Organ Mania
इंसान के शरीर में सबसे भरोसेमंद सोशल – ऑर्गन कोई और नहीं बल्कि आपका कंधा है।
यह सुनने में अजीब लग सकता है। इंसान के शरीर के एलीट और प्रीमियम ऑर्गन्स के साथ, यह असल में नामंज़ूर करने योग्य वाक्य लगता है। सबसे ऊपर तो वह अंग प्रतीत होता है जिसमें ‘ऑल ऑर नन’ का नियम पालन करने वाला ह्रदय है या सबसे मुश्किल हमारा मस्तिष्क जो अपनी फिजिकल और इलेक्ट्रिकल वायरिंग की संरचना के साथ हमें हैरान नहीं करता बल्कि मंत्रमुग्ध भी करता है।नेत्र, त्वचा, हाथ, पैर जैसे बाह्य अंग और एनी भीतरी अंगों का महत्व कम नहीं है परंतु सामाजिक व्यवस्था में कंधे का कोई जोड़ नहीं है.
कोई भी आश्चर्य चकित हो पूछ सकता है कि कंधा ही क्यों!!
ज़िंदगी अपने आप में, टाइम मशीन से गुज़रने वाली, एक ऊहापोह और उतार-चढ़ाव से भरी घटना है।
और आप इस बात से सहमत होंगे कि सबसे झगड़ालू ऑर्गन हमारी अपनी जीभ है, अपनी स्वाद ग्रंथियों से और बात कहने के तरीके से.
है ना?
आपको हैरानी हो सकती है क्योंकि जीभ अपने टेस्ट बड्स किसी को भी मोटापे की ओर ले जाती है, जबकि वही काम करने वाली जीभ यह तय करती है कि कोई इंसान खुशमिजाज और हमेशा प्यार करने वाला है या एक घिनौना व्यक्तित्व है.
परंतु आपका कंधा ही किसी भी सुखी या दुखी आत्मा को क्षणिक विश्राम करने का, सांत्वना देने का, सहारा देने का, आश्वस्त करने का प्लेटफार्म उपलब्ध कराता है जो सांत्वना एक भाव है और मानव का मानव के जीवन के प्रति सम्मान जनक टेका है.
है ना!!
कंधा भरोसेमंद है, कंधा मजबूत है, कंधा बुरे समय का साथी है, कंधा प्रिय को दिया जाने वाला संतोष है, कंधा जीवित का साथी है तो कंधा मरे की अंतिम यात्रा का भी वाहक है. कंधा मात्र भौतिक उपस्थिति नहीं है बल्कि कंधा सदाशयता, सहायता, निर्भीकता और प्रेम जनित सामाजिक सरोकार का प्रतीक है.

Organ Mania
The most dependable social organ in human body is none other than your Shoulder.
It may sound absurd. In company of elite & premium organs of human body, this actually looks unacceptable. Top organ with All or None law followed by Heart or most complicated neuronal Brain with its physical and electrical wiring entities ntot surprise us but mesmerise as well.
One May ask why Shoulder. !!
Life in itself, is a phasic entity passing through the Time Machine.
And you will agree to the fact that the most quarrelsome ORGAN is our own TONGUE, both by its taste buds and with delivery of Sentences!
ISN’T IT?
You May feel amazed as tongue leads anyone to obesity with its taste buds while the very same functional tongue decides a person to be pleasing and ever loving or be an heinous entity.
wow great 👍
LikeLike