26/11

छब्बीस ग्यारह को विवाह नहीं करूँगा!
क्या मतलब?
जी पिताजी वही जो मैंने कहा!

पिता पुत्र का मुखर और मौन संवाद जारी था.

पिता हतप्रभ थे कि विवाह के सबसे शुभ मुहूर्त 26 नवंबर पर बेटे को अपने विवाह में सात फेरे लेने पर आपत्ति है.

पिता भी चुप्पी साध गये कि बेटे की बात का मान मैं नहीं रखूँगा तो कौन रखेगा.

बात आई गई हो गई.
विवाह अन्य दिनांक को संपन्न हुआ.

विवाह के महीने भर बाद एक रविवार परिवार के सभी सदस्य शाम की चाय की चुस्कियाँ ले रहे थे कि पिता ने बेटे से पूछ लिया तुमने २६/११ के विवाह मुहूर्त के लिए मना क्यों किया था.

मैं छब्बीस ग्यारह को अपनी विवाह की वर्षगाँठ उस दिन नहीं मना पाता जब मुंबई में २६/११ का हमला हुआ था. वह शोक का दिन है और किसी भी देशभक्त भारतीय के लिए जो दिन हमारे शोक का दिन हो वह दिन मेरे लिए उल्लास का नहीं हो पाएगा. बेटे ने उत्तर दिया.

स्तब्ध
मौन पसर गया
एक सद्भाव की भावना पसार गई.

इतिहास उसी भाव से उसी धुन में याद रखा जाना जरूरी है

Leave a comment

Blog at WordPress.com.

Up ↑