यह एक अटूट हैं कि भारत में 60 प्रतिशत जल प्रदूषित है. हमारे देश में जल जनित रोग प्रति वर्ष लगभग छह करोड़ 20 लाख मानव कार्य दिवसों को नष्ट कर देते हैं जिसका प्रत्यक्ष कारण जल जनित रोग है जिसमें सभी प्रकार के सूक्ष्मजीव जीवाणुओं विषाणु बीजाणु कोशाणु और हर नकारात्मक रसायनिक तत्वों के शरीर में पहुँचने के कारण रोग उत्पन्न होता है जल ग्रहण के सीधे मार्ग द्वारा निरंतर आपके स्वास्थ्य को कमज़ोर बनाने और रोगग्रस्त बनाने में सहायक है
शरीर में किसी भी रोग की उपस्थिति रोग प्रतिरोधक क्षमता तथा रोग कारक तत्वों की उपस्थिति के मध्य स्थापित सामंजस्य पर निर्भर करता है इसी प्रकार जल ग्रहण करने से होने वाली जल जनित रोग मानव शरीर का 1 चक्र पालन करते हुए मानव जाति वह सदियों से जीवित बने हुए हैं सामान्यतः निम्नांकित जल जनित रोग देखने में किसी भी चिकित्सालय या चिकित्सक के पास मिलते हैं
जीवाणु के लिए टाइफाइड या मियादी बुखार विषाणु जनित हेपेटाइटिस या वायरस संक्रमण पोलियो तथा परजीवी जनित नारू रोग
वैसे तो मानव की लगभग आठ मीटर लंबी आंतों में लाभकारी बैक्टीरिया याने जीवाणुओं का भी एक बड़ी कॉलोनी उपस्थित रहती है जो भोजन के पचन -पाचन में सहयोग करती है और जल के माध्यम से प्रतिदिन बड़ी संख्या में रोगकारक सूक्ष्म तत्वों का प्रवेश मानव शरीर में होता है. जब तक रोग प्रतिरोधक क्षमता उच्च स्तर पर बनी हुई है रोग के लक्षण उत्पन्न नहीं होते हैं परंतु जैसे ही रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हुई हुई तो ये जीवाणु के रूप में सूक्ष्मतत्व अपनी रोगकारक ताक़त को बढ़ा लेते हैं और रोग उत्पन्न करने के क्लिनिकल लक्षणों को प्रस्तुत कर देते हैं
शुद्ध जल का सेवन सुनिश्चित करना अनिवार्य है.
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