Eternity of Silence

मौन की धुन…

मौन को रमता हूँ,

राम को भजता हूँ.

धुन बिना आवाज,

शांत मन तकता हूँ.

सन्नाटा हिमालय जैसा,

उतर आये ऐसा

प्रयास अविकल,

सब मेरा जपता हूँ.

सूने में समाधी को ,

या शोर में समाधी.

यात्रा अंतर्मन की,

साहसी होने को तडपता हूँ .

सन्नाटे की धुन मधुर,

सुनने लगो तो लगे जोर

बिना कहे जो कह दो,

वह सुनने को तरसता हूँ .

कलियुग का शोर ऐसा,

मौन को तरसता हूँ.

जो भीतर हो सतयुग,

तो मौन को भजता हूँ.

मौन का रक्त बहे

तृष्णा घ्रणा को तजता हूँ .

अहम् की नदी रुके,

मैं का घोष छूटे.

मौन जो नैन भर,

निरे ध्यान को लगता हूँ .

आत्मा बिखरे,

परम तत्व को पावे.

मधुर भाषितम ,

कर्णप्रिय शोभतम सजता हूँ.

मौनं भाषितम

तो आत्मन प्रियतम.

संसार को तजो नहीं,

लीला को नहीं सुनता हूँ .

मायालोक है शाश्वत,

मृत्युलोक अकिंचन.

मेरा मौन लोक बना,

मैं को तजूं का चिंतन करता हूँ .

Temple in Jungle

Let’s find sugar in sweet milk

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