माँ की बातें

बचपन में जहाँ तक याद जाती है माँ के द्वारा सिखाई गई शिक्षाएँ और कहावतें-मुहावरे यदा कदा नहीं सदा ही बहुत याद आते है. तब समझ में नहीं आते थे अब आते हैं.

कोहनी में लगा गुड,
ख़राब समय हो तो खूंटी भी हार निगल जाती है,
गूँगे का गुड़,
रहिमन चुप हो बैठिए देख दिनन का फेर,
समय कभी एक सा नहीं रहता,

माँ मुख से ये सुनते बड़े हुए और जब माँ प्रथ्वी छोड़ परलोक सिधार गईं तो उनके दिए गए पाठ और संस्कार न केवल जीवन जीने में सहायक हैं बल्कि अपने बच्चों को भी वही संस्कार के लिए प्रेरणा भी देते हैं.
कहने को तो साधारण कहावत है परंतु इसका गूढ़ अर्थ है कि हाथ की पहुँच में सफलता है पर प्राप्त न हो पायी जैसे क्रिकेट के मैच में अंतिम गेंद पर एक रन बनाना हो और अंतिम खिलाड़ी बोल्ड हो जाये. कोहनी का गुड़ अर्थात् कड़ी मेहनत करने के बाद भी कई बार सफलता दूर बनी रहती है दूर खड़ी मुस्कराते रहती है और प्राप्त नहीं होती है.

गूँगे का गुड अर्थात् जो व्यक्ति व्याख्या करने में असमर्थ हो वह अपनी सर्वश्रेष्ठ स्थिति में भी अपनी प्रसन्नता की अभिव्यक्ति नहीं कर पाता है

रहिमन चुप ह्वै बैठिए, देखि दिनन को फेर।
जब नीके दिन आइहैं, बनत न लगिहैं देर॥
दोहा सारगर्भित है. तात्पर्य साधारण है कि जीवन के रंग अजीबोगरीब है कभी सुंदर रंग प्रतीत होते हैं तो कभी धूसर. कभी अच्छा समय चलता है तो कभी ख़राब तो ऐसी स्थिति में ख़राब समय की अनुभूति हो जाए तो उस समय चुपचाप होकर बैठ जाना चाहिए और समय के निकल जाने के प्रयास करना चाहिए.

चोरी करने की कहानी सुनाया करती थी कि एक बच्चा स्कूल से पेंसिल चुरा कर ले आया तो उसकी माँ ने बड़ी प्रशंसा की. तो उसे शिक्षा मिली कि चोरी भी बुरी बात नहीं है फिर वो रबड़ बस्ते और स्कूल की घंटी लोगों के पास से सब चुराने लगा और जब एक दिन जवानी में पकड़ा गया तब उसका जज साहब के सामने कबूला कि मेरी चोरी की आदत डालने में मेरी माँ ही बड़ा हाथ है. इस साधारण कहानी से शिक्षा को पाठ अनमोल है जो किसी भी बालक या के लिए चोरी करने के पाठ से प्रेरित करता है. हालांकि ऐसी शिक्षा भारत में तो कोई माँ नहीं देती.

माँ हमेशा कहा करती थी कि दिन भर अच्छी बात बोलना चाहिए ताकि दिन भर में कभी किसी एक समय जब शिक्षा और ज्ञान की देवी सरस्वती जी मानव की जिह्वा पर विद्यमान हो और नाक के दोनों सुर एक सुर साथ चलते हों तब कही गई भली या बुरी बात फलीभूत हो जाती है अतः हमेशा अच्छी बात करना चाहिए

बुरी बात यदि आपके चेतन, अवचेतन या अचेतन मन में रहे और वो बार बार घूम घूम कर हो गुजरती है जिसे आज के दौर के बच्चे मेनिफ़ेस्टेशन कहते हैं.
अतः मन के सभी तीनों स्तरों पर अच्छी बात घुमड़ती रहे.

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4 thoughts on “माँ की बातें

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  1. माँ को शत शत नमन जिनका आशीर्वाद हर पल साथ नजर आ रहा है 🙏आपकी लिखावट में तो माँ ही है 🙏

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  2. Truly inspiring and really emotionally far beyond than just words and their permutative combination nana ji charansparsh🙏🏻

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  3. माँ (आई )तो माँ होती है ,माँ के बारे में लिखना बहोत सारी यादों को दावत दे देता है ,

    सही कहा है पहली शिक्षक माँ होती हैं

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