Time Eternal

समय का देवांश…. दिन भर साथ चलूंगासंग रहूंगा सुख दुख मेंपुतला बने या तू मूर्तिसंग तेरी राह बनूँगा हर पल में सांस बनूँगाधमनी में बहता रहूंगारहनुमा बने या तू दोस्तसंग तेरे राह बनूँगा समय का देवांश हूँक्षण क्षण धार धरुंगातू माने या ना मानेंतेरे मन कर्म को तीक्ष्ण करूँगा तुझे विवेक का संग मिलेइतनी बुद्धि... Continue Reading →

Defensive Medicine

DEFENSIVE MEDICINE: SPECIALITY OR A STATE OF MIND.. DR ANIL BHADORIA, Indian Medical Association Indore MP Everything can be purchased and so also health and health services. But, Time changed from an old era when health services were scarce and available medical facilities were thin. Scene has changed now and also the Mindset. It is... Continue Reading →

Awarded

2 असमान स्तर के मित्रों का अद्भूत संवाद- मित्र- मुझे पुरस्कार चाहिए सुधि मित्र - कई संस्थाएं बांट रही है नहीं नही, वैसा नहीं ! याने ? याने पैसे देकर मिलने वाला पुरस्कार नहीं चाहिए! तो कौन सा चाहिए ! मेहनत वाला ? हां वह हो जाए तो वाह! तो मेहनत करो मिट्टी में !... Continue Reading →

Threat Unlimited

प्रभुत्व का प्रभाव: पत्रकार:मैं एक राष्ट्रीय अखबार का संवाददाता हूं और आपके सरकारी दफ्तर में यह काम करना चाहता हूं !अधिकारी:डीटेल्स दे दीजिएपत्रकार:यह डिटेल्स है मैं अखबार में हूं .अधिकारी:वह बताने की जरूरत नहीं है अगर आपकी पात्रता है तो यह कार्य बिना अखबार में आपकी पोज़ीशन के विज्ञापन ही हो जाएगा आप बैठिए .... Continue Reading →

Angry yet not Unfriendly!

लघु संवाद -२ मित्रों का संवाद: क्या आप मुझसे नाराज हैं ? हां ! क्या कारण है ? मैं बताना उचित नहीं समझता ! क्यों? क्योंकि आप सदैव से मेरे प्रति सदाशय रहे हैं ! तो अब क्या हुआ ? मुझे कहीं असंतुष्टि है इसलिए मैं नाराज हूं ! तो कारण नहीं बताएंगे ? कारण... Continue Reading →

Government Experience

सरकारी नौकरी और प्रोफेशनल दृष्टिकोण: मेरी बंदूक का लाइसेंस रिन्यूअल में देरी क्यों हो रही है? आपकी लाइसेंस की जांच चल रही है. पुलिस वेरिफिकेशन के बाद ही लाइसेंस का नवीनीकरण किया जाएगा. आप मुझे परेशान कर रहे हैं! नहीं, कार्य की प्रक्रिया है जिसे अभी लागू किया गया है इसमें 10 से 15 दिन... Continue Reading →

Value Less

मोल-अनमोल(पति-पत्नी संवाद) पत्नी- अरे यह तो मैं हूं जो निभा रही हूं कोई और होती तो छोड़ जाती !पति- तो छोड़ ही दो तुम भी मुक्त!पत्नी-अरे ऐसे कैसे छोड़ दें ब्याह में ही ₹300000 खर्च किए थे वसूली तो हो जाए .पति -किस तरह करोगी वसूली?…और यहां तुम्हारा बस चले तो तुम तो मुझे कबाड़ी... Continue Reading →

Wanna be a River.

नदी होना चाहता हूं गोमुख से छोटा उदगमपवित्र और पावनजीवन नद का निर्मलनदी का उत्तम उदभव कुछ इठलाती नटखटसमेटे सबको जातीबाहों को फैला लेतीसब को नहला जाती है दान पुण्य की हामीप्यासे की अनुपम दासीप्यासे का रंग ना देखतीसदियों से सेवा को प्यासी. समभाव से बहतीनिर्मल यह कामिनीप्राणों की रक्षा मेंप्रेम की यह दामिनी जीव... Continue Reading →

Ain’t you an Evil!

तो कौरव हो तुम… यदि श्रीकृष्ण तुम्हारे पक्ष में नहीं,तो कौरव हो तुम।अपने में संतोषी और भावुक नहीं,तो कौरव हो तुम।करुणा को भूले तुम और दया नहीं,तो कौरव हो तुम।इच्छा मृत्यु के वरदानी पर अन्यायी,तो कौरव हो तुम।खेल के छल में निपुण और पक्षपातीतो कौरव हो तुम।धक्का दे आगे बढ़ने को हर कीमत आतुर,तो कौरव... Continue Reading →

Greed Unlimited

पत्थर से भी मांगते…. भटकते हम,सदा कुछ पाने को.भूखे प्यासे,सदा कुछ भूलने को.कभी ये तो,कुछ वो बहुत, कोमिल जाये,तो भी नहीं रुकने को.संतोष नहीं,ये लालसा अविनाशी है.लगता कभी,क्या हम सब भुतिया हैं.?क्या होना,इसकी अंतहीन दौड़,सोचते सदा,क्या हम डरपोंक भी हैं.?डरते सदा,पत्थर से भी मांगते.पूछा सही,क्या हम वाकई धार्मिक हैं?.किसी भी कीमत,चाहूँ सफलता का हारमन विचारे,क्या... Continue Reading →

Be, in Nothing

रहो, नहीं में रहो… बारिश में रहोभिगो नहींतपन में रहोजलो नहींअकेले भले रहोतन्हा नहींमस्ती में रहोसहो नहींदौड़ते रहोथको नहींयात्रा में रहोपहुंचो नहींआकाश रहोभले उड़ो नहींजमीन रहोजुड़ो नहींभक्त रहोपूजो नहींउम्मीद रखोथामो नहींपढ़ो लिखो बढ़ोरुको नहींप्रयास में रहोआलस में नहींप्यार में रहोडूबो नहींडूबो भलेउलझो नहींतैरते रहोललचाओ नहींचैतन्य रहोमगन नहींलीन रहोनशें में नहींशून्य रहोगिनती में नहींशून्यता भली,गिनती सेबारिश... Continue Reading →

Even Lie Works!

झूठ के पांव…. दरोगा जी ने डंडा फटकारा, सच बोलो!तुम्हारे आपसी झगडे से परेशान हो गया हूँ. हवालदार बंद करो इनको हवालात में. दो पडोसी, आदतन झगड़ालू, छोटी छोटी बातों पर. शहर के अविकसित क्षेत्र के रहवासी दोनों, देशी दारू पीकर जब तब उलझ पड़ते. जैसे तेरी मुर्गी मेरी तरफ कैसे आई या तुम्हारे घर... Continue Reading →

Remedy for Govt Hospitals

सरकारी अस्पतालों को समाज से उम्मीद भारतीय समाज की अर्वाचीन परंपरा रही है सहयोग करने की, फिर भले ही वह शारीरिक हो या आर्थिक ही क्यों ना रहा हो. प्राचीन काल में स्वास्थ्य सेवाओं का स्तर ओ.पी.डी. स्तर पर ही उपलब्ध रहता था तथा उस काल में युवावस्था में मौतों का प्रतिशत भी अत्यधिक रहा... Continue Reading →

DIABETES : HOW TO MANAGE BETTER CONTROL!

मानव शरीर अनुशासन का हामी है और इस मानव शरीर में एक विचित्र अंग उपस्थित है, अग्नाशय, जिसे संभावित रूप से सबसे अधिक अनुशासन की आवश्यकता होती है. अग्नाशय या अंग्रेजी में पैनक्रियाज एक ग्रंथि है जो आमाशय के पीछे रीढ़ की हड्डी के सामने एक अल्पविराम के निशान की भांति उपस्थित हैं। अग्नाशय, एक... Continue Reading →

Advertising in Health Sector : Unhealthy Trend.

विज्ञापन आधारित औषधि और स्वयंभू उपचार – खतरनाक हो सकता है.   व्यवसाय शास्त्र के चलन में कहा जाता है कि यदि आपका व्यवसाय नहीं चल रहा है तो विज्ञापन कीजिए और यदि आपका व्यवसाय अच्छा चल रहा है तो विज्ञापन कीजिए यानी कमोबेश हर स्थिति में प्रिंट मीडिया ओर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के  माध्यम से,... Continue Reading →

Cyber Crime: Beware

साइबर क्राइम के इस दौर में जब प्रत्येक हाथ में एक स्मार्टफोन है, लचीला और सस्ता इंटरनेट का कनेक्शन है तब धोखाधड़ी करने वाले आपराधिक शार्क और मगरमच्छों के बीच आपकी - हमारी स्थिति 32 दांतो के बीच में जीभ जैसी हो जाती है … कि रहना भी साथ साथ है और बचने की कला... Continue Reading →

Gentleman: Who, Why, Where!

जेंटलमैन -जा के फटे ना पैर बिवाई- (यदि आप सज्जन है या नहीं है या होना चाहते हैं या सज्जन को जानना चाहते हैं तो यह आलेख आपके लिए है)सद + जन यानी सच से परिपूर्ण व्यक्ति ही जेंटलमैन या सज्जन के रूप में परिभाषित होता है. कदाचित कलयुग की अंधी दौड़ में जेंटलमैन दुर्लभ... Continue Reading →

God’s Own Stories

भगवान की कहानियां कथानक - डॉ अनिल भदौरिया(पृथ्वी नामक स्वर्ग की यात्रा पर ये देवांश)------------ अलौकिक और सर्वशक्तिमान भगवान खूब आनंदित रहते हैं परंतु कभी कभी मृत्युलोक की यात्रा को भी उपस्थित होते हैं और मानव को दर्शन भी देते हैं। यहां द्वैत और अद्वैत का प्रश्न त्याग दें तो ईश्वर के दर्शन का लोभ... Continue Reading →

Family Physician : Have we Lost them?

Family Physicians : Have we lost them? Dr Anil Bhadoria President, IMA, Indore              Once Upon a time, society was known to have a good number of family physicians who were part and parcel of the healthcare system of family structure in Indian society. A Family Physician is an aptly trained & skilled clinician who... Continue Reading →

Cholesterol: Friend or Foe !?

“CONTROL CHOLESTROL IN JUST 7 STEPS” Cholesterol is an essential substance of human life which chemically is a monohydric alcohol C27H45OH, Sterol which is present in animal tissues like Egg Yolk, various oils, fats, liver, kidneys adrenal glands, nerve tissues of brain and spinal cord. Though this term cholesterol sounds dreadful but is beneficial for... Continue Reading →

Know Diabetes, No Diabetes

DIABETES POEM COZY LIFE AND FACILITIES,GET YOU TO THE DIABETES. EXCESS DIET AND AMINITIES,BRING YOU THE DIABETES. NO WORK WITH EXTREMITIES,MIGHT GET YOU THE DIABETES. UPGRADE YOUR LIFE QUALITIES,DEGRADE YOU TO THE DIABETES. GENDER, AGE ARE EQUALITIES,SPARES NONE, SO IS DIABETES. MUCH OF ALCOHOL & PARTIES,ALL BUY YOU THIS DIABETES. SPARES NOBODY WITH DISPARITIES,SO DREADED... Continue Reading →

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