बीत गई बहुत
बातें अभी बाक़ी है
देखे दुनिया का रंग
नशा अभी बाक़ी है
आपा धापी का मेला
भीड़ में भी अकेला
कोई इधर तो उधर
रेलम पेलम ढेला
जन्मा ही था महान
रचने को उच्च विधान
अपने स्वार्थ की दौड़ में
कहीं न छूटा निशान
अतिशेष का विशेष
उत्साह नहीं तो निस्तेज
हर दिन होवे सवेरा
जीव ऊर्जावान थोड़ा शेष
उगता सूरज दमके
साँझा होते यूँ ढले
पाठ सीखो तो आसान
न्याय से हो बढ़े पले

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