ये हरा भराकितना खरासदा हर्षितकभी नहीं बुरा डाल डगालीहरा हरियालीजड़ है चेतनस्वर जैसे जुगाली हरे हरे लचकदारकोमल निर्मल पत्तेछोटा सा जीवनवर्ष होते झड़ते है मजबूत तनासीना ताने खड़ाझंझावतों को झेलकर्तव्य को अड़ा
Movie: Ladies First
ये जुमला बचपन से सुनते चले आए और उसका पालन भी करते आए कि “लेडीज फर्स्ट” को वरीयता दी जाए. और इसी नाम की एक अंग्रेज़ी चलचित्र (नेटफ़्लिक्स- डब्बड हिंदी भाषा में भी उपलब्ध) के देखने का सौभाग्य हुआ. पुरुष प्रधान समाज में पुरुषों की श्रेष्ठता की हेकड़ी, दंभ और घमंड उन्हें सामाजिक रूप से... Continue Reading →
Movie: The Bucket List
हॉलीवुड के चलचित्रों में प्रयोग, नवाचार और पुरातन पंथी विचारों से अलग होकर सोचने की प्रवत्ति उन्हें नए नए विषय पर चलचित्र बनाने के अक्सर प्रदान करती है यह प्रयोगधर्मिता तब और भी रुचिकर और रोमांचक हो जाती है जब जैक निकलसन और मॉर्गन फ्रीमैन द्वारा अभिनीत “द बकेट लिस्ट” की अभिनव कथानक के माध्यम... Continue Reading →
अघोषित ट्रैफ़िक सुरक्षा नियम
Indian Traffic Psychology जहाँ चौराहे पर तेज गति से प्रवेश करने की आदत है यह जानते हुए भी कि तीन अन्य रास्तों से भी लगभग अंध-गति से वाहन प्रवेश कर रहे हैं ! धीमे प्रवेश से सुरक्षा सौ प्रतिशत है. ✔️सचेत रहें - उपचार महँगा है ! Indian Traffic Psychology जब आप वन-वे पर हों... Continue Reading →
सर्वस्व समर्पण (619)
भगवान तुल्य बौद्ध से सम्बंधित कहानियाँ बचपन में पढ़ी कहानियाँ एक विभिन्न स्थान रखती है. एक घटनाक्रम में गाँव-गाँव से गुज़रते हुए बुद्ध को सभी गांववासी अपना कुछ न कुछ श्रद्धास्वरूप समर्पित कर रहे थे. कोई सोने का कटोरा, कोई शॉल, कोई छड़ी, कोई जूते या कुछ न कुछ परंतु वे किसी भी भेंट को... Continue Reading →
माया में आनंद कहां!
जो मज़ा तलब में हैवो हासिल में कहाँ.जो मज़ा यात्रा में हैवो मंज़िल में कहां. ! मिला है उसमें रह ख़ुशअनंत की तलाश कहां.भक्ति में जो उतरे गएमाया में आनंद कहाँ.! प्यार में डूबने को सदा तरसेपा गए प्रेम तो विरक्ति यहाँ.जो किया न्योछावर सब कुछधोखा खाने का नियम यहाँ ! दौड़ ऐसी माया की... Continue Reading →
आज के दौर में विवाह संस्कार की रस्मे
एक दौर था जब शादी के लिए जब घर परिवार में भाई - भतीजे, मामा - चाचा या उनके बच्चों की शादी के लिए गाँव जाना होता था तो खेलकूद और खानपान की मस्ती के साथ विवाह संस्कार की रस्म रिवाजों से भी साक्षात्कार हुआ करता था जिसमें मंडप छाने के बाद हल्दी की रस्म... Continue Reading →
Water Borne Diseases & Our Health
यह एक अटूट हैं कि भारत में 60 प्रतिशत जल प्रदूषित है. हमारे देश में जल जनित रोग प्रति वर्ष लगभग छह करोड़ 20 लाख मानव कार्य दिवसों को नष्ट कर देते हैं जिसका प्रत्यक्ष कारण जल जनित रोग है जिसमें सभी प्रकार के सूक्ष्मजीव जीवाणुओं विषाणु बीजाणु कोशाणु और हर नकारात्मक रसायनिक तत्वों के... Continue Reading →
Fibre Rich Diet
आम तौर पर चिकित्सकों द्वारा एक सलाह अवश्य दी जाती है और वह है फाइबर रिच डाइट लेने की. अब प्रश्न उठता है कि आख़िर फाइबर होते क्या है और इनकी आवश्यकता शरीर में क्यों होती है ? ख़ासतौर से कब्जियत से पीड़ित रोगी और मधुमेह से पीड़ित रोगी के लिए चिकित्सक रेशेदार भोजन के... Continue Reading →
यथा विक्रांत गाथा
क्या अजीबोगरीब तंत्र है,कभी पेट्रोल डीज़ल की महँगाई है तो कभी गैस की समस्या है. सड़क पर चलने का तौर-तरीक़ा नियंत्रण करने वाला कोई नहीं है. यहाँ हम इनकम टैक्स और इनडायरेक्ट टैक्स भर कर परेशान हुए जा रहे हैं और कोई सामाजिक सुधार ही नहीं रहा है इस देश की कुछ नहीं हो सकता... Continue Reading →
No God !
It seems as such there is NO God. Right or am I Wrong? God OR Ancestors!!! As soon as a human Baby is born, the baby sender or executioner God -Almighty, disowns the newborn human and leaves the baby to Best of his surrounding & appropriate parenting to take a decision to lead a good... Continue Reading →
जीवन पहाड़ा 21 का
जन्म होते हीपहले 21 दिनबड़े खास हैंजीवन आगे के अगले 21 दिनबच्चा बचता हैविकास हो दूध सेखूब पनपता है 21 का पहाड़ा42 दिन का होस्वस्थ शिशु आगेबढ़ता खुश होता 63 दिन का बच्चापिये दूध और सोयेपैरों की साइकिलिंगरात को खूब जागे 84 दिन का शिशुगर्दन को होल्ड करेदेखे टुकुर टुकुरनैना इधर उधर जो 120 दिन... Continue Reading →
अपनी शराब – पराई शराब
जीवन के सबक हर व्यक्ति के दिन और रात के पाठ होते हैं और सुधी व्यक्ति अपनी जीवन के सीखे हुए सबकों से ही नहीं सीखता बल्कि दूसरों से सुने उदाहरण से भी सीख लेता है. एक बार एक बैंक में क्लर्क की भर्ती हो रही थी तो इंटरव्यू अधिकारी थक गए तो उन्होंने एक... Continue Reading →
लिखाड़ी की उड़ान और पुस्तक प्रकाशन में शोषण
आप तो अच्छा लिखते हैं और आज आपका लेख अख़बार में छपा है और बड़ा ही उत्तम है! एक पड़ोसी ने अपनी लेखक पड़ोसी से यह बात कही. लेखक पड़ोसी ने आभार व्यक्त किया तो पाठक पड़ोसी ने कह दिया कि आप अपनी आलेखों कविता और कहानी का संग्रह क्यों नहीं छपवाते हैं तो लिखाड़ी... Continue Reading →
छोटी सी असफलता – ना कर आत्महत्या
संवेदनशील होना अच्छा हैसंवेदनशील व्यक्ति भावुक होता हैसंवेदनशील होना सामाजिक न्याय हैसंवेदनशील, समाज में प्रेम की धरोहर हैसंवेदनशील, एकरसता का प्रतीक हैसंवेदनशील, एकता की धुरी हैसंवेदनशील, भावना का धनी हैपरंतुसंवेदनशील का ह्रदय कमजोर हैसंवेदनशील भावनाओं में बह जाते हैंसंवेदनशील बहुत अधिक भयभीत हो जाते हैंऔरसंवेदनशील आत्मघात तक कर लेते हैंअतःसंवेदनशील बस, अंतर्मुखी न होने पाए,... Continue Reading →
स्वयं प्रेम में ही मुग्ध!
Narcissistic जब वो पैदा हुआ वह स्वयं में एक बड़े घर में धनवान व्यक्ति के रूप में था और सामान्य शिक्षा के बावजूद व्यवसाय में बहुत तेज गति से सफल हुआ और शहर में राज्य में उसका बड़ा नाम पैदा हुआ परंतु अच्छे बाप की बिगड़ेल औलाद अपने आप से सबसे ज़्यादा प्यार करती है... Continue Reading →
Health & Hygiene- Directly Proportional!
होशियारी सदा सुखारी हिंदी में भी Health is very much proportionate to the hygiene. If a good health has to be enjoyed. A good practice of keeping a clean hygiene is everybody’s need and requirement. Good health is good hygiene and good hygiene leads to good health. Now a good hygiene practice and tops the... Continue Reading →
Organic!?
The word organic is now in fashion, being acceptable, fancy and precious as organic products are much in demand. Be it vegetables , Grains or even dry fruits. What actually organic means? The simple understanding about organic product nowadays is a produce produced in untadulterated soil without any help of chemicals, fertilisers, or insecticides or... Continue Reading →
सभ्यता के पहले!(605)
जब मानव सभ्य नहीं हुआ,उसका जीवन अंदाजिया था,तब वनोपज ही भोजन हुआखेत खेतिहर जैसा कुछ न था. ज्यों समाज जब बने तबजीवन मंथर मन्त्रवत था,त्यों नैतिक विकास का दौर बनापर विवाह जैसा कुछ न था. ज्ञान बहा वेद लिखे जबवह काल भी बुद्धि का था,धीमा युग था शैशवकाल मेंत्वरित आज जैसा न था. समय यूँ... Continue Reading →
माँ की बातें
बचपन में जहाँ तक याद जाती है माँ के द्वारा सिखाई गई शिक्षाएँ और कहावतें-मुहावरे यदा कदा नहीं सदा ही बहुत याद आते है. तब समझ में नहीं आते थे अब आते हैं. कोहनी में लगा गुड,ख़राब समय हो तो खूंटी भी हार निगल जाती है,गूँगे का गुड़,रहिमन चुप हो बैठिए देख दिनन का फेर,समय... Continue Reading →
We The Indians !
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