Blog No. 471 किसी भी शाम को नगरों के बाजार, क़स्बे, गली - आँगन का रुख़ करें तो भारतीय समाज की भीड़ दारू की दुकान और दवाई की दुकान पर झूमती मटकती झूलती दिखाई देती है. एक प्रकार की दुकान जो औषधीय व्यवसाय से अस्वस्थ लोगों का अमृत है तो दूसरी प्रकार की दुकान सुरा... Continue Reading →
Civic Sense for Walking on Road!
Regards ✔️पैदल चलते में सड़क दुर्घटनाओं से कैसे बचें- यदि आपसे मैं यह कहूं कि हम भारतीयों को सड़क पर न तो पैदल चलना आता है और न ही वाहन चलाना आता है और इसीलिए देश में सड़क चालन की गलतियों से ही पैदल यात्रियों की प्रतिवर्ष डेढ़ लाख बाइकर्स बिना हेलमेट यात्रा करने से... Continue Reading →
Morning Stretching
अंगड़ाई! जन्म से लेकर मृत्यु तक का जीवन जीने की शैली में विज्ञान का समावेश है और यह विचार का विषय हो सकता है. आठ घंटे की प्रचुर नींद के बाद प्रातः काल में आपके जागते ही शयनस्थल पर भी ऐसा क्या किया जाना चाहिए ताकि शरीर के आराम के शिथिल अवस्था से खड़े होकर... Continue Reading →
Parrot
On the wings being upside down is like on the fire,On the sling showing good aerobatics is like never to retire. Believe it or not, but you have to get down,Steady, sturdy, composed and foot down.
Birds Chirping
One good word is SYNC. Sync mean’s Synchronisation! Synchronisation with Mother Nature. It’s way difficult as it’s a journey towards one’s own inner self. Is it troublesome to visit inner self or it’s easy to visit outside.
Bachpan
बचपन ? वह दौर जब आप शिशु नहीं हैं!तो आप किशोर भी नहीं हुए हैं, वयस्क होना तो अभी दूर है.बचपन वह दौर है जब आप मन से निरे शुद्ध हैं, निष्कपट, निष्कलंक, प्राकृतिक रूप से न्यायसंगत, सच से पीड़ित और निर्वात जैसे रिक्त. बचपन का धारक, सच का हामी हो प्राकृतिक न्याय का हामी... Continue Reading →
Protection!
संवाद, हेलमेट की दुकान पर- छात्र - बड़े भाई, एक हेलमेट खरीदना है?विक्रेता - हाँ जी, बिल्कुल. कोई ब्रांड विशेष! छात्र- नहीं जी, इतना मजबूत हो कि बस सिर सुरक्षित रहे.विक्रेता - सही कहा. आप तेज गाड़ी तो नहीं चलाते हो! छात्र- गाड़ी तो मेरे पास है ही नहीं!विक्रेता - अरे तो हेलमेट क्यों ले... Continue Reading →
Vanvaas (464)
क्या हमारे जीवन में भी वनवास है?यदि है तो वह किस रूप में प्रस्तुत होता है?कलियुग में वनवास के क्या मायने हैं ? भारतीय चिंतन में वनवास का एक विशिष्ट स्थान है जहाँ पर त्रेतायुग में भगवान श्रीराम को 14 वर्ष का वनवास और द्वापर युग में पाण्डवों को 13 वर्ष के वनवास के दृष्टांत... Continue Reading →
MR : Biggest Heist Ever
चोरी भी एक कला है जिसके बारे में कहना कठिन है कि वह स्वाभाविक नैसर्गिक गुण है या अस्वाभाविक है. प्राकृतिक गुण है या मानसिक बीमारी है. आदत है या लोभ जनित है. जो भी हो पर जब ऐसे हॉलीवुड के ऐसे चलचित्र का अवलोकन देखने का अवसर प्राप्त हो जो इतनी बड़ी राशि भी... Continue Reading →
MR : American Made
साहस, दृढ़ता, लोभ, बुद्धि कौशल और समय पर सही निर्णय लेकर बच निकलने का मानस यदि किसी में है और उस पर एक चलचित्र का निर्माण हो वैसी जीवंत कथाओं को देखने का सुख भी अजब - ग़ज़ब ही होता है. मैं यहाँ बात कर रहा हॉलीवुड के एक चलचित्र American Made की जो विख्यात,... Continue Reading →
Cashew Nuts(460)
मानव का चटोरा मन और स्वाद की जिव्हा चटकार उसे अद्भुत जीव बनाती है… मन का नियंत्रण और निर्णय लेने की क्षमता पर विचार करें तो जीवन में उत्पन्न स्थितियों का प्रसंग कुछ इस प्रकार बताया जा सकता है - टाईम पास मूंगफली के सबसे पहले खाने के लिए सुडोल सुदृढ़ और सुंदर मूंगफली के... Continue Reading →
Hostage with Screen(459)
स्क्रीन प्रेम और मैं बंधक प्रेमी ऐसा लगता है जैसे प्राचीन कहानियों में वर्णित राक्षस की जान पिंजड़े में बंद तोते में रहती है,वैसे ही मेरे प्राण मेरे मोबाइल में बसते हैं. किसी ज़माने में मेरे पास खेलने के लिए समय था , पढ़ने के लिए समय था और तो और काम करने के लिए... Continue Reading →
Courage Of Young Lady
ये दुर्गा, दे डंडा! Blog No 457. महिला, उम्र 28 बरस,बारहवीं पास.तीन बच्चे दो लड़कियाँ एक छोटा सा बेटा.महिला टीबी रोग से पीड़ित.महिला का उपचार जारीऔरकमज़ोरी रहने की हमेशा की शिकायत. क्षय रोग चिकित्सालय में मरीज़ों में से एक परिदृश्य- पति की शिकायत कि घर का आधा काम मुझे करना पड़ता हैऔरबीमारी के कारण ये... Continue Reading →
Traffic Discipline.
Blog No. 456 चुटकी भर अनुशासन:ट्रैफिक सिग्नल की लाइट संकेत लाल होने पर रुकने से दुर्घटना की संभावना कम होगी जिससे स्वास्थ्य के साथ वित्तीय लाभ भी होगा. चुटकी भर अनुशासन:सड़क पर दाएँ ओर से पैदल चलने से सामने से आते वाहन की दिशा के भान से बेहतर बचाव होगा. सड़क पर बांये दिशा में... Continue Reading →
The Laundromat: Movie Review
Blog 455 अमेरिका बड़ा विकसित देश है और अनुशासित भी, जैसा कि बाहर से प्रतीत होता है. द लॉंड्रोमैट नाम की एक मूवी को देखने का अवसर हुआ. इस मूवी टाइटल का शाब्दिक तात्पर्य है कपड़े धोने का पब्लिक आउटलेट जहाँ पैसे देकर मशीन में कपड़े धुलवाकर सुखाकर वापस ला सकता है. इस नाम से... Continue Reading →
Kurukshetra
यूँ तो इस स्मार्ट टीवी पर उपलब्ध ओटीटी प्लेटफार्म पर लगभग प्रत्येक भाषा में बहुतेरा दर्शनीय एवं अदर्शनीय माल उपलब्ध है जिनमें फ़िल्में, डॉक्यूमेंट्री और सीरीज़ की श्रंखलाओं का अजब-ग़ज़ब समावेश है परंतु एनीमेशन के माध्यम से 18 काल-खंडों(एपिसोड) में कुरुक्षेत्र नामक प्रस्तुति द्वारा महाभारत के युद्ध के घटनाक्रमों की श्रृंखला का दर्शन एक अद्भुत... Continue Reading →
Yield
जुजुत्सु की युद्ध कला कहती है कि अगर तुम प्रतिरोध न करो तो तुम सदा जीते हुए हो वृतांत कुछ इस प्रकार है दुर्घटना में बच्चे बच जाते हैं क्योंकि ये यील्ड कर जाते हैं. जो भी हो रहा है उसमें साथ ही हो जाते हैं उसके विरोध में खड़े नहीं होते उस से शत्रुता... Continue Reading →
Veetraag
एक समय आता है जब मन, विचार, सोच और मन के भाव में एक नई अवस्था उत्पन्न होती है. मित्र, मुमुक्षु पुरुष तो वही है जिसकी न पकड़ अब भोग की है और ना योग की है जिसने जान लिया कि सब सपना है सब मिथ्या है और जो भी है वह माया की लीला... Continue Reading →
Paradox (Blog 451)
धीमे चलोगे , आगे रहोगे !!! विरोधाभास, जीवन का विशिष्ट मानस दृष्टिकोण है जो जाम फल (अमरूद/बीही) ख़रीदते समय मीठे जाम फल की माँग करता है उसके बाद चाक़ू से काटकर नमक-मिर्च लगाकर खाता है. अरे जब मीठा खाना था तो नमक-मिर्च क्यों लगाया? और जब अमरूद नमक मिर्च लगाकर ही खाना था तो मीठा... Continue Reading →
Factor 4
Blog No 450 चतुर्युग दर्श : चतुर्युग दर्श कुछ यूँ समझे- काल – सतयुग, त्रेतायुग, द्वापरयुग, कलियुगरघुवंश - राम भारत लक्ष्मण शत्रुघनअतिरेक बुराई - काम क्रोध मद लोभकर्म – साम दाम दण्ड भेद आश्रम – ब्रह्मचर्य गृहस्थ वानप्रस्थ संन्यासछात्रत्व – विवेक वैराग्य शमदमादी मुमुक्षत्व4 कार – संस्कार सहकार अहंकार सरकारपीठ – शारदा द्वारिका, ज्योतिष बद्रीनाथ,... Continue Reading →