कभी आपने सोचा के मूर्खों की श्रेणियाँ क्या संभव है. तो अल्प बुद्धि या मूर्खता की –
प्रथम श्रेणी है मूर्खश्री
द्वितीय महामूर्ख
तृतीय महामूर्खश्री
चतुर्थ महामूर्खाधिराज और
पंचम महामूर्ख़ाशिरोमणि
यह कहना कठिन है कि मूर्ख की 1-5 की श्रेणी के मध्य कौन उपस्थित है और कौन अनुपस्थित. थोड़ी मूर्खता तो वो हर व्यक्ति में होती ही है मानो या ना मानो परंतु मूर्खता के संबंध में जितने भी श्रेणीकरण किया गया है वह बुद्धिमानों के द्वारा किया गया है क्योंकि मूर्ख मैं तो इतनी समझ होने का प्रश्न ही नहीं होता है. और थोड़ी थोड़ी मूर्खता तो सभी में है मानो न मानो.
परंतु कभी आपने सोचा है कि ज्ञानियों और बुद्धिमानों की श्रेणी है जैसे
ज्ञानी, बुद्धिमान, मेधावी और मूर्धन्य. अति ज्ञानी या अति मेधावी जैसे हिंदी और जीनियस जैसे अंग्रेज़ी के शब्दों का श्रेणीकरण लगभग जटिल होता है. मूर्ख को परिभाषित करना आसान है परंतु ज्ञानी या बुद्धिमान को परिभाषित करना आसमान से तारे तोड़ लाने जैसा है कठिन है जटिल है क्योंकि बुद्धिमानों के मध्य एक मत होने जैसी बात है कभी होती नहीं. वे हमेशा विवाद की स्थिति उत्पन्न करते हैं कि गणित उत्तम है या भौतिक विज्ञान, अंडा पहले हुआ या मुर्गी, पृथ्वी के पहले क्या था और पृथ्वी के बाद क्या होगा
तो मूर्खता और बुद्धिमत्ता के मापदंड उत्तर ध्रुव और दक्षिण ध्रुव की भाँति भिन्न है जहाँ मूर्ख अपनी ज़ुबान, कथन और कृत्य से अपनी मूर्खता का प्रदर्शन कर सकता है वही बुद्धिमान चुप रहकर भी अपनी बुद्धिमत्ता का अंदाज़ लगाने के लिए सबको छोड़ सकता है
इसमें कोई 2 मत नहीं कि मूर्ख और बुद्धिमान दोनों को ही अपने कृत्यों से अपनी इस प्रतिभा के प्रदर्शन करना होता है
बुद्धिमान
ज्ञानी
अतिज्ञानी
मेधावी
मूर्धन्य
पाँच श्रेणियों में मस्तिष्क के धनी स्त्री पुरुषों को संभावित रूप से विभाजित जा सकता है जिसमें
स्मृति,
विवेचना,
शोध,
दूरदृष्टि के विभिन्न आयाम के प्रति नए प्रयोग करने तथा सामाजिक प्रगति के नए सोपान उपलब्ध करने में मस्तिष्क के सही उपयोग प्रदर्शित होता है.
आश्चर्य जनक संगम तो तब उत्पन्न होता है जब कोई मूर्ख किसी भी व्यक्ति को आलादर्जे (उच्च श्रेणी) का मूर्ख बोलकर घोषित कर देता है. वहीं बुद्धिमान व्यक्ति किसी स्थापित मूर्ख को भी मूर्ख कहना से बचता है. सही है ना?

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