जनरल प्रैक्टिस भी तरह तरह के रोगियों से साक्षात्कार कराती है और क्लिनिक में अर्जित किए गए अनुभव एक नए आयाम के दर्शन भी प्रदर्शित करती है. आज ओ. पी. डी. में एक षोडशी सी कन्या के शरीर में कमज़ोरी होने, चक्कर आने की परेशानियों के संबंध में अपनी समस्या बताई. इतिहास कुरेदने पर पता पड़ा कि यह कन्या शिक्षित है और हाल ही में उसने नौकरी से इस्तीफ़ा दिया है. परीक्षण किया तो सब कुछ सामान्य था.
यह पूछ जाने पर कि मोबाइल स्मार्ट फ़ोन पर कितना समय बिताती हो तो उसका आश्चर्यजनक उत्तर आया कि मैं मोबाइल बिल्कुल नहीं देखती. तो मेरे मन में उपस्थित जासूस उठ खड़ा हुआ और पूछ लिया रिलेशनशिप की समस्या है क्या?
तो उसे आँखें डबडबा आयीं और मेरे सांत्वना देने और समझाने पर उसके आँसू टपटप कर गिरने लगे. उसके चेहरे पर मुस्कुराहट लाने में मुझे पंद्रह मिनट लगे.
हर चिकित्सक अपने रोगी के लिए एक जासूस की भाँति ऐतिहासिक पृष्ठभूमि में जाने के प्रयास करता है और कभी कभी सही जानकारी लेने मात्र से उचित डायग्नोस्सिस बनाने में समस्याएं उत्पन्न होती है. आज की इस कठिन दौर में जब उस दौर के माता – पिता ने अपनी बच्चों को शिक्षा के उच्चतम शिक्षा उपलब्ध करने के साथ साथ स्वयं निर्णय लेने और पंख लगाकर सामाजिक उड़ान भरने के मौके उपलब्ध कराए हैं जहाँ बाक़ी बचा कुछ इंटरनेट की सुलभ उपलब्धता ने पूर्ण कर दिया है. बच्चों के मन में विपरीत लिंग के प्रति आकर्षण और संबंधों की एक नई परिभाषा भाषा गठित होती है जिसमें सिचुएशनशिप, नैनोशिप, ब्रेकअप इत्यादि जैसी स्थितियों से पीड़ित होना भी स्वाभाविक ही है.
और यदि जब ब्रेकअप हो जाए तो स्थितियां और विकट हो जाति है. माता पिता को सलाह दी जाती है कि वे अपने युवा और युवा होते बच्चों से प्रतिदिन विस्तार से चर्चा करे ताकि उनके बच्चों पर उनका पकड़ बनी रहे, आपसी संवाद बना रहे और बच्चे अपने स्वयं के द्वारा लिए गए निर्णय से डर कर अपनी माता पिता से बातें साझा ना करें या बंद ही न कर दे.
विचार कीजिए

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