मैं भी अमिताभ बच्चन! (570)

सुबह उठते से ही ज़मीन पर पैर रखने के पूर्व

कराग्रे वसते लक्ष्मीः करमध्ये सरस्वती।
करमूले तु गोविन्दः प्रभाते करदर्शनम्॥

का जाप करते हैं, हथेलियों को चूमते हैं, आँखों को हथेली लगा ने के बाद सुबह की दिनचर्या आरंभ करने के पूर्व बालकनी में जाकर दरवाज़ा खोलकर घर के सामने बने बग़ीचे में लगे पेड़ों फूल पत्तियों फलों और पक्षियों को देखते हुए यह अनुभूति होती है मैं भी अमिताभ बच्चन.

प्रत्येक रविवार अपने घर के सामने उपस्थित प्रशंसकों को अद्भुत दर्शन देने के लिए मूवी स्तर अमिताभ बच्चन अपने गेट पर उपस्थित होते हैं. उसी प्रकार मैं बालकनी में खड़ा होकर प्रकृति के आगोश में उपस्थित होकर अपने प्रशंसकों को अभिवादन करता हूँ. हालांकि वहाँ कोई सड़क पर बग़ीचे में मानव रूपी प्रशंसक नहीं होता परंतु मुझे अमिताभ बच्चन जैसी भावना अवश्य महसूस होती है

जब मैं आम, पीपल, नीम, अमरूद, बड़, शीशम, जामुन के पेड़ों पर सज्जित फूल पत्तियाँ टहनी तना छल और जड़ के साथ पक्षी गिलहरी कीड़े मकोड़े सुबह के आनंदित किये जाने योग्य मौसम में अपने स्वर कंठ से 1 निर्मल उद्घोष करते प्रस्तुत होते हैं तब मन का भाव कृतज्ञता से भरुर होता है.

और जैसा कहा जाता है आनंदित होने के लिए आपका मन अच्छा होना चाहिए, आनंदित तो आप विपरीत स्थिति में भी हो सकते हो तो यह भाव उत्पन्न हो जाता है कि मैं भी अमिताभ बच्चन

सफलता और असफलता व्यक्ति के जीवन का अनिवार्य अंग है परन्तु अति-सफलता कुछ बिरले ही प्राप्त कर देश विदेश पृथ्वी में मानवों की प्रजाति के मध्य टॉम डिक एंड हैरी के साथ साथ आम और ख़ास के भी प्रिय होते हैं.

आप भी अपने प्रिय बनिए और एक अमिताभ बच्चन अपने भीतर भी जीवित रखिये जो हर सुबह घर की चौखट पर या बालकनी में खड़ा होकर हर नए दिन का स्वागत हर्षोल्लास और उत्साह से करने के साथ साथ धन्यवाद भी देता है ! किसको?
इस पृथ्वी को पंच तत्वों को और इस शरीर रूपी अद्भुत गणना को जो हमें लिए चले जा रही है
न जाने कहा किधर, किस ओर किससे मिलने, न तू जाने ना मैं जानूँ .

मैं और मेरी वो तन्हाई अक्सर ये बातें करते हैं!

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