आसान शब्दों में कहें तो, इचिरो किशिमी और फूमिटाके कोगा द्वारा रचित यह पुस्तक सिखाती है कि आप एक ही समय में
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पूरी तरह आज़ाद और
2
सबके पसंदीदा, दोनों नहीं हो सकते, इसलिए आपको आज़ादी चुननी होगी!!
आश्चर्जनक है न!
दार्शनिक और शिष्य के मध्य स्थापित यह संवाद मनोविज्ञान की ऐसी परतें खोलता है की आप इस पुस्तक को पूरा पढ़े बिना नहीं रह पाते हैं. कुछ ब्रह्म वाक्यों की बानगी देखिए जो आपके मन मस्तिष्क को झकझोर देती है.
तुलना करना छोड़कर, तारीफ़ की ज़रूरत को छोड़कर, अपनी कमियों को मानकर, और दूसरों के लिए योगदान पर ध्यान देकर, आप “नापसंद किए जाने की हिम्मत” पैदा करते हैं और ज़्यादा शांत, ज़्यादा सच्ची खुशी की ओर बढ़ते हैं।
आपका जीवन ऐसी चीज़ नहीं जो किसी ने आपको दी है उसे तो आप ख़ुद चुनते हैं
कोई भी अनुभव, सफलता असफलता के कारण नहीं होता, अनुभव आत्म निर्धारित निर्धारित होते हैं.
तुमने स्वयं से प्रेम करना नहीं सीखा.
तुम्हें ऐसा व्यक्ति मुश्किल से मिलेगा जो गर्व से कहे हाँ में ख़ुद को पसंद करता हूँ.
यदि बदला लेना चाहते हो तो तुम्हें दुनिया के साथ पेश आने के अपने तरीकों और अपने बर्ताव को भी बदलना होगा.
सभी समस्याएं आपसी रिश्तों की समस्यायें हैं.
धर्म अपनी बात खो चुका है और ईश्वर पर किसी को कोई वास्तविक विश्वास नहीं रहा है. अभी यह दुनिया जटिल प्रतीत होती है लेकिन तुम्हारे बदलने भर से यह दुनिया में ज़्यादा सरल लगेगी. यहाँ सवाल दुनिया नहीं है बल्कि यह है कि तुम कैसे हो!
आपका जीवन ऐसी चीज़ नहीं है जो किसी ने आपको दी है बल्कि उसे तो आप ख़ुद चुनते हैं और आपको अपना जीवन कैसे जीना है.
तुमने स्वयं से प्रेम करना नहीं सीखा ख़ुद से प्यार कर सको इस कोशिश में तुम बिल्कुल अलग तरह के इंसान के रूप में फिर से जन्म लेने की इच्छा रखते हो.
तुम्हें कोई व्यक्ति मुश्किल से मिलेगा जो छाती चौड़ीकर बहुत गर्व से कहेगा कि वह ख़ुद को पसंद करता हो
एक कहावत है कोई भी बुराई की इच्छा नहीं करता.
एडलरियन मनोविज्ञान, साहस को मनोविज्ञान है
और यह कहा जा सकता है कि तुम में खुश होने के साहस की कमी है
इस सिद्धांत के अनुसार अपनी समस्याओं से छूट पाने के लिए कोई व्यक्ति यही कर सकता है कि वह पूरी दुनिया में बिल्कुल अकेले रहे
सभी समस्याएं आपसे रिश्तों की समस्याएं हैं
अगर इस दुनिया से सभी आपसी रिश्ते समाप्त हो जाए यानी हम अकेले हो जाए और बाक़ी सभी लोग यहाँ से चले जाए तो सभी समस्याएं भी छू मंतर हो जाएँगी
चिंता की भावना एक प्रकार की लाँचपैड हो सकती है और व्यक्ति अपनी चिंता की भावना से छुटका पाने की कोशिश करता है तो वह आगे बढ़ता रहता है
जो कोई भी शेखी भरता है वह आईना अपनी केवल हीनता की भावना के कारण करता है.
हम एक जैसे नहीं है लेकिन हम बराबर है, सभी मनुष्य बराबर है लेकिन एक जैसे नहीं है.
अगर प्रतियोगिता की इस व्यवस्था से कोई व्यक्ति मुक्त हो जाए तो उसे किसी पर जीत हासिल करने की ज़रूरत ही नहीं रहेगी.
जब तुम्हें वाक़ई लगने लगेगा कि लोग मेरे साथ ही हैं तो दुनिया को देखने की तुम्हारा नज़रिया पूरी तरह से बदल जाएगा
निजी क्रोध या निजी मन मुटाव और सामाजिक विरोध के रोष के बीच अन्तर होता है. निजी गुस्सा जल्द ठंडा हो जाता है जब कि न्याय संगत रोष लंबे समय तक बना रहता है
संवाद करना भी एक स्वरूप है और आपसी संवाद उसके बिना भी संभव है
तुम्हें कितना भी लगे कि तुम सही हो पर कोशिश करना कि उस आधार पर दूसरे पक्ष की आलोचना नहीं करो
इस पुस्तक के पढ़ने का अनुभव वस्तुतः मानवैरी भावना, मनोविज्ञान तथा पारस्परिक संबंधों की ग़ज़ब व्याख्या करता है. भाषा, लेखन शैली और एक नए विषय से साक्षात्कार पाठक को अचंभित करने के लिए पर्याप्त है. रुचिकर साहित्य है पठनीय है
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किसी की अवधारणा के न्याय संगत होने के हार या जीत से कोई ताल्लुक़ नहीं है गलती को मानने को मतलब हार मानना है ऐसा प्रतीत होता है.
हर कोई ना हारने की मानसिक रखता है और ना ही अपनी गलती मानता है नतीजा यह होता है कि व्यक्ति ग़लत राह पर चल पड़ता है. ग़लतियों को भूलना, माफ़ी मानना और शक्ति संघर्ष में नहीं पड़ना इनमें से कुछ भी पराजय नहीं है.
जब हमारा ध्यान केवल हार जीत पर होता है तो हम सही चुनाव करने की अपनी क्षमता खो देते हैं
सभी समस्याएं आपसी संबंधों की समस्याएं हैं.
जीवन के नियत कार्य हैं कामकाज से जुड़े काम दोस्ती के काम और प्रेम के काम तीनों को मिलाकर ही जीवन के काम कहा गया है
एडलर का मनोविज्ञान, कामकाज दोस्ती और प्यार के तीन काम पर क़ाबू पाने की बात कर देते हैं यह आपसी रिश्तों से जुड़े काम है
एक स्थान पर कहा गया है कि यहूदी धर्म में एक और दृष्टिकोण पाया जाता है यदि अपना जीवन तुम अपने लिए नहीं जी रहे हो तो तुम्हारे लिए और कौन यह करेगा
अच्छा आपसी रिश्ते बनाने के लिए थोड़ा फ़ासला ज़रूरी है
स्वीकृति की इच्छा आपको प्रवीण बनाई है तुम स्वीकृति की इच्छा जैस बातें कर हो लेकिन तुम में कहना वह चाहते हो जो तुम नहीं चाहते की कोई तुझे नापसंद करे
संक्षेप में कहें तो अन्य लोगों द्वारा ना पसंद किया जाना स्वतंत्रता है
मनोविज्ञान दृष्टिकोण है कि सारी समस्याएं आपसी रिश्तों की समस्याएं है ये रिश्ते दुख के स्रोत है परंतु इसके उलट भी बात कहीं जा सकती है कि आपसी रिश्ते प्रसन्नता के स्रोत है
जिन लोगों को सिर्फ़ अपनी फ़िक्र होती है उन्हें लगता है कि वही दुनिया के केंद्र है ऐसे लोगों के लिए बाक़ी लोग वाह लोग हैं जो मेरे लिए कुछ करेंगे उन्हें कुछ हद तक लगता है कि हर कोई उनकी सेवा के लिए है और उनकी भावनाओं को प्राथमिकता दी जाना चाहिए
जिन लोगों को यह लगता है की दुनिया के केंद्र वही हैं वे जल्द ही अपनी साथियो से हाथ बैठते हैं
हम में क्षमता की कमी नहीं होती बल्कि साहस की कमी होती है सारी बात साहस पर आकर समाप्त होती है
यदि घर में एक छोटी सी कहानी को उल्लेख मिलता है अगर आपके आस पास दस लोग हैं तो
एक ऐसो व्यक्ति जरूर होगा जो आपके आलोचना करेगा फिर चाहे आप कुछ भी करे वह आपको पसंद नहीं करेगा और आप भी उसे पसंद नहीं करेंगे
दो अन्य व्यक्ति ऐसे होगा जो आपसे जुड़ी हर बात को स्वीकार करेंगे और आप भी उन्हें स्वीकार ही करेंगे ऐसे लोगों से आपके दोस्त करीबी दोस्ती हो जाएगी और बचे हुए बाक़ी सात लोग न तो आपकी बुराई करेंगे न ही तारीफ़ !
जीवन का कोई भी अर्थ नहीं है!
मानो न मानो
यह दर्शन विरोधाभाषी अवश्य प्रतीत होता है. सच हो कदाचित!

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