत्ते
छोटा सा जीवन
वर्ष होते झड़ते

है मजबूत तना
सीना ताने खड़ा
झंझावतों को झेल
कर्तव्य को अड़ा

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