नगर के नए विकसित होते क्षेत्र में बनता है एक नया अस्पताल.
चारों ओर हरियाली.
खुला मैदान.
ठंडी हवा की खनक.
चारों ओर मिट्टी की खुशबु क्योंकि शहर से दूर भी और गाँव से जुड़ा इलाक़ा जहाँ तेज़ी से आधुनिक सभ्यता अपने पैर पसार की जा रही है
बारिश थोड़ी सी हुई है, मिट्टी में महक है,
अस्पताल का उद्घाटन समारोह.
चिकित्सा व्यवसाय से जुड़े सभी नामचीन बड़े -छोटे चिकित्सा और सहयोगी स्टाफ को आमंत्रित किया गया है.
प्रतिष्ठित चिकित्सक दंपति के स्पेशियलिटी केंद्र का शुभारंभ जो है…
मेहमानों का आना आरंभ हुआ,
और कच्ची पक्की सड़क पर धूल का उफ़ान उठता और शांत होता रहा.
मेहमानों की लगातार झड़ी लगने लगी
गले मिल मित्रवत बधाई का धन्यवाद ज्ञापित करने का एक सिलसिला आरम्भ हुआ
मित्रों का नेह मिलन और उपहारों को आदान प्रदान का क्रम जारी रहा.
आगंतुकों द्वारा अपने सदिच्छा और सद्भावना का प्रकटीकरण करने के लिये छोटे, बड़े, अत्याधिक बड़े पुष्प गुच्छों की लंबी श्रृंखला आलोकित होने लगी और होती चली गई.
फूलों की रंग बिरंगी सौगात जैसे जगमगाते पुष्पों से बोलते हुए, दमकते हुए, ताज़े पानी की बूंदों से सजे जिलेटिन के पारदर्शी पर्दे के पीछे झांकते हुए यह पुष्प प्रस्तुति सौ प्रतिशत सौन्दर्य और लावण्य खिलखिलाकर समर्पित करते हुए जैसे इन पुष्पों की ख़ुशी का कोई अनुपम त्योहार हो और ये उसको बच्चों के रूप में उत्सव मना रहे हों.
इस आयोजन में न्यौछावर होते जा रहे हैं इन पुष्पों की खेती में प्रकृति के जेनेटिक कलाकार, कली से पुष्प बनाते हैं फिर किसान के हाथों से टूटकर माली के हाथों में जाकर पर्याप्त रूप से सहेजें जाकर बजार में क्रय विक्रय के सौदे से मिलते हुए पुष्पों का यह ढेर एक सुंदर गुलदस्ता बनने का हिस्सा बनते हुए अब गुलदस्ते के समुचित विन्यास में प्रस्तुत था.
हाथों के मध्य मुद्रा विनिमय होने तक विक्रेता प्रतिष्ठान पर अपनी पूर्ण क्षमता से निरंतर मुस्काते ये गुलाब गुलदाउदी सेवनती, मोगरा, ट्यूलिप, लिली बेला ,गुलमोहर भूल जाते हैं कि यह भुला दिए जाते हैं कि प्रकृति की इस अनुपम अनुकृति की उत्पत्ति का विभिन्न प्रकार का उद्देश्य है जिसमें परागण और संतति निरंतरता की प्राकृतिक अनिवार्यता है.
प्रकृति के अन्य निर्मोही रचना मानव की वासनाओं ने इनकी आपूर्ति और उपयोग को कुछ इस प्रकार परिभाषित कर व्यावसायिक किया है कि पुष्प गुच्छ की सुंदरता मानव मन की भावना प्रदर्शित करते हुए शहीद हो जाती है या बाध्य कर दी जाती है
शाम होते होते ही पुष्पगुच्छ भावना शून्य प्रदर्शित कर दिए जाते हैं और अस्पताल के किसी स्टोर के किसी कोने में एक नितांत एकांत पा जाते हैं. निराश मन से स्टेज पर पुष्प किसी सामान के हाथों भावना के चरित्र पर वीरगति को प्राप्त हुए!
क्या उद्घाटन समारोह, वैवाहिक बधाई या ईश्वर के चरणों में या शीर्ष पर ये फना होते हैं.
पुष्प स्वयं ख़ुशनुमा माहौल करता है परंतु स्वयं मानव ही भूल जाता है कि शुभकामनाओं की प्रस्तुति में सु -मन का धारक मानव सुमन की भावना रूपी शुभकामनाएँ प्रस्तुत कर सकता है.
अगले दिन ये समस्त एकत्रित पुष्प गुच्छ के पुष्प होश खो बैठे, ना जाने कौन सी उद्देश्य पूर्ति के बाद नगर निगम की कचरा गाड़ी में एक अनुचित स्थान को काल कवलित हो जाते हैं.
कहीं अंतर्मन में फाँस चुभ गई


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