आज एक अद्भुत कथानक पढ़ने का संयोग हुआ जिसमें एक व्यापारी ने अपना ऊँट अच्छे मोल बेच दिया और खरीददार को घर जाकर ऊँट की काठी के नीचे ज़ेवर की पोटली मिली और उसने ख़रीददार ने बेचवाल व्यापारी को वह जेवर पोटली ले जाकर वापस कर दी. जब उन्होंने इस धन वापसी के कृतज्ञता के प्रतिउत्तर में कुछ गहने देने का निरंतर प्रयास किया तो ख़रीददार व्यापारी कहा कि मैंने 2 अनमोल रत्न आपकी पोटली से पहले ही निकाल लिए हैं.
यह सुनकर विक्रेता व्यापारी आग बबूला हो उठा और उसने अपनी गहनों की पोटली उड़ेल कर जाँच की तो उसने पाया कि उसके सारे गहने सुरक्षित है. व्यापारी ने आँखे उठाकर आश्चर्य और कौतुक से खरीददार व्यापारी को देखा तो उस सज्जन मानव ने कहा कि मेरा आत्म सम्मान और स्वाभिमान के दो अनमोल गहनो की आज परीक्षा थी. आप मुझे ढूँढ भी न पाते यदि ये पोटली मैंने रख ली होती. परंतु मैंने मेरे संस्कार, विवेक और नैतिकता से आत्मसम्मान और स्वाभिमान का रक्षण कर लिया है.
कथानक पुराना है,
आदर्शवाद से पीड़ित है,
अद्भुत है,
उत्तेजित करने योग्य है.
एक और कथानक में टाटा समूह के पुरोधा जमशेदजी टाटा का एक पसंदीदा और क़ीमती पेन खो गया और उनके मातहत ने वही नया पेन लंदन से ख़रीद कर पुनः भेंट करने का प्रयास किया. मूर्धन्य टाटा ने उसे देखा सराहा परन्तु अस्वीकार कर दिया कि यह कंपनी की पालिसी के विरुद्ध है.
आज के आधुनिक परिवेश में ऐसी नैतिक कथाओं से शिक्षा लेने और इनका स्थापित मूल्यों के जीवन में पालन के उदाहरण और संभावनाएं दुर्लभ ही प्रतीत होती है.
इन नैतिक कथानकों की आश्चर्यजनक विशेषता यह होती है कि रोचकता के साथ पढ़े जाने पर भी वे आपके हृदय की धड़कन जैसी मन- भावनाओं को स्पर्श कर जाते हैं और कहीं अवचेतन मन में दबे पड़े कुचले नैतिक सद्भाव प्रस्फुटित होकर कुलबुलाकर ऊपर निकलाने को बाध्य हो जाते हैं.
भारतीय मानस में भागवत कथाओं का बड़ा ज़ोर है और उत्तर भारत में कथाएँ दक्षिण भारत में स्वयंभू गुरुओं के समागमों में ऐसी नैतिक कथाओं के माध्यम से आम और ख़ास नागरिक को साथ सामाजिक व्यवस्थाओं में शुचिता का पालन करने के लिए स:शुल्क स्वाध्याय किए जाते हैं और आश्चर्य की बात तो यह होती है कि सामाजिक व्यवस्था में इनका कोई प्रभाव नहीं पड़ता है और मानस और मानव दोनों सुधारने को क़तई तैयार नहीं है. झूठ बोलना नहीं है, चोरी करना नहीं है, का तोता रटंत व्यर्थ साबित हो जाता है. भ्रष्ट आचरण जारी है. निरंतर. अविरत. अविकल. बृहत स्तर पर. फलता हुआ फूलता हुआ
परंतु सदाचरण भी जारी है. निरंतर, अविरत, अविकल, भले न्यून स्तर पर.
कथानक मेरे बालसखा डा सलिल साकल्ले के सौजन्य से
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