ठहरो जरा !

कहने को तो यह बात क्षणिक और छोटी प्रतीत होती है परंतु “ठहराव”, जीवन में सीखने की बात है. एक बार कान्हा-किसली राष्ट्रीय पशु उद्यान जाने का अवसर हुआ. वहाँ पर खुली जीप में जंगल में उपस्थित जीव-जन्तु, पक्षियों के मनोरम दर्शन होते हैं. तो एक सुबह 1 बड़े हरे भरे मैदान से गुज़रते हुए पक्षियों सियार लोमड़ी चीतल हिरण जैसे जंतुओं को देखते हुए बाघ दर्शन की खोज में हम निकल गए. उसी समय इस खुले मैदान के कोने पर पेड़ की छाँव में एक जीप खड़ी देखी जिसमें छह अमेरिकन नागरिक बैठे हुए थे.

ठहरे हुए, यह कहना उचित होगा, या
ठहरे हुए थे! ये कहना उचित होगा.

अब होता ही है कि आम नागरिक की रुचि बाघ देख लेने में होती है इसलिये नब्बे वर्ग मील में एक छोटे चिन्हित क्षेत्र के भोजन प्रचुर होने से सभी जानवर की उपस्थिति मैदान के आस पास होने से सभी वाहनों के घूम घूमकर उस खुले हरे भरे मैदान पर आना होता था

क़रीब 5 घंटे की इस जंगल दौड़ में तीन बार इस क्षेत्र में आना हुआ. तीनों बार ही वह जीप छह नागरिकों के साथ उसी एक स्थान पर खड़ी दिखी. मन में विचार कौंधा कि इन्हें क्या कोई जल्दी नहीं है या यह किसी राह से पीड़ित ठहरा है.

उस ठहराव के प्रश्न का उत्तर भी तुरंत ही उत्पन्न हुआ कि जीवन में ठहराव एक ना एक दिन सुनिश्चित करना ही होता है

हम माया और वासना में बिंधे लोग, धन, स्वास्थ्य और यश के पीछे उम्र के हर दौर में दौड़ते ही है. दौड़ मानसिक तनाव उत्पन्न करती है. मानसिक तनाव लगभग शून्य स्तर पर आ जाता है, यदि ठहराव आ जाये भले यह ठहराव मानसिक, शारीरिक, सामाजिक और आर्थिक स्तर पर ही क्यों न हो.

ठहराव को परिभाषित करना जटिल हो कदाचित क्योंकि हर व्यक्ति के जीवन के लक्ष्य या उद्देश्य भिन्न होते हैं और ठहराव की स्थिति को मन से निर्धारित करना एक जटिल मानसिक स्थिति हो सकती है. परंतु यह तो तय है कि ठहराव के अनिवार्य तथ्य में
आत्म-संतोष,
बुद्धिमत्तापूर्ण निर्णयों पर अमल,
सफलता एवं असफलता के प्रति समभाव और
स्वयं की प्रतिभाओं एवं क्षमता के प्रति जागृति भी एक दृष्टिकोण हो सकता है

ठहराव जीवन के अनमोल पल उपलब्ध कराता है कि जब आप विश्राम को प्राप्त होते हैं और स्वयं से भी चर्चा करते हैं.

विचार कीजिएगा

Take A Pause!

One thought on “ठहरो जरा !

Add yours

  1. रण थम्बोर….बिलकुल ऐसा ही अनुभव था बार बार हमारी जीप उसी एक ही स्थान पर घूम फिरकर आ जाती वहाँ कुछ foreigners ठहरे हुए मिले हाँ बिलकुल ऐसा ही विचार मन में आया था क्या इन्हें कोई जल्दी नहीं है उनके पास था बड़ा सा कैमरा मोमेंट्स क़ैद करने के लिए ——————- हाँ …ठहराव जीवन में होना ही चाहिए बस भागते रहो कभी लगता है क्या हासिल किया थोड़ा ठहरेंगे तो जीवन का सही आनंद ले पाएंगे अपने आपसे बात करने के लिए समय नहीं बस इसके बाद ये करना …इसके बाद ये पहले समय जब गांवों में ओटला हुआ करता था सिर्फ़ बुजुर्ग ही नहीं बड़े छोटे सभी लोग शाम के समय ओटले पर आकर बैठते बतियाते और *थोड़ा ठहर जाते* अपने आप से मुलाक़ात करने के लिए

    Liked by 1 person

Leave a comment

Blog at WordPress.com.

Up ↑