Himalaya in Heart

मन में हिमालय…

चहकता है मन,
माया मोह में.
ये पा लूँ और,
क्या खो दूँ.

संगत चरस जैसी,
नशा मन का.
भोजन एक पल का,
तृष्णा सदा का.

पिए प्याला अनंत,
तृप्ति आये ना.
भोर होते ही,
प्यास का आशना.

जिए भरपूर,
मरने को नहीं राजी.
रस – रास को,
सदा रहे अभिलाषी.

मन सदा गर्दभ,
मौका मयूर.

पल में तोला,
अगले में चूर.

तू सुधर जा का दंभ,
मन मेरा तो अमृत.
भाव मेरा निर्मल,
तू ही शिव का विष.

यात्रा ये स्व प्रेम की ,
प्रेम में मन नहीं.
यात्रा को हिमालय,
या मन में हिमालय.

काल अनंतर,
प्रयास अंतहीन.
बहे तू सदा नदी जैसा,
सागर में होगा लीन.

जय हो जय हो,
किसकी हो पता नहीं.
भेजा तुझे तेरी जय को,
तूने तुझको भजा नहीं.

खुद की यात्रा,
खुद में प्रलय सामान.
कुंडलिनी का सांप,
जगा ले तो भाव अपान

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