नशेमन: एक अनुभव

चिकित्साशास्त्र की प्रैक्टिस में हर रोगी एक अद्वितीय चित्र की प्रस्तुति करता है जिससे प्रैक्टिसरत चिकित्सक के अनुभवों की एक ऐसी बैटरी तैयार हो जाती है जो आश्चर्य की बुनियाद पर 1 नई बुलंद इमारत खड़ी करती है. किसी भी जीवन की अनमोल थाती है “अनुभव” और वह अनुभव ही क्या जो आपको आश्चर्य में न डाल दे

आज जैसा ही एक अनुभव साझा करने का प्रयास करता हूँ. चिकित्सक होने के साथ साथ मैं एक मित्र भी हूँ और कई बाल सखा छोटी मोटी बीमारियों के लिए मेरी सलाह भी लेते हैं. ठीक भी होते हैं परंतु एक बाल सखा ने जब दो दिन तक लगातार पेट दर्द की बात कही तो मैंने कहा भाई सोनोग्राफी करा.

और यही हुआ कि समस्या बड़ी आई और वे तुरंत भर्ती हुए और तीसरे दिन तो ऑपरेशन हो के कमरे में पहुँच गया परंतु मुसीबत यहाँ से शुरू हुई.
पेट फूल गया, मलाशय साफ़ होना बंद हो गया, गैस पास होना बंद हो गई और हमारे मित्र परेशान परेशान हो गया.

दर्द के मारे इतने परेशान थी डॉक्टर सुबह दोपहर शाम रात देखें लेकिन दर्द में आराम न आया. जाँचें बढ़ गई सोनोग्राफी फिर हुई सीटी स्कैन फिर हुई . ऐसी कौन सी बात है जिसके कारण गैस पास नहीं हो रही, ना पेट साफ़ हो रहा है. मैं भी देखने गया माथे पर सांत्वना का हाथ रख बोला कि एक दिन में ठीक हो जाएगा भाई चिंता मत करो.

तो मित्र ने कहा तमाखू खाता हूँ ! यह सुनते ही सर्जन ने उनकी पत्नी से कहा तम्बाकू की पुड़िया हो तो ले के आओ. इधर पुड़िया मुँह में मित्र ने दबाई और ये फुस्स से गैस पास हुई. पाखाना खुल गया. भूख लग आयी. सब माहौल खुला खुला हो गया. और अगले दिन मित्र की अस्पताल से छुट्टी हो गई है.

है ना मज़ेदार बात!

नसों की लीला भी किसी नशीले पदार्थों से बिंध जाती है तो वे नसें भी नशेमन हो दास हो जाती हैं. मांसपेशियाँ, तंत्रिका की नसें, रक्त वाहिनियाँ, मस्तिष्क और हृदय जब उस नशीले पदार्थों की वशीभूत होंगी तो ही वे कार्यशील होते हैं.

ऐसे अनुभव किताबों में थोड़ी पढ़े लिखे जाते हैं, बिताए जाते हैं तब समझ आते हैं.

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