Even Lie Works!

झूठ के पांव….

दरोगा जी ने डंडा फटकारा, सच बोलो!
तुम्हारे आपसी झगडे से परेशान हो गया हूँ. हवालदार बंद करो इनको हवालात में.


दो पडोसी, आदतन झगड़ालू, छोटी छोटी बातों पर. शहर के अविकसित क्षेत्र के रहवासी दोनों, देशी दारू पीकर जब तब उलझ पड़ते. जैसे तेरी मुर्गी मेरी तरफ कैसे आई या तुम्हारे घर से बहा पानी मेरी ओर कैसे आया और आँखें तरेर के कैसे देखा.
25 साल से साथ रहते पडोसी, दिवाली – होली संग रहते, ख़ुशी ख़ुशी त्यौहार मानते लेकिन यदा-कदा झगड़ भी बैठते. वो भी इतना, कि बात पुलिस थाने पर जा पहुंचे. थाना स्टाफ भी पहचानता है को, दोनों आदतन झगडालू हैं.


हवालात में बैठे दोनों झगडालू पड़ोसियों की कचर-कचर जुबान चलती रही, थानेदार के कानों में भी ये आपसी गाली-गलौच के आदान प्रदान की चर्चा पड़ती रही.
…बुला भेजा, दोनों पडोसी को थानेदार ने और साथ में बुला भेजा मुंशी आरोप लेखक को.
थानेदार ने लेखक मुंशी को इस झगडे के आरोप पत्र में सम्बंधित आई. पी. सी. एक्ट की लगने वाली धारा लगाना शुरू की.
आपसी झगडा,
मारपीट,
गाली गलौच,
जान से मारने की धमकी,
जान से मारने की कोशिश,
आत्महत्या की धमकी,
शासकीय कार्य में बाधा की धारा लगा दीं …..

दोनों पडोसी, इतनी धाराओं का विवरण सुन स्तब्ध रह गए.
ऐसा झगडा तो न था.
दोनों पड़ोसियों ने एक दुसरे को देखा .
थानेदार ने दोनों को देखा.
पड़ोसियों के चेहरे की हवाइयां पढ़, थानेदार ने कहा, गैर- जमानती धारा लगायीं हैं और अब जमानत भी हाईकोर्ट से होगी तो तैयार रहो, मकान- दुकान, जमीन जेवर गिरवी रखने को….
दोनों पडोसी, एक साथ थानेदार के चरणों में.
माफ़ी हुजुर, आज के बाद अब हम थाने आयें तो सब धारा लगा देना.
..दोनों के सर , थानेदार के पैरों में पड़े थे.
और थानेदार, आरोप लेखक मुंशी को देखकर मुस्कुराराहे थे.

क्षमा कर छोड़ दिए गए दोनों, इस हिदायत से के साथ कि, यह केस अभी खुला है, कागज़ मरा नहीं है.
दोनों पडोसी, गले में हाथ डाले, समझौता कर बाहर हो गए थाने से.

थानेदार की धाराओं का कड़वा झूंठ काम कर गया.

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