मज़ा और सजा लगभग एक ही शब्द अभिज्ञापक हैं और तुकांत भी प्रस्तुत करते हैं परंतु अर्थ में दोनों विपरीत अर्थी है आपको जानकर आश्चर्य होगा कि मज़ा और सज़ा दोनो एक दूसरे के पूरक प्रतीत होते हैं. प्रश्न उठ सकता है कि ऐसा कैसे है तो कहा जाता है जहाँ मज़ा है वहाँ सजा... Continue Reading →
Life Doesn’t Go Smooth Always!
Somewhat, What! You go up and certainly down,Success comes & just vanishes,Still we sail together or aloneLife doesn’t go smooth always We worship or just ignoreGod remains there or not.God doesn’t mind for whatLife doesn’t go smooth always. Tired or retired or be energeticTime passes you by believe meBurping, sedated or alcoholicLife doesn’t go smooth... Continue Reading →
नशेमन: एक अनुभव
चिकित्साशास्त्र की प्रैक्टिस में हर रोगी एक अद्वितीय चित्र की प्रस्तुति करता है जिससे प्रैक्टिसरत चिकित्सक के अनुभवों की एक ऐसी बैटरी तैयार हो जाती है जो आश्चर्य की बुनियाद पर 1 नई बुलंद इमारत खड़ी करती है. किसी भी जीवन की अनमोल थाती है “अनुभव” और वह अनुभव ही क्या जो आपको आश्चर्य में... Continue Reading →
Maturity
Maturity is a difficult word as well as A situation. Maturity is more or less insane as it has multiple multidirectional and multifaceted State of mind combined with actions. Maturity is so rare commodity that one has to incalculate variety of factors and aspects of life to generate it at level 1 and continue to... Continue Reading →
फाँस (blog 555)
नगर के नए विकसित होते क्षेत्र में बनता है एक नया अस्पताल.चारों ओर हरियाली.खुला मैदान.ठंडी हवा की खनक.चारों ओर मिट्टी की खुशबु क्योंकि शहर से दूर भी और गाँव से जुड़ा इलाक़ा जहाँ तेज़ी से आधुनिक सभ्यता अपने पैर पसार रही है बारिश थोड़ी सी हुई है, मिट्टी में महक है,अस्पताल का उद्घाटन समारोह.चिकित्सा व्यवसाय... Continue Reading →
26/11
छब्बीस ग्यारह को विवाह नहीं करूँगा!क्या मतलब?जी पिताजी वही जो मैंने कहा! पिता पुत्र का मुखर और मौन संवाद जारी था. पिता हतप्रभ थे कि विवाह के सबसे शुभ मुहूर्त 26 नवंबर पर बेटे को अपने विवाह में सात फेरे लेने पर आपत्ति है. पिता भी चुप्पी साध गये कि बेटे की बात का मान... Continue Reading →
आदर्श-वाद से सज्जित या पीड़ित.
आज एक अद्भुत कथानक पढ़ने का संयोग हुआ जिसमें एक व्यापारी ने अपना ऊँट अच्छे मोल बेच दिया और खरीददार को घर जाकर ऊँट की काठी के नीचे ज़ेवर की पोटली मिली और उसने ख़रीददार ने बेचवाल व्यापारी को वह जेवर पोटली ले जाकर वापस कर दी. जब उन्होंने इस धन वापसी के कृतज्ञता के... Continue Reading →
देश सेवा का प्रश्न(552)
देशसेवा का प्रश्न- सामयिक प्रश्न है मैं भी देश की सेवा कैसे करूँ? मैं कैसे सैनिक बन दुश्मनों का संघार करूँ और मैं भी देश की उत्तरोत्तर उन्नति में सक्रिय सहभागिता अंकित करूं. मैं भी देश की सेवा कैसे करूँ??? प्रश्न जटिल हो सकता है? परंतु उत्तर कठिन नहीं है देश का हर नागरिक देश... Continue Reading →
दु:साहसी ड्राइवर और मैं तो उत्तरदायी नहीं का दंभ…(551)
दु:साहसी ड्राइवर और मैं तो उत्तरदायी नहीं का दंभ… सड़क पर चलित वाहनों की आजकल की उपलब्ध शक्तिशाली श्रंखला, उच्च कोटि की सड़कों का निर्माण, युवा उत्साह, दुःसाहस और हिम्मत से भरा हुआ वाहन चालक एक खतरनाक संयोग है. बिना बात की शीघ्रता से तीव्रता के साथ सड़क नापने को आतुर सड़क पर अवतरित इन... Continue Reading →
अन्तरात्मा
बचपन से ही एक कथा सुनते आते हैं कि हर मानव के अंतर्मन में दो भेड़िये रहते हैं.एक अच्छा और एक बुरा.और दोनों आपस में लड़ते रहते हैं!यह पूछे जाने पर कि आख़िर इन भेड़ियों की लड़ाई में जीतता क़ौन है ? तो उत्तर मिलता था जिस भेड़िए को तुम भोजन कराते हैं वह भेड़िया... Continue Reading →
That’s none of my business.
Sun is rising, winds are flowing,Seas have high tide or low tide,Whatever is being happened,That’s none of my business. You are being analysed,good or bad, dumb or wise.Whatever is being thought,That’s none of my business. Get abused or be disliked,You will be cursed or blessed,Whatever is abysmally coming,That’s none of my business. Possess money or... Continue Reading →
सही होना तेरा, तय है(548)
जो आप रीढ़ की सीधी हड्डी लिए हैंतो आप पर आरोप लगना तय है जो आप सज्जन और सत्यवादी हैंतो आपका सजा भुगतना तय है. जो घर में या परदेश में ख़ुश हैंतो आपका साधु सम भाव तय है जो अकेले के संगति में तुष्ट हैंतो आध्यात्मिक होना तय है जो मांगते वक़्त लजा जाते... Continue Reading →
थमो कभी
थमो कभी किसी पेड़ के नीचेसुनो पत्तियों की सरसराहटबहती हवा हौले से कहती कुछसुनो हृदय से सन्नाटे में हर आहट थमो कभी किसी बहती नदी किनारेतको नदी को जैसे बहता समय हौले हौलेलहरें उठती गिरती नाचती नृत्य करतीसुन सको तो सुनो क्या कहती हौले हौले थमो कभी यूँ ही किसी पहाड़ के नीचेकरो वार्ता कि... Continue Reading →
60 बरस कम नहीं होते
60 बरस कम नहीं होते जब आए थे गर्भ मेंसोचा सदा रहेंगे छोटेरोटी पानी छत की दौड़ मेंबने रहे हैं भागते इकलौते कहने को समय सदा शाश्वत हैबीतते समय के कभी पाँव न होतेदेख देख काल को अपना समझतेसमय बीतता ख़र्चा हम होते उम्र यूं ही दराज़ होती हैज्ञानी होते हैं कभी खोतेबरसों की बाजीगरी... Continue Reading →
बदला
जीव मात्र का स्वभाव बदला लेने का है और जो क्षमा कर बदले का भाव छोड़ दिया दिया तो प्रकृति की लीला के सद्भाव के दौर की और एक क़दम बढ़ा दिया है यहाँ मज़बूत से मज़बूत लोहा टूट जाता हैकुछ झूठ इकट्ठे हो तो बेशक़ सच्चा टूट जाता है आप सबको ख़ुश नहीं कर... Continue Reading →
Black Sheep
Title, Black Sheep is a physical entity at a first go, but in the scale of virtues & vices, the White sheep is on one hand while the Black sheep is on the other. Greed to amass Millions with all injustice has been characteristic vice, which everybody possess in quantity variable to everybody’s maturity, psych,... Continue Reading →
पुस्तक: संभोग से समाधि की ओर
1970 के दशक के अंतिम दौर में मानव जीवन के विभिन्न आयामों और आध्यात्मिकता के अनमोल और अद्वितीय व्याख्या के तर्कशास्त्री आचार्य रजनीश (कालांतर में ओशो) के द्वारा रचित “संभोग से समाधि की ओर” पढ़ने का अनुपम अनुभव हुआ. जितना उत्तेजक पुस्तक का शीर्षक है 464 पृष्ठों में उतने ही तीव्र और चुभने वाले विचार... Continue Reading →
मेरा पुनर्जन्म कैसा हो?
अगले जनम में क्या बनना चाहोगे?? इस अजूबे प्रश्न को सुनकर मुझ पर तो जैसे वज्रपात हुआ और एक क्षण को मेरे प्रिय मित्र के प्रश्न का उत्तर आने से पहले यह भाव जनित हुआ कि बेटा अनिल यह प्रश्न अब किसी भी दिन सर्वशक्तिमान परम पिता के द्वारा भी पूछा जा सकता है जिसके... Continue Reading →
दो भाई(541)
दो भाईसुलझे हुएउच्च स्तरीय किसानअपने काम से काम रखने वालेराजनीति से दूरसधा अपने में मस्तमाता पिता ने जीते जी अपनी विशाल खेती आधी आधी बाँट दी, यह सोच कि कोई झगड़ा न हो, असंतोष न हो भाइयों में और यदि हो तो तो मेरे सामने हो, मेरे बाद नहीं. नवाचार सोच भाई भी ऐसे दोनों... Continue Reading →
बीज में वृक्ष, वृक्ष में बीज
इस गर्मियाँ आरंभ हो रही हैं और पतझड़ का मौसम प्रभावी है. पेड़ों से उनके आभूषण रूपी पत्तों के साथ साथ उनके बीज भी अपनी पौध रूपी संतति को आगे बढ़ाने के लिए यात्रा तत्व सर्वथा बिखरे पड़े दिखाई देते हैं जो 1 नई परिकल्पना को जन्म देते हैं एक बीज विशेष गुणसूत्रों से निर्मित... Continue Reading →
मित्र संग, यात्रा रंगारंग
चार हैं अभिन्न मित्रबचपन के पुराने मित्र52 साल पुराने मित्रफिर मिले जहरीले मित्र जंगल में मिले मित्रमंगल करने मिले मित्रऔर कुछ ऐसे मिले मित्रजो धींगामस्ती के मित्र . आज वो ग़ज़ब गपशप हुई जिसकी कल्पना भी नहीं की गई थी कुछ ऐसा हुआ है इस बार कि मैंने अपनी स्कूल की क्लास २ की मित्र... Continue Reading →