मानो न मानो!

जीवन में सबसे जटिल है सत्य जानते हुए असत्य के संग रहना. सत्य ये भी है कि ब्रह्मांड में स्थित हजारों निहारिकाओं में उपस्थित अरबों ग्रहों के सौर मंडल भी हैं. और इस विशाल रचना में सबसे छोटे तारे हमारे सूर्या का आकर इतना बड़ा है कि उसमें १३ लाख पृथ्वी समा जायें.

इस भयंकर और कल्पना से परे अविश्वसनीय सत्य के जान लेने के बाद भी हम माया से पीड़ित हो लोभ, मोह, मद, क्रोध, बदले की भावना के असत्य से जीवन को आलोकित किए चलते हैं.

संत भाव निर्मल तो है तथापि माया के वशीभूत होकर मलिनता का असंत भाव उत्पन्न करता है.

मायालोक की यात्रा का संतत्व, माया के तत्वों जैसे शरीर, धन, यश में धूल धूसरित हो ही जाता है.

मानो न मानो.

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