स्वयं प्रेम में ही मुग्ध!

Narcissistic

जब वो पैदा हुआ वह स्वयं में एक बड़े घर में धनवान व्यक्ति के रूप में था और सामान्य शिक्षा के बावजूद व्यवसाय में बहुत तेज गति से सफल हुआ और शहर में राज्य में उसका बड़ा नाम पैदा हुआ परंतु अच्छे बाप की बिगड़ेल औलाद अपने आप से सबसे ज़्यादा प्यार करती है क्योंकि वह हर चीज़ के लिए अपने आपको जन्मजात अधिकारी या हक़दार समझता है. Entitlement!

मानव सबसे पहले स्वयं से प्रेम करता है, आत्ममुग्ध रहता है . उसके बाद माँ पिता परिवार समाज देश प्रकृति पर्यावरण जैसी संस्थाओं से 1 लगाव उत्पन्न होता है. लगाव एक ऐसी आरामदायक स्थिति है जिसमें आपके मन में उत्पादन प्रेमभाव हो आप

आत्मकामी”/अहंकारी (self-obsessed)-

यह वह व्यक्ति है जो खुद से अत्यधिक प्यार करता है जो बुरी बात नहीं है कतई नहीं है. परंतु अपने सिवाय किसी से प्रेम न रखना या सुविधाजनक प्रेम रखना इस आत्मकामी स्वयंकेंद्रित व्यक्ति को विशिष्ट बनाता है. ऐसे व्यक्ति स्वयं से और दूसरों से एकमात्र उम्मीद यह रखते हैं कि आप उनका प्रशंसा को पोषण कर रहे हैं. जिस दिन आपने यह व्यवहार बंद किया उस दिन आप बुरे व्यक्ति बन जाते हैं. उनका प्रशंसा स्वीकार करने की मापदंड अतुलनीय है जैसे आप कह दें कि आज सूरज आपके कहने से उगा है तो वे मना नहीं करेंगे बल्कि मुस्करा कर रह जाएँगे.
आत्मतुष्ट! आत्मकेंद्रित! आत्ममुग्ध!

ऐसे आत्म केंद्रित अतिमानव खुद को बहुत महत्वपूर्ण और कुलीन मानता है, वह भी बुराई नहीं है परंतु अपने सिवाय दूसरों को मलिन और निम्न दर्जे का मानना, दूसरों की भावनाओं की परवाह नहीं करना इन आत्ममुग्ध अतिमानव को विशिष्ट श्रेणी का वाहक बनाता है.

अंग्रेजी अलंकार नार्सिसिस्ट नाम के धनी व्यक्ति के पीड़ित होने के मुख्य लक्षण, सदैव अत्यधिक अहंकार, सदैव खुद को दूसरों से बेहतर मानना- समझना और जतलाना और समझदार मानना है. माँ कहती थीं कि सोना जाने कसे, मनवा जाने बसे अर्थात् जैसे सोने की पहचान कसौटी पर घिस कर होती है वैसे ही मानव की पहचान उसकी संगत में रहने से ही समझ आती है.

प्रशंसा की चाहत भले आप उनसे झूठ ही में प्रशंसा करें.
हमेशा प्रशंसा और ध्यान (attention) पाने की उम्मीद रखना।
सहानुभूति की कमी (Lack of Empathy):
दूसरों की भावनाओं या जरूरतों को न समझना।
स्वार्थ (Selfishness): सिर्फ अपनी खुशी और फायदों के बारे में सोचना।
आलोचना न सहना (Inability to handle criticism):
अपनी गलती न मानना और आलोचना मिलने पर गुस्सा होना या दुश्मन समझ लेना।

स्वयं में आत्ममुग्ध ये रोगी अपने से धनी व्यक्ति के चाटुकार बने दिखाई पढ़ते हैं वह धनलोलुपता से पीड़ित होते हैं. इस के साथ अपनी व्यक्तिगत स्पोर्ट सिस्टम के बारे में भी बड़े संवेदनशील होते हैं क्योंकि वे भी इस चाटुकारिता को बड़ा पसंद करता हैं.

निगाह कीजिएगा, आपके परिवार, पड़ोस, मित्र-मंडली, कार्यालय में मिल जाएँगे!

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