इंदौर नगरिया!

इंदौर – मराठा राजा होलकर का राज्य क्षेत्र

भारत की हृदय में स्थित देश के दूसरे सबसे बड़े राज्य, मध्य-प्रदेश की काली मिट्टी से आलोकित मालवा क्षेत्र का जीवंत शहर हैं इंदौर. वर्ष 1732 में इंद्रपुर नाम से मराठा राज्य में स्थापित इंदौर होल्कर राजवंश का मुख्य व्यावसायिक बाजार रहा जिसे आम नागरिक, मुंबई का बच्चा कहते थे जो मुंबई की ऊर्जा, व्यवसाय, संस्कृति के छोटे स्वरूप को प्रस्तुत करता है. स्वतंत्रता प्राप्ति के पूर्व यह होल्कर मराठा राज्य की राजधानी था और मराठा होल्कर राजवंश के अंतर्गत इंदौर नगरी का विकास हुआ. 1767 में पुत्रवधू रानी अहिल्याबाई होल्कर ने राज्य की राजधानी बदलकर महेश्वर में स्थापित की. यशवंत राव होल्कर प्रथम के काल में अंग्रेजों से लोहा ले कर इंदौर को आगे बढ़ाने में अपनी ऊर्जा और दृष्टि के माध्यम से कार्य किया. तृतीय एंग्लो-मराठा युद्ध में प्राप्त पराजय उपरांत 1818 में होलकर राज्य की राजधानी पुनः इंदौर बना. महाराजा यशवंतराव होलकर द्वितीय (19 26-1948) मराठा राज्य के अन्तिम राजा थे परंतु इंदौर ने 1818 से 20 वीं सदी आते तक अपनी व्यापारिक साख स्थापित कर ली थी जो आज भी कायम है. महात्मा गाँधी भी 1919 में इंदौर में आयोजित हिंदी साहित्य सभा की बैठक में सम्मिलित होने को इंदौर आए थे जबकि भारतीय संविधान के मुख्य रचनाकार डॉक्टर भीमराव अंबेडकर का जन्म महू इंदौर में हुआ था. स्वर साम्राज्ञी भारतरत्न लता मंगेशकर का जन्म भी इंदौर में हुआ था.

व्यापारिक केंद्र –

35 लाख से अधिक की घनी आबादी का इंदौर शहर किसी भी नदी के किनारे बसा ना होने के कारण एशिया का सबसे महंगा पानी प्राप्त करता है जो 70 किलोमीटर दूर स्थापित नर्मदा नदी के जलूद से प्रतिदिन इंदौर लाया जाता है. 1875 से रेलमार्ग और 1948 से वायुमार्ग से जुड़ा होने के कारण इंदौर व्यवसायिक गतिविधियों का केंद्र बिंदु बन पाया. आजादी प्राप्ति के पहले 1907-08 के दौर में नगर सेठों की दूरदृष्टि से कई कपड़ा मिलें स्थापित हो चुकी थी. इंग्लैंड सहित समस्त भारत में यहाँ से कपड़ा भेजा जाता था. आज भी इंदौर में 1000 से अधिक तैयार-पोशाक निर्माता है जबकि टेक्सटाइल क्षेत्र में कॉटन, सिल्क, पारंपरिक हैंडलूम के लघु एवं बड़े उद्योग स्थापित हैं. हैंड-ब्लाक, बाटिक और बांधणी शैली का कपड़ा प्रिंटिंग का कार्य भी औद्योगिक स्तर पर इंदौर की धरोहर बना हुआ है.

मीटर गेज की रेल गाडी का नेटवर्क लगभग 100 वर्षों तक इंदौर को काचीगुड़ा – हैदराबाद तथा अजमेर से जोड़े रखा जबकि कालांतर में ब्रॉडगेज से देश की चारों दिशाओं में रेल यात्रा सुगमता से उपलब्ध हुई.

मध्य प्रदेश का प्रथम प्रशिक्षु-पायलट फ्लाइंग क्लब 1955 से कार्यरत है. आज भी उड़ान के प्रशिक्षण के लिए इंदौर उच्च मापदंड और किफायती मानको पर प्रथम विकल्प होता है. स्वतंत्रता उपरांत इंदौर के वणिक मानस ने सीमित संसाधनों की उपलब्धता के बाद भी कपड़ा मिलों के अतिरिक्त चमड़ा, वाहन निर्माण, खाद्य तेल, फार्मा उद्योग स्थापित करने में सहयोग दिया जो इंदौर के समीप स्थित जिलों जैसे पीथमपुर धार देवास रतलाम में हैं. कम से कम दो स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन भी इंदौर के आसपास स्थापना की राह है. इंदौर की पहचान बन चुका नमकीन उद्योग लगभग 26,000 करोड़ रुपये का प्रतिवर्ष टर्नओवर मात्र इंदौर से प्रस्तुत करता है जो देश के समस्त हिस्सों सहित विदेशों तक में अति लोकप्रिय है. इंदौर को भारत की नमकीन उद्योग का केंद्र बिंदु कहा जाता है.

मालवा क्षेत्र में आदिकाल में फटे ज्वालामुखी के लावा की काली मिट्टी से इंदौर तथा आसपास के क्षेत्र में सोयाबीन की उत्पादकता अत्यधिक है. इस पूरे इंदौर क्षेत्र में खरीफ की फसल में सोयाबीन की बुवाई किसानों की मुख्य रुचि का अनाज है और इसी सोयाबीन की पैदावार से इस क्षेत्र के किसान आर्थिक रूप से समृद्ध हुए हैं. सोयाबीन के प्रोटीन प्रचुर भोजन से खाने का तेल, सोया मिल्क, सोया-पनीर, पशुचारा, सोयाबड़ी आदि का निर्यात दुनिया के विभिन्न देशों में होता है जिसके कारण इंदौर को सोयाबीन के कटोरा के रूप में प्रसिद्धि प्राप्त भी है.

स्वच्छता का सिरमौर –

राज़हित में कोई भी मुहिम नागरिको के सक्रिय सहयोग के बिना सफल नहीं हो सकती है और इंदौर के सुधि नागरिको ने वर्ष 2016 से इंदौर को देश का स्वच्छतम नगर बनाए रखा है जो 2025 तक लगातार 8 बार यह देश के सबसे स्वच्छतम शहर का पुरस्कार जीत चुका है. नागरिको के सक्रिय सहयोग तथा प्रशासनिक रूप से चुस्त तंत्र के चलते इंदौर को ओपन डेफिकेशन फ्री बनाने में लोक-प्रसाधन की स्थापना का बड़ा स्थान है. शहर के हर हिस्से में आधुनिक वॉशरूम का बड़ी संख्या में निर्माण किया गया है जिसमें स्नान तक की समुचित व्यवस्था नाममात्र के शुल्क पर उपलब्ध है.

एशिया का सबसे बड़ा स्ट्रीट फूड केंद्र –

इंदौर को एशिया का सबसे बड़ा स्ट्रीट फूड झोन कहा जाता है जहाँ के नागरिको ने अपने चटोरे स्वाद से अल-सुबह, दोपहर से लेकर देर रात्रि तक उदरस्थ किये जाने वाले नाश्ते या उप-आहार की एक नई परिभाषा गढ़ दी है. भारतीय फास्ट फूड जैसे पोहा, कचोरी, समोसा, पेटिस, जलेबी और साबूदाने की खिचड़ी की प्रतिदिन खपत सैकड़ों टन में होती है. अति प्राचीन सर्राफा बाजार की तंग गलियां रात्रि 9:00 बजे से इस प्रकार के फास्ट फूड व्यंजनों से सज जाती है जो स्थानीय नागरिको के साथ साथ इंदौर पधारे मेहमानों का भी आकर्षण का केंद्र है. स्ट्रीट फूड का एक अन्य प्रसिद्ध स्थान है 56 दुकान जहाँ के खुले बाजार में भारत द्वारा वर्ष 2023 में आयोजित श्रम मंत्रियों के जी-20 ग्लोबल समिट का एक रात्रिभोज का आयोजन किया गया था. 32 देशों से आए प्रतिनिधियों को भारतीय प्रकार के व्यंजन परोसे गए थे.

स्वास्थ्य और शिक्षा का पसंदीदा स्थान –

किंग एडवर्ड मेडिकल स्कूल की स्थापना इंदौर में 1878 में ही हो गई थी जो अब एम.जी.एम. मेडिकल कॉलेज के नाम से स्थापित है. 1870 से स्कूली शिक्षा के लिये डेली कॉलेज स्थापित है जो भारत के धनाढ्य वर्ग का प्रिय रहवासी विद्यालय है. मुंबई के बाद इंदौर दूसरा ऐसा शहर हुआ जहाँ आइआइटी के साथ साथ आइआइएम की स्थापना हुई है. मेडिकल टुरिज़म में भी इंदौर अपनी साख स्थापित कर रहा है और मोटापे ओर मधुमेह से जड़ से मुक्ति पाने हेतु बेरियाट्रिक तथा रोबोटिक सर्जरी के लाभ लेने के लिए पूरी दुनिया से रोगी अब इंदौर का रुख करते हैं.

इंदौर तेजी से टियर-2 स्तर से आगे बढ़ रहा है जहाँ औद्योगिक संस्थान, बहुराष्ट्रीय कंपनियों के कार्यालय, चिकित्सा-पर्यटन और शिक्षा के कई अभिकरण स्थापित हुए हैं. नार्सी-मुंजी, इन्फोसिस, टी.सी.एस. जैसे संस्थान भी कार्यशील है तो बॉम्बे हॉस्पिटल के साथ साथ मेदंता, कोकिलाबेन, जुपीटर, केयर और अपोलो के साथ औरोबिन्दो मेडिकल कॉलेज जैसे अत्याधुनिक रुग्णालय भी स्थापित है. शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से दो ज्योतिर्लिङ्ग मध्य प्रदेश में स्थित है जो इंदौर के उत्तर में उज्जैन तथा दक्षिण में ओंकारेश्वर है. इंदौर, व्यावसायिक राजधानी के होने कैसे साथ साथ आध्यात्मिक, धार्मिक तथा शिक्षा एवं मेडिकल टुरिज़म की ओर भी तेजी से बढ़ता शहर है.

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  1. सारगर्भित , शोधपरक आलेख। अभ्यासका रोचक निरुपण।

    ज्ञान वर्धक, सन्दर्भ हेतु उपयोगी

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