Time Eternal

समय का देवांश….

दिन भर साथ चलूंगा
संग रहूंगा सुख दुख में
पुतला बने या तू मूर्ति
संग तेरी राह बनूँगा

हर पल में सांस बनूँगा
धमनी में बहता रहूंगा
रहनुमा बने या तू दोस्त
संग तेरे राह बनूँगा

समय का देवांश हूँ
क्षण क्षण धार धरुंगा
तू माने या ना मानें
तेरे मन कर्म को तीक्ष्ण करूँगा

तुझे विवेक का संग मिले
इतनी बुद्धि प्रथम दूंगा
दिल की सुनो या मन की
ये आजादी भी नित्य दूंगा

काल अनंत से यात्रा में है
न जाने कब से हम आ रहे
माया के लोभ में
काहे आत्मा भुला रहे

काल सकाळ की मुक्ति
ज्येष्ठ और आदित्य का प्रण
ग्रह तारे कालयवन का घूर्णन
तिस पर विचलित रहे तेरा मन

काल तो सदा गले पड़ेगा
सत्य हो या तम का व्यवहार
धारणा ध्यान समाधि लगा ले
नित्यप्रति होगा प्रत्याहार

विचार कीजियेगा ……..

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