प्रत्येक हाथ में एक स्मार्ट फोन है और इंटरनेट से दमकती स्क्रीन पर उलझे हम और आप. सोशल मीडिया की बात कहूं तो यह तय है कि यह मीडिया किसी का लिहाज़ नहीं करता और ज्ञान / ध्यान के संज्ञान की वह गंगा बहाता है कि कभी कभी प्रतीत होता है कि समेट सको तो समेट लो अन्यथा ज्ञान का पोस्ट किया गया संसार समंदर की भाँति लहरा तो रहा ही है.
निरंतर बह रहा है और बिना भेदभाव कुलीन आदिवासी से लेकर कुलीन-मलिन संभ्रांत को भी एक जैसा भिगो भी रहा है.
अब प्रश्न यह उठता है कि आप कितना भीगने को तैयार हैं. पिछले कुछ महीनों से सोशल मीडिया की शोर्ट रील्स में फाइनेंस, स्टॉक मार्केट, ज्योतिष विद्या तथा वकालत सीखने के के विभिन्न आयामों को समझने की रीलों की बाढ़ आ रखी है. यदि रुचि ऑनलाइन शॉपिंग की हो तो सोने पे सुहागा है कि आप किसी भी प्लेटफार्म पर हों, अपनी रुचि पसंद या जरूरत का विज्ञापनों रील लगातार निरंतर अविरत पा जाएँगे.
चिकित्सकों को और गहराई से प्रशिक्षित करने के वीडियो की तो जैसे बाढ़ ही आ गई है.स्मार्ट फोन पर ज्ञान उपलब्ध हो और इतना आसान रूप में उपलब्ध हो कि 15 सेकंड की ऑनलाइन पर इंटरनेट पर पोषित रील में आपको एक सत्य की जानकारी मिल जाए और वहाँ से आगे जाकर आप कुछ निर्धारित समय पर ज्योतिष सीखने या विधिक सलाह लेने या वित्तीय सलाह अनुसार म्यूच्यूअल फंड या शेयर बाजार में निवेश करने अथवा मोटा होने या पतला होने या सुंदर दिखने के विभिन्न उपायों को करने के लिए उपलब्ध रीलों का जंजाल आपको भ्रमित किए बिना नहीं रहता है.
स्मार्ट फोन की स्क्रीन और इंटरनेट का अविरत प्रवाह एक जेलनुमा अभेद्य क़िला बनाते हैं जिसे तोड़ पाना या बाहर निकल पाना दुर्दांत मनस्वी या साधु मनस्वी दोनों के लिए ही लगभग असंभव है. उपाय मुक्ति का सूझे तो साझा कीजिएगा. सादर, विचारणीय!

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