हालांकि तंबाकू के सेवन करने वाले यह कहते पाए जाते हैं कि अब उन्हें इसकी आदत लग चुकी है और यह छूटती नहीं है. जब कि मेरा अनुभव ये रहा है कि यदि दृढ़ इच्छा शक्ति से प्रण कर लिया जाए कि
“आने वाले दस दिन में कुछ भी हो जाए मैं आज से तंबाकू का सेवन नहीं करूँगा”
तो स्थितियां बदल जाती हैं और यह कहना कि तंबाकू खाने से पेट साफ़ नहीं होता है, दम भूलने लगता है, ऊर्जा महसूस नहीं होती है, भूख नहीं लगती है, चक्कर आने लगते हैं…इत्यादि इन सभी स्थितियों से आगे जाया जा सकता है. शुरू के 10 से 15 दिनों में चीज़ें कठिन अवश्य हों परंतु तंबाकू के धौंकने या चबाने की लत से सदैव के लिए त्याग संभव है.
आज 31 मई है और प्रति वर्ष यह दिन विश्व स्तर पर नो-टोबेको डे यानी तंबाकू निषेध दिवस के रूप में मनाया जाता है. इस दिन आम तौर पर चिकित्सकों की संस्थाओं के साथ साथ सामाजिक सरकारों से संबंध रखने वाली अशासकीय संस्थाओं द्वारा भी जन-जागृति अभियान चलाए जाते हैं और बड़े स्तर पर यह संदेश प्रसारित करने के प्रयास किया जाता है कि प्रकृति के इस फ़सल, तंबाकू के पत्तों से निर्मित उत्पाद के सेवन से किसी का भला नहीं हुआ सिवाय उसके जो इस तंबाकू के व्यवसाय में संलग्न है.
तंबाकू के दुष्प्रभाव से जन-जाग्रति अभियानों से आम जनता भली- भाँति परिचित है परंतु आश्चर्य विशाल यह है कि सब जानते हुए भी फूंकने वाले चबाने वाले जातकों में प्रतिवर्ष बढ़त ही होती है. तंबाकू के विभिन्न उत्पाद जैसे छोटी-बड़ी सिगरेट,मेंथोल और फ़िल्टर वाली सिगरेट, ई-सिगरेट, हुक्का, खुली तंबाकू का सेवन के अतिरिक्त विज्ञापन ब्रांड वाले गुटके के मध्यम से मस्तिष्क को प्राप्त होने वाली एक क्षणिक उत्तेजना के साथ साथ कैंसर की संभावना को भी प्रस्तुत किया जाता है.
कई बार तो यह स्थिति मात्र इसलिए उत्पन्न हो जाति है कि नए जवान होते बच्चे सिर्फ़ इसलिए तंबाकू सेवन आरम्भ कर देते हैं कि इससे उनके पुरुष तत्व को बल मिलता है और वे मर्द दिखते हैं. हाल ही में मेरी ओ पी डी में मात्र सोलह साल के बच्चे ने रिपोर्ट किया कि उसका मुँह नहीं खुल रहा है और वाक़ई में कैंसर की आरंभिक अवस्था उस युवक के मुँह में उपस्थित थी जिसे Sub Mucous Fibrosis भी कहा जाता है. यह केवल आश्चर्यजनक है बल्कि हृदयविदारक भी है कि युवा होते बच्चे भी इस तरह के सेवन में इतनी किशोर अवस्था में सम्मिलित हो जाते हैं
आश्चर्य तो तब भी होता है जब इस तरह के 11 मार्च को नो स्मोकिंग दिवस या 31 मई के नो टोबैको दिवस डे के अभियान से शिक्षा उन्ही को मिलती है जो पहले से तंबाकू से अनिवार्य दूरी बनाए हुए हैं और इस तरह के अभियान से उन्ही लोगों में भय पुख्ता होता है जो पूर्व से सुधिमन है.


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