Time Eternal

समय का देवांश…. दिन भर साथ चलूंगासंग रहूंगा सुख दुख मेंपुतला बने या तू मूर्तिसंग तेरी राह बनूँगा हर पल में सांस बनूँगाधमनी में बहता रहूंगारहनुमा बने या तू दोस्तसंग तेरे राह बनूँगा समय का देवांश हूँक्षण क्षण धार धरुंगातू माने या ना मानेंतेरे मन कर्म को तीक्ष्ण करूँगा तुझे विवेक का संग मिलेइतनी बुद्धि... Continue Reading →

Movie Review : Cycle

कहने को तो इस कथा चित्र का नाम साइकिल है और साइकिल की कथा में बहुत से बहुत क्या हो सकता है ऐसा मनोभाव किसी भी मनुष्य में आ सकता है! मराठी भाषा में बनी हिंदी सब टाइटल के साथ उपलब्ध नेटफ्लिक्स पर यह फिल्म एक भिन्न और अद्वितीय चित्र प्रस्तुत करता है जो भारत... Continue Reading →

Awarded

2 असमान स्तर के मित्रों का अद्भूत संवाद- मित्र- मुझे पुरस्कार चाहिए सुधि मित्र - कई संस्थाएं बांट रही है नहीं नही, वैसा नहीं ! याने ? याने पैसे देकर मिलने वाला पुरस्कार नहीं चाहिए! तो कौन सा चाहिए ! मेहनत वाला ? हां वह हो जाए तो वाह! तो मेहनत करो मिट्टी में !... Continue Reading →

Hospital Nuisance

अस्पताल का दृश्य : आपके इस सरकारी अस्पताल में डॉक्टर साहब सुविधा नाम की चीज नहीं है, स्टाफ आपका बदतमीज है, दवाइयां आपके यहां है नहीं…इसको ताला क्यों नहीं लगा देते हैं ! ( एक असंतुष्ट का उच्च स्वर में प्रलाप) सही कहा आपने, हम बहुत कम संसाधनों में काम कर रहे हैं हमारे पास... Continue Reading →

Good Deal

कितने का है यह एग्जॉस्ट फैन1050 कागारंटी वारंटी क्या है1 साल की वारंटी है मैं 1 साल और बढ़कर आपको दे दूंगामैं बोल भाव नहीं करूंगा पूरे 1050 दूंगा परंतु मुझे आफ्टर सेल सर्विस चाहिए ऑन साइट, पक्का बिल और जी एस टी कटा हुआ चाहियेजी हां हो जाएगा 2 मिनट में सौदा समाप्त

Threat Unlimited

प्रभुत्व का प्रभाव: पत्रकार:मैं एक राष्ट्रीय अखबार का संवाददाता हूं और आपके सरकारी दफ्तर में यह काम करना चाहता हूं !अधिकारी:डीटेल्स दे दीजिएपत्रकार:यह डिटेल्स है मैं अखबार में हूं .अधिकारी:वह बताने की जरूरत नहीं है अगर आपकी पात्रता है तो यह कार्य बिना अखबार में आपकी पोज़ीशन के विज्ञापन ही हो जाएगा आप बैठिए .... Continue Reading →

Angry yet not Unfriendly!

लघु संवाद -२ मित्रों का संवाद: क्या आप मुझसे नाराज हैं ? हां ! क्या कारण है ? मैं बताना उचित नहीं समझता ! क्यों? क्योंकि आप सदैव से मेरे प्रति सदाशय रहे हैं ! तो अब क्या हुआ ? मुझे कहीं असंतुष्टि है इसलिए मैं नाराज हूं ! तो कारण नहीं बताएंगे ? कारण... Continue Reading →

Forgotten

हद से बढ़े तोहादसे हुएमौन से भी तोफ़ासले हुए नैनों से निर्मलइशारे हुएबिन बोले भी तोसंवाद हुए शोर चाहे जो होशांत सब हुएमाया मोह मेंग़लत हम हुए प्रकृति प्रभु समानहम भूले हुएख़ुद ही ख़ुदा होन्यायप्रिय कब हुए सुनना यूँ भूलेसदैव बोलते हुएप्रतिक्रिया देते देतेश्रोता कब हुए मायालोक के हामीइस तरह बिंधे हुएबंदी हम सभीमहासुख भूले... Continue Reading →

Christmas As Usual

Christmas As Usual: Movie Review( क्रिसमस एज यूजुअल ) ये है हॉलीवुड के उस चलचित्र का नाम जिसमें भारतीय संस्कृति का छौंक दिखाई पड़ता है. नेटफ्लिक्स पर उपलब्ध हॉलीवुड का यह चलचित्र देखने का संयोग हुआ जिसमें जश्न जोशी (करण गिल) एक भारतीय के रूप में नॉर्वे की एक सुंदर नैनों की धनी यूरोपियन कन्या... Continue Reading →

Value Less

मोल-अनमोल(पति-पत्नी संवाद) पत्नी- अरे यह तो मैं हूं जो निभा रही हूं कोई और होती तो छोड़ जाती !पति- तो छोड़ ही दो तुम भी मुक्त!पत्नी-अरे ऐसे कैसे छोड़ दें ब्याह में ही ₹300000 खर्च किए थे वसूली तो हो जाए .पति -किस तरह करोगी वसूली?…और यहां तुम्हारा बस चले तो तुम तो मुझे कबाड़ी... Continue Reading →

Wanna be a River.

नदी होना चाहता हूं गोमुख से छोटा उदगमपवित्र और पावनजीवन नद का निर्मलनदी का उत्तम उदभव कुछ इठलाती नटखटसमेटे सबको जातीबाहों को फैला लेतीसब को नहला जाती है दान पुण्य की हामीप्यासे की अनुपम दासीप्यासे का रंग ना देखतीसदियों से सेवा को प्यासी. समभाव से बहतीनिर्मल यह कामिनीप्राणों की रक्षा मेंप्रेम की यह दामिनी जीव... Continue Reading →

Ain’t you an Evil!

तो कौरव हो तुम… यदि श्रीकृष्ण तुम्हारे पक्ष में नहीं,तो कौरव हो तुम।अपने में संतोषी और भावुक नहीं,तो कौरव हो तुम।करुणा को भूले तुम और दया नहीं,तो कौरव हो तुम।इच्छा मृत्यु के वरदानी पर अन्यायी,तो कौरव हो तुम।खेल के छल में निपुण और पक्षपातीतो कौरव हो तुम।धक्का दे आगे बढ़ने को हर कीमत आतुर,तो कौरव... Continue Reading →

Greed Unlimited

पत्थर से भी मांगते…. भटकते हम,सदा कुछ पाने को.भूखे प्यासे,सदा कुछ भूलने को.कभी ये तो,कुछ वो बहुत, कोमिल जाये,तो भी नहीं रुकने को.संतोष नहीं,ये लालसा अविनाशी है.लगता कभी,क्या हम सब भुतिया हैं.?क्या होना,इसकी अंतहीन दौड़,सोचते सदा,क्या हम डरपोंक भी हैं.?डरते सदा,पत्थर से भी मांगते.पूछा सही,क्या हम वाकई धार्मिक हैं?.किसी भी कीमत,चाहूँ सफलता का हारमन विचारे,क्या... Continue Reading →

Be, in Nothing

रहो, नहीं में रहो… बारिश में रहोभिगो नहींतपन में रहोजलो नहींअकेले भले रहोतन्हा नहींमस्ती में रहोसहो नहींदौड़ते रहोथको नहींयात्रा में रहोपहुंचो नहींआकाश रहोभले उड़ो नहींजमीन रहोजुड़ो नहींभक्त रहोपूजो नहींउम्मीद रखोथामो नहींपढ़ो लिखो बढ़ोरुको नहींप्रयास में रहोआलस में नहींप्यार में रहोडूबो नहींडूबो भलेउलझो नहींतैरते रहोललचाओ नहींचैतन्य रहोमगन नहींलीन रहोनशें में नहींशून्य रहोगिनती में नहींशून्यता भली,गिनती सेबारिश... Continue Reading →

Moment Minima

क्षण प्रतिक्षण है क्षीण क्षण… आखिर कौन हूँ मैं,क्या मात्र यही एक क्षण.आखिर कहाँ ठहरा हूँ मैं,क्या यहीं इसी क्षण में. आखिर मैं काहे को हूँ यहाँ,इसी क्षण को जीने को.तो क्या है ये क्षण,क्षणिक है या अति है ये क्षण. आखिर क्या है जो बीत गया,बस यही इक क्षण.जो समझेगा, इस क्षण कोतो आगे... Continue Reading →

Why US is No. 1 : Lets see my Observations

Almost everything is automatedक्यूंकि मशीन चोरी नहीं करती है Almost all are disciplinedक्यूँकि कानून का पर्याप्त भय है Almost everyone in orderक्यूंकि शिक्षा का प्रभुत्व है Almost everyone is dependent on burger sandwiches or outside foodक्यूंकि भोजन बनाने मे समय बचाकर वे दुनिया के नंबर 1 देश बन गये Almost all are educated and english... Continue Reading →

Even Lie Works!

झूठ के पांव…. दरोगा जी ने डंडा फटकारा, सच बोलो!तुम्हारे आपसी झगडे से परेशान हो गया हूँ. हवालदार बंद करो इनको हवालात में. दो पडोसी, आदतन झगड़ालू, छोटी छोटी बातों पर. शहर के अविकसित क्षेत्र के रहवासी दोनों, देशी दारू पीकर जब तब उलझ पड़ते. जैसे तेरी मुर्गी मेरी तरफ कैसे आई या तुम्हारे घर... Continue Reading →

Remedy for Govt Hospitals

सरकारी अस्पतालों को समाज से उम्मीद भारतीय समाज की अर्वाचीन परंपरा रही है सहयोग करने की, फिर भले ही वह शारीरिक हो या आर्थिक ही क्यों ना रहा हो. प्राचीन काल में स्वास्थ्य सेवाओं का स्तर ओ.पी.डी. स्तर पर ही उपलब्ध रहता था तथा उस काल में युवावस्था में मौतों का प्रतिशत भी अत्यधिक रहा... Continue Reading →

Advertising in Health Sector : Unhealthy Trend.

विज्ञापन आधारित औषधि और स्वयंभू उपचार – खतरनाक हो सकता है.   व्यवसाय शास्त्र के चलन में कहा जाता है कि यदि आपका व्यवसाय नहीं चल रहा है तो विज्ञापन कीजिए और यदि आपका व्यवसाय अच्छा चल रहा है तो विज्ञापन कीजिए यानी कमोबेश हर स्थिति में प्रिंट मीडिया ओर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के  माध्यम से,... Continue Reading →

Gentleman: Who, Why, Where!

जेंटलमैन -जा के फटे ना पैर बिवाई- (यदि आप सज्जन है या नहीं है या होना चाहते हैं या सज्जन को जानना चाहते हैं तो यह आलेख आपके लिए है)सद + जन यानी सच से परिपूर्ण व्यक्ति ही जेंटलमैन या सज्जन के रूप में परिभाषित होता है. कदाचित कलयुग की अंधी दौड़ में जेंटलमैन दुर्लभ... Continue Reading →

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