Forgotten

हद से बढ़े तो
हादसे हुए
मौन से भी तो
फ़ासले हुए

नैनों से निर्मल
इशारे हुए
बिन बोले भी तो
संवाद हुए

शोर चाहे जो हो
शांत सब हुए
माया मोह में
ग़लत हम हुए

प्रकृति प्रभु समान
हम भूले हुए
ख़ुद ही ख़ुदा हो
न्यायप्रिय कब हुए

सुनना यूँ भूले
सदैव बोलते हुए
प्रतिक्रिया देते देते
श्रोता कब हुए

मायालोक के हामी
इस तरह बिंधे हुए
बंदी हम सभी
महासुख भूले हुए

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