Ready to be Human

चाह चहेती…अजन्मे की …. मानव जन्म को मैं सज्ज हूँ,उस मृत्युलोक में जीने कोभले श्रमसाध्य तुम बनाना,पर मेहनत का रस देना. कष्ट भले भाग्य में लिखना,नैतिक बल की भेंट दे ना.भूख भले पूरी न मिटाना,पर रोटी तुम चैन की देना. फल की आस करूँ, मैं भले अति,परिणाम में सहमति देना.जीवन समर है, अनन्त काल से,तनिक... Continue Reading →

Almighty Sea

समंदर का खाली हो जाना… कहते खारा पानी बड़ा शीतल होता है,समंदर कभी भी मीठा नहीं होता है . जलराशि अथाह और प्रेम कुछ नहीं,अहंकार से सबको परे धकेलते रहना है. लहरों की शान, नभ जैसे पसरी पड़ी है,पीने को पानी भी नहीं, भंडार भरे हैं. फिर भी शांत मन, सूरज के आगे अर्पित है,खारे... Continue Reading →

Nectar Rain

अमृत वर्षा … सूर्य की अमृत वर्षा,भूलोक की धाती है.रश्मि पुंज का क्षितिज,लोकचक्षु कहलाती है. काशी के लोलार्क की यात्रा से,रवि दर्शन को मुक्ति नयना.सप्त्श्रवाहन के चालक बलिहारी,बैशाख के तुम सूर्य अर्यमा. पीतवर्ण सहस्त्र किरण,काशी के तुम उत्तरार्क.ज्येष्ठ मासे मित्र नामे,उदय पर्वत निवासी. अशाढे अरुण रथारूढ़,द्रोपदी अक्षय पत्र दाता,सावने तुम इंद्रा – आदित्य,शिव के तुम... Continue Reading →

Let it be the last day

जैसे आज आखिरी दिन हो…. मानव उद्घोष करते जैसे मिटटी का दिया,अँधेरे से भी किला लडाता अकेला.घोर घटाटोप अंधेरे से समर-रत ऐसे,आज आखिरी दिन हो जैसे. आसक्ति मोह की, लालसा धन की,प्रवृत्ति बैर की और निवृत्ति नहीं.भेद-क्रोध पकडे विवेक-वैराग्य छोड़े,जैसे अमरत्व का घृत पिए हों. यात्रा का आनंद यात्रा में मंजिल में नहीं,भले तुम स्वादु... Continue Reading →

Forgetting We

गरलमना गरलमनारहते हम.सरल होना,भूलते हम. गाँठ के पुरे,विष मनन.तरल होना,भूलते हम. जटिल होना,आसान है.सुगम होना,भूलते हम. कलकल मधुर,मन भये.मीठा कहना,भूलते हम. अनुकरण को,सज्ज सदा.आत्मखोज को,भूलते हम. दौड़ मायावी,असीम अनंत.धीमे दौड़े तो आगे.भूलते हम. नयन जो देखें, सदा सच नहीं.बार बार की जाँच,भूलते हम. जीव अस्थायी,भाव जैसे सदा का.यात्रा क्षणभंगुर,भूलते हम. वक्त बीतता ,खर्च होते हम.जन्म... Continue Reading →

Rest all is Fake

बाकी सब मिथ्या है….. मृत्यु का कारण जन्म है,ये माया का अहंकारी लोक है.कई तो पीड़ित, कुछ ही आनंदित,अवतार ये मानव का अमोघ है . 1 नभ से उतरती लीला,रसभरी धरा सुंदर सत्य,रक्षण करो हर क्षण का,भूले तुम कि सब मिथ्या है. 2 दौड़ एक तरफ़ा, मोह की माया,कोई समझा कोई विष्मृत.जन्म व्यर्थ न जाये... Continue Reading →

Tiger Tale

बाघ के किस्से दो किस्से सुनाता हूं सीधे बाघ से संबंधित हैं बाघ का एक्स्पोज़र होता है तो इस महामना महा शक्तिमान मानव की क्या स्थिति होती है आपका अंदाज लगेगा… … चुनाव में ड्यूटी लगी थी विधानसभा की, आज से 20 साल पुरानी बात है, मेरा जोनल ऑफिसर डी.एफ.ओ.(IFS) था. चोरल के आसपास के... Continue Reading →

Be life

जीने को सज्ज हूं…. ध्यान रखना तू सदैव,सच बोला तो घृणा पायेगा,झूठ की फसल यहाँ लहराती,मौन रहना सुख दिलाएगा.. कर्म का पाठ कृष्ण ने दिया है,फल को भुलाना होगा.सफल होने को तभी,तू कमर कस पायेगा. सत्ता सम्पदा साख के त्रिगुन,माया के अभिन्न अंग.बुद्धि से संभल ले इनको जो तूजीवन में तू भर लेगा रंग. जादू... Continue Reading →

Stray Dog : A Problem Major

आवारा श्वान : आशीर्वाद को आतुर  जब से नगर में सड़कों पर गाय गायब हुई है तब से गली के आवारा कुत्ता मण्डली की तो जैसे लॉटरी लग पड़ी है. कुछ कुत्ता प्रेम और कुछ वैधानिक निर्णय के चलते गली में व्यर्थ-भ्रमण के हामी ये कुकुर प्रजाति को ऐसी इम्यूनिटी (निरोध क्षमता) प्राप्त हुई है... Continue Reading →

Raja Bhoj : Reckoning Story

लोकप्रिय राजा, सदा प्रजा के लिए। ये कथानक राजा भोज का है जो परमार वंश के 7वीं शताब्दी दौरान मध्य भारत के शासक थे। राजा भोज का नाम बड़े सम्मान के साथ उनकी न्यायप्रियता, नागरिको की समग्र सेवा ओर सदाशयता के लिए लिया जाता है। आज का भोपाल पूर्व में उनके नाम भोजपाल पर ही... Continue Reading →

Movie Review: 12th Fail

Movie Review: 12th Fail वैसे तो पढ़ने के इस दौर में ऑटोबायोग्राफी पढ़ना सबसे अच्छा अनुभव होता है परंतु स्क्रीन पर पढ़ने वाले अब पुस्तक में पढ़ने की तुलना में अधिक हो गए हैं और पुस्तकों में लिखित भावनाओं का ज्वार और भाटा जो आप जी सकते हैं वह संभवत सेल्लुलोईड पर उतरकर ना आने... Continue Reading →

Be the light by yourself

कुछ यूं अपनी हस्ती, बनाये रखता हूँ…. हो भले नकली मुस्कान, चेहरे पर बनाये रखता हूं …. चेहरा ही मुखोटा है, नम भाव बनाये रखता हूं। ग़म हो या अतृप्त तृष्णा, साधुभाव बनाये रखता हूँ…. स्वयं से मैं खुशी का साथ सदा बनाये रखता हूं। फटी कमीज या चप्पल टूटी, आशा को ऊपर रखता हूं... Continue Reading →

Maheshwar : River Side

नर्मदा तीरे महेश्वर धाम दो बरस पूर्व नवंबर माह में जब मैं अपने भाइयों के साथ इंदौर के दक्षिण पश्चिम में स्थित 90 किलोमीटर दूर नर्मदा नदी के तट पर महेश्वर नगर में पूज्य मां के देह त्याग उपरांत अस्थि विसर्जन के प्रयोजन को गया तो ऐसा प्रतीत हुआ कि मां नर्मदा अपने निर्जल मन... Continue Reading →

God has NO Sunday

उसका रविवार नहीं होता….. इस बार चला जब , मैं इश्वर के दर से,पूछा, क्या आकांक्षा है तेरी मृत्युलोक सेहा, भले कम देना बुद्धि, मित्र दें बुद्धिमानभले लगे मेहनत, खूब मिले मुझे खूब ज्ञान. कहा भले देना कम धन,मित्र देना साधुवानमांगने का भाव न देना और न देना टूटने आसजो कष्ट देने जाना पड़े, सुदामा... Continue Reading →

Eternity of Silence

मौन की धुन… मौन को रमता हूँ, राम को भजता हूँ. धुन बिना आवाज, शांत मन तकता हूँ. सन्नाटा हिमालय जैसा, उतर आये ऐसा प्रयास अविकल, सब मेरा जपता हूँ. सूने में समाधी को , या शोर में समाधी. यात्रा अंतर्मन की, साहसी होने को तडपता हूँ . सन्नाटे की धुन मधुर, सुनने लगो तो... Continue Reading →

Expiry Date

दवाई की एक्सपायरी डेट का भय सरकारी अस्पताल में, मैं व्यवस्था का राउंड ले रहा था कि एक जवान सज्जन मेरे सामने उपस्थित हो गए, ....क्या डॉक्टर साहब आपकी ओपीडी में कंडोम तक नहीं है !! लॉकडाउन के बाद की स्थिति के कारण हमारे कंडोम सप्लाई में बाधा आई है इसलिए कंडोम नहीं है, ऐसा... Continue Reading →

Little Bird

चिरैया…. भोर काले चहकती चिरैया,कानों में निर्मल रस घोलती. अपने गान से सोये को जगाती,झील से तिनके को भी निकल लाती. रोज सबेरे, आंगन में फुदकती आती,जैसे हो कोई बात मुझसे बतानी . कभी इस डाली, कभी उस मुंडेर पर,पानी के मटके पर तो कभी दाने पर. रंगों से सराबोर, उर्जा की प्रदर्शनी,कितनी मनमोहक ये... Continue Reading →

DM vs MD

कलेक्टर विरुद्ध डॉक्टर - तंत्र बीमार भरी सभा में अपने साथी डॉक्टर को डांट देना भी एक पीड़ित कला है जहां पक्ष और विपक्ष दोनों पीड़ित हो जाते हैं. अभी हाल ही में कोरोना महामारी के संबंध में आयोजित एक महती और बड़ी बैठक में भरे कॉन्फ्रेंस हॉल में जिला कलेक्टर आंध्र प्रदेश ने भरी... Continue Reading →

Experience Prevails.

डॉक्टर – चाचा और गाँव की धरोहर क्यों, बड़ा शहर छोड़ कर अब इस बुढ़ापे में गांव आ रहे हैं चाचा?न जाने क्यों, बोले अब गांव के घर में ही रहूंगा और बाग बगीचा खेत खलिहान देखूंगा…. पिता-पुत्र का यह संवाद बम के गोले की भांति ठाकुर परिवार पर गिरा, जिनके डॉक्टर-चाचा अब शहर से... Continue Reading →

CPU: Mantra to Purchase

संस्कार ऐसी सिद्धि है जो बचपन से बच्चों को पढ़ाई सिखाई जाती है और स्वयं के स्तर पर भी लगातार सीखी और समझी जाती है चोरी ना करना,झूठ ना बोलना,गलत कार्य न करना प्राकृतिक नियमों या न्याय को सदैव सम्मुख रखकर कार्य करनानिर्बल का सहायक होना …. जैसी शिक्षा बचपन से बच्चों को पढ़ाई और... Continue Reading →

Loan or What!?

लोन दान या दान का लोन ….पूछ बैठी एक दिन पत्नी मेरी यह एन.पी.ए. क्या होता है? ….. कह ही दिया मैंने, यह एक प्रकार का दान होता है ऐसा दान जो छीन कर लिया जाता है. ऐसा दान जो शीर्ष सत्तके सीने पर मुक्के मार कर बैंक की चेस्ट से लोन के रूप में... Continue Reading →

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