पुराना विचार है कि लंबे समय तक किसी व्यक्ति स्थिति परिस्थिति के साथ में रहा जाए तो व्यक्ति का मन उस विपरीत स्थिति – परिस्थिति में भी आनंदित होने लगता है. यही देखकर शायद स्टॉकहोम सिंड्रोम जैसी शब्दावली का विकास हुआ जहाँ अपहरण हुए व्यक्ति के अपहरण काल में अपहरण कर्ता से ही प्रेम भाव उत्पन्न हो जाता है. व्यक्तिश: यह कथानक कदाचित गले ना उतारता हो परंतु यह मानवीय मानस की विचित्र स्थिति है जिस अनुसार भावना से पीड़ित व्यक्ति अपनी भावनाओं पर नियंत्रण नहीं रख पाता है और परिवर्तित परिस्थितियों से आनंदित होने लगता है.
पुरुष के जीवन में इस तरह की घटनाओं की निरंतर पुनरावर्ती होती है जब समझौता करने के उद्देश्य से ग़ैर पसंदीदा स्त्री को भी वह पसंद करने लगता है यह भावना कमोबेश अजीब प्रतीत होती है परंतु इस भावना का उपयोग दुरुपयोग मानव मन द्वारा यदा कदा किया भी जाता है. पहाड़ों पर निरंतर यात्रा करने वाले हमारे 1 परिचित अपने साथ घर में काम करने वाली बाई या मेड सर्वेंट को साथ ले जाते हैं ताकि खाना बनाना साफ़ सफ़ाई बेहतर तरीक़े से हो सके.
अपने पहाड़ों में दौरे का दो-तीन महीने आराम से निकाल सके और जब पूछा गया कि आप लौटते कब हैं तो उनका वक्तव्य आश्चर्यचकित करने वाला था जब उन्होंने कहा कि जब मुझे मेरी काम वाली ही अच्छी लगने लगती है तब मैं अपना सामान बोरिया बिस्तर बाँधने लगता हूँ और लौट जाता हूँ !!!
मैं यहाँ मानसिक स्थिति मात्र शारीरिक संबंधों की स्थापना की आपूर्ति नहीं हैं बल्कि परिवर्तित होती मानसिक स्थिति का प्रतीक है जिसके चलते आध्यात्मिक धार्मिक राजनीतिक भौगोलिक स्थितियों परिस्थितियों के परिवर्तनशील होने के मानस में व्यक्ति का स्वभाव बदलता रहता है
विचार कीजिएगा

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