मरते समय !

ओशो कहते हैं मरते समय यह आनंद रहे कि अपनी मर्ज़ी से जिया, अपनी शर्तों पर मजा लिया, ख़ूब आनंद से जिया और अब अशरीरी यात्रा को आनंद से चल पड़ा पड़ा

क्या अद्भुत कथन है ! जीवन लीला का द्योतक है और निरापद जीवन कठिनाई से संभव है . वहीं सहज जीवन की आस में परिग्रह का लोभ चिंता में बनाए रखता है और ध्यान मौन और विचार शून्यता से परे बनाए रखता है

विचार छोटा है परंतु भाव बड़ा है कि मरते समय भी आनंद रहे, छूटा तो छूट गया इससे बढ़िया क्या हो सकता है!
मिला तो वो भी छूट जाएगा इससे बढ़िया क्या हो सकता है. दर्द है तो वो छूट जाएगा
शोक है तो छूट जाएगा
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मैं जैसा हूँ मस्त हूँ मैं जहाँ हूँ मस्त हूँ

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मन सदा बच्चा रहे !

3 thoughts on “मरते समय !

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