BR : Many Lives, Many Masters

हर जिज्ञासु के मन में कभी न कभी यह प्रश्न अवश्य उत्पन्न होता है मेरे इस जन्म लेने के पूर्व मैं क्या था और मेरी मृत्यु के बाद मेरा क्या होगा !!! हिसाब होगा या पुनर्जन्म?

मेरा ये जीवन किसी अन्य जीवन काल के कर्मों से क्या संबंधित है???

जीवन का अर्थ क्या है और क्या इसी तरह से आत्मा रूपी ऊर्जा को एक मानव शरीर में आना, मृत्यु को प्राप्त करना और वापस पृथ्वी के किसी अनजान आवृत्ति के किसी भिन्न काल में भिन्न विश्व में भिन्न समय पर जीवन हेतु चले जाना!!!

पुरातन सनातन (हिन्दू) विचारधारा के अनुसार 84 लाख योनियों में जन्म लेकर आत्मा को परिष्कृत किए जाने की उल्लेख मिलता है जो कोरी कल्पना जैसा ही प्रतीत होता है जब तक कि कोई वैज्ञानिक स्तर पर इसे सिद्ध करने के प्रयास न करे. हालांकि मेरी आध्यात्मिक रुचि के विषय में तथा जन्म के पूर्व तथा मृत्यु के बाद के जीवन की उत्सुकता ने मुझे भारतीय संत श्री एम के द्वारा रचित पुस्तक Apprenticed to Himalayan Masters में निरंतर होने वाली पुनर्जन्म की एक भिन्न विचार धारा का वाचन से एक भिन्न साक्षात्कार कर सका.

परंतु अगली सीढ़ी पर एक मशहूर वैज्ञानिक और मनोचिकित्सक Dr Brian Weiss द्वारा एक युवा महिला मानसिक रोगी कैथरिन के मानसिक रोगों को ठीक करने के प्रयास पढ़ना रोमांचक था. पूर्व जन्म के ऐतिहासिक संदर्भों की चिकित्सा की वैज्ञानिक रूप से कहानी का पाठन एक अद्भुत यथा नवीन परिभाषा को पाठक के अंतर्मन में स्थापित करने में सफल होता है.

जहाँ इस जन्म में उपस्थित व्यक्ति के गुण-दोष, सज्जनता, वैमनस्यता इत्यादि की उपस्थिति पूर्व जन्म के कर्मों, सत्कर्मों – दुष्कर्मों तथा सब से बड़े बिंदु ऋणों की पूर्ति को जो दृश्य उपस्थित होता है वह केवल अविश्वसनीय है अकल्पनीय है बल्कि आश्चर्य चकित करने योग्य भी है

पुस्तक के चिकित्सक डा ब्रायन वाइस द्वार उनके उनके रोगी कैथरीन को गहन समाधि अवस्था में ले जा कर उसके पूर्व जन्मो के दृष्टांतों एवं अनुभवों को रिकॉर्ड कर निष्कर्ष निकालने की यह अद्भुत अनुपम प्रयोग की प्रस्तुति इस पुस्तक के पाठक को दांतों तले उंगली दबाने के लिए मजबूर कर देती है.

यह एक परिष्कृत और उच्च स्तरीय पारिकल्पना से लिखा हुआ परिलोक की कहानी जैसा प्रतीत होता है
परंतु सनातन संस्कृति के वाहक को यह पुनर्जन्म तथा इस जन्म में पूर्व जन्मो के कष्टों, ऋणों इत्यादि से होने वाले साक्षात्कार के अद्भुत दृश्य प्रदर्शित करने में स्वीकार्यता के स्तर पर लाने में सफल होता है.

सम्मोहन की अवस्था में समाधिस्थ कैथरीन के स्वयं के द्वारा किए गए औपचारिक संवाद के साथ साथ उस जन्म के दौर के देवात्मा के संदेशों को प्रस्तुति के कारण भी इस पुस्तक के पाठक को आश्चर्य चकित करने में सक्षम होता है. एक इसी प्रकार के प्रसंग में आत्मा द्वार जीवन के आने जाने के सात तल में अवस्थित होने तथा चक्र के घूमने रखने की प्रसंग भी रोंगटे खड़े कर देने योग्य है.

व्यक्तिगत रूप से मेरा मानना है कि आत्मा रूप, शरीर के ढलने का विज्ञान और समग्र जीवन को समझने के विज्ञान की अपनी सीमा हैं. परा-विज्ञान को विज्ञान के मध्यम से समझाया नहीं जा सकता है जिनका कोई वैज्ञानिक स्पष्टीकरण हो.

ऑकल्ट साइंस याने गुप्त विज्ञान की मात्र कल्पना करके ही चिकित्सा शास्त्र, मनुष्य चिकित्सा, ब्रह्मविद्या, दर्शन शास्त्र के माध्यम से अल्प मानव बुद्धि से प्रयास किया जा सकता है.

जीवन का तात्पर्य, विज्ञान और आस्था तीनों जटिल है. दूसरों के अनुभव से पढ़ने समझने के प्रयास किया जा सकता है परंतु यह लीला समझ आ जाए यह कदाचित असंभव ही है

प्रकृति से संतुलन किसी के लिए भी अनिवार्य है

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