आज एक रोचक अनुभव हुआ.
शासकीय क्षय (टीबी ) चिकित्सालय की ओ पी डी में बैठे हुए एक नवयुवती और उसका नवयुवक भाई उपस्थित हुए. उस नवयुवती को लगभग डेढ़ माह से खाँसी की समस्या होने से वे क्षय रोग की जांच करने के लिए इस अस्पताल में आए थे.
समस्त लैब जांच पूरी होने के बाद टीबी के संक्रमण तो चिह्नित नहीं हुआ परंतु अस्थमा के लक्षण जरूर मिले इसके लिए समुचित औषधि लिख दी गई परंतु उस भाई ने अंत में जो प्रश्न पूछ उस प्रश्न ने मुझे द्रवित कर दिया
मेरी बहन कभी कभी तंबाकू का गुटका खाती है उससे कोई नुकसान तो नहीं है ? ( ब्रांड का नाम भी बताया)
अभी तक चुप बैठे इस नवयुवक भाई के बोलने पर अंदाज़ हुआ कि इस भाई ने भी महक मारता झन्नाटेदार तंबाकू और जर्दा युक्त गुटका मुँह के किसी निर्मल कोने में दबा रखा था.
न जाने कैसे मेरे मन में प्रश्न उत्पन्न हुआ. मेरे पूछ जाने पर क्या माता पिता भी गुटखा खाते हैं तो उसका कहा
जी सर.
तो वैसे ही मैंने हथियार डाल दिए. लंबी सांस लेकर मैंने कहा फिर क्या बात है आपका उपचार आपके हाथ में है उचित समझे तो गुटखे का त्याग करें अन्यथा खुराक डबल करें और प्रभु मिलन को जल्द तैयार हो जाए.
आप भी सुझाव दें.

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