Movie : The Odyssey

मुझे कभी सुनने में नहीं आया था ग्रीस याने पुराने यूनान में नेत्रहीन लेखक हमर ने आज से ढाई हज़ार वर्ष पूर्व एक कहानी लिखी थी. ओडेशियस नामक राजा के बारे में जो कथानक लिखा था उस कथा पर विज्ञान फैंटेसी के सेल्यूलॉइड निर्माता क्रिस्टोफर नोलान एक चलचित्र बना देंगे और मैं उसे देखने थिएटर में भी चला जाऊँगा. खैर, बच्चों के कहने पर शनिवार इस शुद्ध अंग्रेजी मूवी द ओडिसी का दिव्य दर्शन हुआ.

इतिहास बताता है कि मानव स्वभाव की प्रथम श्रेणी का चरित्र है लड़ना और जम के लड़ना. घर-द्वार, राजसभा तो राजसभा देश छोड़ कर समंदर में कोसों नहीं मीलों-मीलों दूर दूर तक जहाजों की श्रृंखला में सैंकड़ों योद्धाओं को लेकर दूर देश ट्रॉय में हमला करना और सब लूट लेना.

परंतु यह कहानी थोड़ी भिन्न है जो इकैथा के शासक ओडिसियस की घर वापसी यात्रा है जो फ़ैंटासी, चमत्कारों, परिकल्पना, विशालकाय राक्षस की सेनाओं, मृतात्माओं, अकल्पनीय दैत्य के साथ प्रस्तुत होती है जो दर्शक को बांधे रखने में सक्षम सिद्ध होती है.

घर में पत्नी पेनेलोप का हिचकोले खाता शासन, विवाह प्रस्ताव रखते बदमाश जिनका उद्देश्य राज्य प्राप्ति और उनके बेटे पर सदा लटकती प्राणघातक साजिशें मानव के नैसर्गिक लड़ाकू स्वभाव को उजागर करती है. धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाने और निशाना लगाने के घटनाक्रम ने रामायण और महाभारत दोनों की अनायास याद दिलवा दी. ओडेशियस के पालतू कुत्ते का बीस बरसों का अपने मास्टर का इंतज़ार संवेदनशील था. अंतिम दृश्यों में राजसभा का समर रोचक बन पड़ा है.

सिनेमेटोग्राफ़ी, साउंड इफ़ेक्ट, रोमांचक घटनाक्रम की निरंतर प्रस्तुति क्रिस्टोफर नोलन की विशेषता है. बच्चों और परिवार के साथ देखने योग्य है. हिंदी में भी है और इंग्लिश मूवी में भी सबटाइटल से समझ में सुविधा मिलती है.

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