Pritam & Pedro : MR

ओ टी टी प्लेटफार्म का सब से बड़ा लाभ यह हुआ है कि ढूँढते ढूंढेते कभी कभी बहुत अच्छी सारगर्भित रोमांचक और चमत्कृत कर देनेवाली सेल्यूलॉइड प्रस्तुति से अद्भुत साक्षात्कार हो जाता है. हालांकि यह समुंदर में मोती ढूँड़ने जैस अनुभव होता है जो आपके व्यक्तिगत रुचि से निर्धारित होकर पसंदीदा कहानी के प्लॉट तक पहुँचता है या किसी मैच से आनंदित करने में सहायक होता है

सीरीज प्रीतम और पेड्रो, 6 अंकों में समय के दो दौर के बीच कार्य करने के अंतर की प्रस्तुति है जहाँ पुरानी सोच के तीन दौर एक साथ प्रस्तुत होते हैं. जब दादा जी अपनी दिवंगत पत्नी के गाये गीत से अपनी पुराने दिनों को याद कर रहे हैं वहीं मध्य दौर के एक इंस्पेक्टर अपनी पुरानी शैली से क्राइम ब्रांच में अपने अनुभव से आपराधिक क्षेत्र में अपना लोहा मनवा रहे हैं तो आधुनिक युवा साइबर सुरक्षा और साइबर अपराध में संलिप्त हैं तो छोटा बच्चा मोबाइल और लैपटॉप के गेम्स में अपनी भविष्य को एक नई चुनौती के लिए प्रस्तुत कर रहे हैं.

कथानक रुचि कर है और दर्शक को बाँधे रखने में न केवल सक्षम है बल्कि प्रशंसा करने के लिए दर्शक मजबूर होता है
कथानक के घटनाक्रम से भारतीय परिवेश की दो शिक्षाएँ खूब उबर के ऊपर आई हैं जिनमें इंजीनियरिंग कॉलेज के एक छात्र को अपनी गलती का एहसास होता है और वह स्वीकार करने में पीछे नहीं होता है तो वही संस्कारित साइबर जीनियस व्यक्ति अपनी गलती को आगे न बढ़ाते हुए अपने दुश्मन को भी क्षमा कर पहचानने से इनकार कर देता है. एक स्थापित तथ्य है कि अपराध सजा से कम नहीं होते हैं बल्कि क्षमा से कम होते हैं. सज्जनता के प्रभाव से अपराधी के हृदय को विचलित करते हुए उसमें सज्जनता के भाव को न केवल जागृत कर दिया जाए बल्कि ग़लत को ग़लत समझने की स्थिति भी उत्पन्न कर दी जाए.

मनोरंजक है और मुस्कराने को मजबूर करता चलता है
देखने योग्य है

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