दु:साहसी ड्राइवर और मैं तो उत्तरदायी नहीं का दंभ…
सड़क पर चलित वाहनों की आजकल की उपलब्ध शक्तिशाली श्रंखला, उच्च कोटि की सड़कों का निर्माण, युवा उत्साह, दुःसाहस और हिम्मत से भरा हुआ वाहन चालक एक खतरनाक संयोग है. बिना बात की शीघ्रता से तीव्रता के साथ सड़क नापने को आतुर सड़क पर अवतरित इन पायलट की जैसे अपेंडिक्स फट गयी हो और उसका ऑपरेशन कराने में विलंब हो रहा हो. धूम-धूम करते वाहनों की निष्कपट और निर्लज्ज रेस लगाते हैं देश के ऊर्जावान वयस्क गंतव्य तक जल्दी पहुँचने की होड़ ऐसे है जैसे गंतव्य तक पहुंचते ही दो-चार लाख रुपये कमा लेंगे.
भारत की छोटी बड़ी कच्ची पक्की स्टेट हाईवे-नेशनल हाईवे पर सुरक्षित वाहन चलाना दुरूह और दुष्कर कार्य होने के साथ साथ हिम्मत का कार्य है. यहाँ एक वाहन चालक दूसरे वाहन चालक की गरिमा और सम्मान सीमा का ध्यान न रख, अनुशासन नामक अदृश्य चिरैया की अवहेलना करते हुए यत्र तत्र सर्वत्र शैली में लहराते हुए वाहन गमन करते दिखाई पड़ते है.
यह यक्ष प्रश्न हो सकता है कि तमीज़ से सुरक्षित वाहन चलाना कला है अथवा विज्ञान. भारतीय परिवेश में सड़क पर वाहन परिचालन की नियम के सम्भावनाएँ तो असीम है परंतु गंतव्य पर अतिशीघ्र पहुँचने की लालसा के चलते अनुशासन का पालन करने हेतु कोई नागरिक उत्सुक होता प्रतीत होता दिखता नहीं है. नियम पालन न होने पाये भले ही दुर्घटना का विष पीने को भगवान शिव की भाँति हर वाहन चालक समुद्र के इस मंथन में आकंठ डूबा हुआ दिखाई पड़ता है.
सड़क पर अपनी लेन का पालन करते हुए बाईं ओर से निर्धारित धीमी से वाहन चलाना कोई हिम्मत का कार्य नहीं रह गया है. हिम्मत तो तब मानी जाएगी जब रॉन्ग साइड से अथवा नो एंट्री या वन वे के निषिद्ध आवागमन में सामने से आती वाहनों के विरुद्ध जांबाज और प्राणों पर खेलने वाले नौजवान अपने द्रुत अग्निदूत वाहन अपनी हिम्मत दंभ अभिमान और दुःसाहस का परिचय देते हुए ढेल दी जाये. आश्चर्य तो इस बात का होता है कि आप के गृहनगर के अतिरिक्त भारत के किसी भी शहर में आप चले जाए इस प्रकार के दुर्लभ नहीं आसानी से सुलभ होने होते हैं. क्या हम सब १४० करोड़ एक जैसे ही हैं! दुःसाहसी वाहन चालक से दुःसाहसपूर्ण साक्षात्कार होता जाता है और दुर्घटना होती जाती है, अस्पताल मरीजों से और अदालतें विवाद के प्रकरणों से भरते जाते हैं.
दोपहिया वाहनों के अतिरिक्त सड़क गाड़ी चलाने के अभिनव शैली पर हिम्मत की अद्भुत दाद देने के लिए कोई है तो कदाचित आप मेरी बात से सहमत होंगे कि आधुनिक काल के ई – रिक्शा और पूर्वकाल के सी एन जी ऑटो रिक्शा, डीजल चलित लोडिंग रिक्शा आपके सम्मुख हिम्मत की वो बानगी प्रस्तुत करते हैं कि आपको प्रतीत होता है कि सड़क पर मैं निकला ही क्यों ?
पिछले लगभग एक दशक से बैटरी चलित ई-रिक्शा की संरचना है तो मकोड़े जैसी परंतु दुःसाहस किसी चीते जैसा है जिसके चालक वृद्ध हों, जवान हो या महिला ही क्यों न हो अपने स्टीयरिंग हेंडल को लहराते हुए सड़क पर स्थापित वाहन लेन को झुठलाते हुए दो वाहनों के मध्य उपस्थित छोटी से छोटी जगह में कुछ इस प्रकार ठस जाते हैं जिसे देख किसी भी अन्य वाहन चालक को न केवल आश्चर्य होता है क्रोध भी उत्पन्न होता है और नागरिक खीझ भी जाता है.
शहरों में वाहन चलाना आज विज्ञान से परे इसलिए भी हो गया है क्योंकि शासन तंत्रों द्वारा प्रतिस्थापित ट्रैफिक नियमों के पालन के लिए कम से कम मैं तो उत्तरदायी नहीं का दंभ और क्षोभ निरंतर ही प्रस्तुत होता है. और इसलिए अब सड़क पर वाहन चलाना कलात्मक कौशल का प्रतीक है जहाँ न केवल ट्रैफिक जैम में फँसे आप मूकदर्शक की भाँति अनुशासनबद्ध हो तो कार में या बाइक पर हेलमेट लगाए सामने होते अनुशासनहीन आदत के दर्शन लाभ का आनंद उठाते चलते हैं. अपने आप को सुरक्षित गंतव्य तक पहुँचाने हैं इसकी प्रार्थना करते चलते हैं ताकि आज का दिन सड़क पर सुरक्षित बीता और स्वस्थ घर लौटे यह भाव प्राप्त हो.
इससे भी उच्चतर अवस्था तब होती है जब चौराहे प्रकाश मैं ट्रैफिक सिग्नल के पालन करने का विषय उत्पन्न हो कदाचित आपको आशा न हो जब मैं यह कहूं कि सबसे अधिक ख़तरा ट्रैफिक सिग्नल पर लाल बत्ती होने पर नहीं होता है जब आप रुक जाते हैं. सबसे अधिक ख़तरा तब होता है जब आप की सड़क की लेन पर हरी बत्ती हो और आप अपना वाहन आगे बढ़ाते हैं तब सामने की विपरीत दिशा में रुकने का लाल बत्ती निशान होने पर भी अपने वाहन को द्रुत गति से दौड़ाता संभावित नाश को हामी हिम्मतवाला मतवाला अपने वाहन को खेलते हुए चला आता है और ऐसे मैं उस हरी बत्ती में आगे बढ़ते हुए अनुशासित वाहन चालक की स्थिति साँप छछूंदर से बदतर हो जाती है कि आगे जाऊँ या पीछे जायूँ क्योंकि दुर्घटना होने की स्थिति में सदैव बड़े वाहन के चालक का ही माना जाएगा .
साइकिल सवार, स्कूट सवार बाइक सवार प्रीमियम 2 पहिया चालक, तीन पहिया सवारी वाहन चालक या लोडिंग रिक्शा चालक कितने भी त्रुटिपूर्ण वाहन चलाने के हामी हों ज्ञानी है हिम्मती है तो त्रुटि विहीन है और एक अघोषित इम्युनिटी के वाहक है जिसके चलते दुर्घटनाओं में चार पहिया वाहन या छह पहिया वाहन का ही दोष माना जाएगा.

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