चार हैं अभिन्न मित्र
बचपन के पुराने मित्र
52 साल पुराने मित्र
फिर मिले जहरीले मित्र
जंगल में मिले मित्र
मंगल करने मिले मित्र
और कुछ ऐसे मिले मित्र
जो धींगामस्ती के मित्र .
आज वो ग़ज़ब गपशप हुई जिसकी कल्पना भी नहीं की गई थी
कुछ ऐसा हुआ है इस बार कि मैंने अपनी स्कूल की क्लास २ की मित्र को फ़ोन लगाया और कहा
चल कहीं जंगल में चलते हैं
और जैसे ही प्लान बना हम वंदेभारत ट्रेन पर सवार हो गए और सीधे जा पहुँचे सतना. वहाँ से कार से मैहर पहुँचे और देवी माँ के वीवीआईपी दर्शन किए
फिर चल पड़े, मध्य प्रदेश के पूर्वी भाग में बाघों से भरे जंगल राष्ट्रीय पार्क बांधवगढ़ की ओर.
एक मित्र ने रहने की व्यवस्था जंगल के बीच स्थित जंगल हट में की. जंगल हट के प्रबंधक ने जब सीसीटीवी फुटेज में दो घंटे पहले ही बाघ के निकलने के दृश्य दिखाए तो हम सब रोमांचित हो उठे. पीली और काली पट्टी की खाल से सजे बाघ के दर्शन हों ये सोचते सोचते हम गप्पे मारते हुए सुबह की सफारी के लिए जल्दी सो गए
कहने को तो घर परिवार की सामाजिक व्यवस्था में जीवन पूरा गुज़र जाता है परंतु उत्साह से जीवन यापन हो जाएं इसलिए कुछ नयापन जीवन में जोड़ते चलना चाहिए, पुराने लोगों के साथ. ऐसे पुराने लोग जो आपके बचपन के मित्र. हाँ जिन्हें आप कुछ भी कह सकते हो जो आपको खोना नहीं सहन कर पाए ना आप उन्हें खोना सहन कर पाओ और वे आपकी रग रग से वाक़िफ़ हो.
इसी धुरंधर मित्रता को जीने हम जहाँ पहुँचे बांधवगढ़ जो देश के टॉप फाइव नेशनल पार्क में से एक है जहाँ लगभग 125 बाघ हैं उनके बच्चे हैं. यह एक घना जंगल है जहाँ खुली जीप के माध्यम से प्रकृति रूप में वृक्ष दर्शन तो नित प्रति होता है परन्तु आँखें तो ज़हरीले परंतु आकर्षक रूप से सुंदर बाघ के प्रति एक भिन्न क़िस्म का प्रेम भाव लिए ढूंढती रहती है. बन्दर, हिरण, सांभर,बारहसिंगा के दर्शन आसानी से हो जाते हैं और एक क्षण को हमें बाघ के भी दर्शन हो गए जब वो झाड़ी में ओझल हो रहा था.
जब तक हम कैमरा उठाते तब तब तो यह दर्शनीय जीव बाघ नैनो के पार जा चुका था. एक पुरानी जंगल कहावत है कि जंगल में बाघ को यदि आप देखने चलो तो बाघ 3 सौ बार आपको जब देख लेता है तब अपने आपको आपके सामने लाता है.
कई बार पहले हल्ले में ही दर्शन हो जाते हैं और कई बार 2 दो बार , तीन तीन बार जाने पर भी सिंह देवता के दर्शन नहीं होते है. जंगल सफारी करने के बाद कमरे में आकर चाय पानी किया और कराओके पर गीत गाए, नृत्य किया, धींगा मस्ती की, गॉसिप की और इतनी गॉसिप की कि थक गए.
अगले दिन गाड़ी उठाकर ट्रेन पकड़कर अपने अपने घर को पहुँचे ये कैसी यात्रा जिसने 52 वर्ष पुरानी मित्रता को एक नए अंदाज़ से ना केवल मज़बूत किया बल्कि आगे की यात्रा के लिए भी प्रतिज्ञाबद्ध किया. मैं अर्चना, अनामिका , वंदना का हृदय से आभार व्यक्त करती हूँ जिनके चलते इस जीवन यात्रा के चार दिन बहुत अच्छे और आनंदित रहे. मैं अपने आपको नई ऊर्जा से भरा हुआ पाती हूँ.
आनंदम मित्रों…
Jyoti
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