द्रष्टा देवांश…. द्रश्य है देवज्ञ, पदार्थदिशा दश ओर.देशांतर में भी दिव्य दिखेद्रश्य सदा दर्शनीय.द्रष्टि, दीप्ति दर्श को,दिगपाल दैदीप्यदीपक द्रष्टि दोष नहीं,द्रष्टि देवता तुल्य.द्रष्टा देवांश है,देखने को दहके.दिशाहीन हो द्रश्य प्रपंच,द्रष्टा दीपो भवः.देवांश के दिग्दर्शन,दुर्धुशु ददाति दर्शनं.दधीची दीन्हे तन,तो दैदीप्य हुए दिव्यं.द्रष्टि दोष का दर्प,दरख़्त सा देहाभिमान.दुनिया दुखियारी देखि,दान भी दंडाभिमान.दुःख दया द्वैत,दंडकारण्य में दर्शन.दण्ड- दान... Continue Reading →
Sun Almighty
आदित्य - आख्यान आदित्य अवलोकनीय,अनिवार्य अर्वाचीन. आसन्न आसंदी पर,अनिल से अवधूत. अरुण से आविर्भाव,अभय अलौकिक. अक्षय आप अविकारी,आभा से आलोकित. आकांक्षा अमृत की,अर्जुन के ओंकार. आलस्य से अछूतेअनथक रहे अपार. आसमान के अखरोट,आलेख अनंता. अधार्मिक और अलंकृतआमरे के आनन्दा. अलख के अद्वैतवादी,अष्टावक्र के अभंग. आत्मा के अनुरागी,आवक्र तुम अरंग अग्नि आसीन,आभा अंतरिक्ष. आसक्ति ही आकर्षण,और... Continue Reading →
BookStone
They are stones,Foundation stone.For one and all,Yet May keep alone. They are full,Just to empty.What all they’veTo offer plenty. Books ain’t just,They’re genius.Letting you learnSo they are pious. Thru the pages, it tests mettle. How you learn, Remain the battle. As you read on Once or another You get meaning One way or other.
Forgotten
हद से बढ़े तोहादसे हुएमौन से भी तोफ़ासले हुए नैनों से निर्मलइशारे हुएबिन बोले भी तोसंवाद हुए शोर चाहे जो होशांत सब हुएमाया मोह मेंग़लत हम हुए प्रकृति प्रभु समानहम भूले हुएख़ुद ही ख़ुदा होन्यायप्रिय कब हुए सुनना यूँ भूलेसदैव बोलते हुएप्रतिक्रिया देते देतेश्रोता कब हुए मायालोक के हामीइस तरह बिंधे हुएबंदी हम सभीमहासुख भूले... Continue Reading →
I go Happy
……यूं खुश हो लेता हूँ मैं. कड़ी दौड़ ज़िन्दगी की है रोज,हारता कभी तो जीतता कभी,बहती हवा को सूंघ दिल से,यूं खुश हो लेता हूँ मैं. १ थकता हूँ ,फिर होता खड़ा,मन को समझा लेता हूँ,.उगते सूरज को देखकर,यूं खुश हो लेता हूँ मैं. २ खाता हूँ धोखा बारंबारविश्वास करना छोड़ता नहीं,बरसती बूंदों का त्याग... Continue Reading →
Salvation
….सद्गति रहना तू तैयार सदा,उस अंतिम यात्रा को.भूल न जाना कभी,परम हो जाने को. एक सार होना है कभी,मिटटी हो जाने दो.सब छूटेगा कभी ये साथ, भवलीन होने को. भले दौड़ो तेज कभी,भूलो नहीं रुकने को. माया अनंत संसार परक,खूब मन लुभाने को. मद मोह लोभ है क्षणिक,तुझे भरमाने को. भोर भई सांझ ढली,कर्म नित्य... Continue Reading →
10 Commandments!
10 Commandments- (A Poem for student.) Ask yourself what you wish in life,Take the first step quite wisely. 1 Relations and near-dear change,True ones are rare, choose wisely. 2 You will taste failure and sorrow,Let that not stop you,Promise wisely. 3 Dream may be far, deal with zeal,Have good friends & March wisely. 4 If... Continue Reading →
Birdie
चिड़ा चिड़ी ————————-सोचा कभी , गाँव की गौरेया, शहर आके धरोहर हो गयी….सोचा क्यों नहीं, गाँव की बहुलता, शहर में नगण्य हो गयी… सोचा मैंने, गाँव गाँव में पलने फलने वाली घरेलु चिरैया….देखते देखते विकास की अद्भुत, सप्रेम शहीदी भेंट हो गयी….कभी थी ये, सर्दी गर्मी में घर दालान की रोचक रौनक…..नैनसुख की हामी, उर्जा... Continue Reading →
Couldn’t Understand
…..कभी मैं समझा नहीं….. खेत खलिहान नयी खाद से रोपे ,भले भूमि बंजर हो हो जायेपशु गौधन कोई और पाले,दूध घी मेरा, कभी मैं समझा नहीं…..१ अच्छी सेहत को खा पी के बिगाड़ लिया,घर का भोजन भाये नहीं,फिर दवाई से करो उपचार,मेहनत होवे नहीं, कभी मैं समझा नहीं….२ सड़क के लाल संकेत पर मैं रुकता... Continue Reading →
Counterfeit Coin
खोटे सिक्के भी चलते…. सूरज उगता, चाँद चमकता है,नियम सदियों से ये पालन करते,कलियुग है भले इतना घना,खोटे सिक्के भी चलते. शुद्धता के हम सब हामी,नैतिकता फिर भी न सहेजते,सच्चा हो भले खरा,खोटे सिक्के भी पुजते. चौकीदार रखते ईमानदार सदा,आदत चोरी की कभी न रोकते.सिद्दांत, निष्ठां की बातें बेमानी,खोटे सिक्के भी चलते. देश घनेरा सोने... Continue Reading →
Story of Doctor
डॉक्टर की व्यथा कथा कर्म हमें सौंपा है, ईश्वर के जैसा है मानव जीवन रहें स्वस्थ रखने का जैसा है. शरीर विज्ञान पढ़े जो, झुक झुक जाते हैं संशय से भरे प्रयोग सदा करते जाते हैं यह मशीन नौ माह में प्रकृति ने बनाई है जटिल रचना इसकी थोड़ी हमने समझ पाई है धमनी शिरा... Continue Reading →
Let’s find sugar in sweet milk
उर्जा का ये जन्मजीवन क्षणभंगुरमरना नहीं चाहतापरंतु मरना तो है लीला बिखरी पड़ीमाया मोह चन्हूओरचाहता नहींपरंतु प्यार तो है मद क्रोध शाश्वतछूटते नहीं कभीशत्रु से प्रेम नहींपरंतु तकरार तो है लोभ से धनभृष्ट्ता यूं उपजेधन बुराई भलेपरंतु कमाना तो है त्याग तुम करोभोगने दो मुझेअहंकार त्याज्य हैपर माया पाना तो है साधुता को आकर्षितभिक्षाम देही... Continue Reading →
Seed, The Computer
सबसे छोटा कंप्यूटर,तुम जानते हो, ना होपास तुम्हारे अनगिनत,भूमि में अकिंचन पड़े हो यह बीज है जीव भी,यहां तहां बिखरे होज्यों ही मिले पानी मृदा,संपर्क में जीवन्त हो. न जाने कैसी रचना,बीज अद्भुत नग्नचोला ओढ़े सगुण भरे, प्रयास में रचाए लगन. थोड़ा जल थोड़ी मृदाऔर अंतस ऊर्जा,पौध बनने को हामीआतुर जैसे घन गर्जा. कहने को... Continue Reading →
Himalaya in Heart
मन में हिमालय… चहकता है मन,माया मोह में.ये पा लूँ और,क्या खो दूँ. संगत चरस जैसी,नशा मन का.भोजन एक पल का,तृष्णा सदा का. पिए प्याला अनंत,तृप्ति आये ना.भोर होते ही,प्यास का आशना. जिए भरपूर,मरने को नहीं राजी.रस – रास को,सदा रहे अभिलाषी. मन सदा गर्दभ,मौका मयूर. पल में तोला,अगले में चूर. तू सुधर जा का... Continue Reading →
Journey unlimited
अ-समान उड़ान, आसमान की… यात्रा में जो आनंद है,मंजिल में नहीं भाई.मंजिल रहे दूर-पास,रास्ता कठिन है भाई. शरीर थके तो भी ,मन कट्ठा रखना भाई.ज्योति जला रखना,चलते रहना भाई. पक्षी करते कलरव यहाँ,मोर यहाँ-यहाँ चिल्लाते.हम अपनी धुन में भूले,सन्नाटा भी न सुन पाते. बगिया महकती फूलों की,मुस्काते फूल बनना तुम.यात्रा जो जारी बाहर,भीतर भी करना... Continue Reading →
Heritage of Earth
धरा के धरोहर सूर्य में अहं नहीं,अनंत और सनातन.प्रकृति का कर्म करते,पुराने नहीं महापुरातन. सूर्य में ताप नहीं,क्रोध में नहीं तपते.संत भाव से सदा,प्रेम का जाप करते. सूर्य में तमस नहीं,ज्योति के पुंज.धरा के धरोहर,निर्मल निकुंज. सूर्य में प्यास नहीं,न जल के अभिलाषी.जो न हों प्रकट,तो जीव हो उदासी. सूर्य में घराना नहीं,लगते नहीं मानव.तुच्छता... Continue Reading →
Leave or Quit
सब छोड़ना पड़ता है…. प्रेम का पाठ पढ़े हो,या घ्रणा में पड़े हो.ब्रह्म सत्य जगत मिथ्या,जान सब छोड़ना पड़ता है. कोई कारज को यदि,भय लज्जा शंका उपजेभले ठान रखी हो करने की,ठिठक, सब छोड़ना पड़ना है. दौड़ ब्रह्मा की, लोक माया का,कोई प्रश्न को तो उत्तर गुरु.अनुभव की शिक्षा अनमोल,प्राण संकट में छोड़ना पड़ता है.... Continue Reading →
Not My Fault
सदा अपनी…. गलती मेरी ?कैसा विज्ञान है !नहीं मानूंगा,ऐसा विधान है. बुद्धि राजी नहीं,गलती मेरी नहीं.भले राज्य जाये,सुधरना मुझे नहीं. अहं है पिता,गलती मानसपुत्र.महाभारत खेली,गवाएं सब सूत्र. गलती और दंडसाथ साथ चलते.गलती होते ही,दंड से सब बचते. धाराएं बनी सैकड़ों,ताकि सत्ता सुहागन रहे.मानस मन मलिन,नियम सदा तोड़ता रहे. गलती सदा विकारी,विवेक फेर देती.होते ही नकारने... Continue Reading →
God of Death who takes us to final destination
यमदूत होना!! मुझे कुछ नहीं,यमदूत होना.आत्मा की परम से,यात्रा होना. यमदूत का कारज,चिंतामणि को हरे.ब्रह्मज्ञानी को भी,परमयोग से भरे. अज्ञानी को भी,कुछ यूं थामे.जैसे वज्र पंडित,चले बैकुंठ धामे. यमदूत करे शुद्ध,क्या मानव क्या बुद्ध.मेरा उद्घोष, मैं मुक्तयम के हत्थे मैं भी बुद्ध. विष अमृत की धरा ये,सत्य अंतिम, यमदूत.माया से प्रथक,कहने को अवधूत. यमदूत हैं... Continue Reading →
Wanna be a River.
नदी होना चाहता हूं गोमुख से छोटा उदगमपवित्र और पावनजीवन नद का निर्मलनदी का उत्तम उदभव कुछ इठलाती नटखटसमेटे सबको जातीबाहों को फैला लेतीसब को नहला जाती है दान पुण्य की हामीप्यासे की अनुपम दासीप्यासे का रंग ना देखतीसदियों से सेवा को प्यासी. समभाव से बहतीनिर्मल यह कामिनीप्राणों की रक्षा मेंप्रेम की यह दामिनी जीव... Continue Reading →
Ain’t you an Evil!
तो कौरव हो तुम… यदि श्रीकृष्ण तुम्हारे पक्ष में नहीं,तो कौरव हो तुम।अपने में संतोषी और भावुक नहीं,तो कौरव हो तुम।करुणा को भूले तुम और दया नहीं,तो कौरव हो तुम।इच्छा मृत्यु के वरदानी पर अन्यायी,तो कौरव हो तुम।खेल के छल में निपुण और पक्षपातीतो कौरव हो तुम।धक्का दे आगे बढ़ने को हर कीमत आतुर,तो कौरव... Continue Reading →