स्वयं प्रेम में कैसे पड़ें ?

पुरानी कहावत है कि भीतर की यात्रा करना सब से जटिल कार्यों में से एक है

यानी अहम ब्रह्मास्मी अर्थात् ब्रह्म का दिव्या स्वरूप आपके अन्तर मन में निहित है और स्वभाव कमजोरियों की वजह से अन्तर-मन में विराजित प्राकृतिक भगवान की अवधारणा को समझ नहीं पाता है.
मुझे प्रतीत होता है कि भीतर की यात्रा जैसा कुछ भी नहीं है?

माया बिखरी पड़ी है और पाँच इन्द्रिय से सज्जित इस शरीर के मानस का जटिल कार्य है स्वयं से प्रेम करना. यह कथन वाद विवाद की धरा पर ज़्यादा देर टिक नहीं पाएगा क्योंकि ऐसे स्वार्थी अर्थात् स्वयं प्रेमी या आत्ममुग्ध भी इस लोक में इतने भरे पड़े हैं कि उनको अपने आप के अतिरिक्त कोई सूझता ही नहीं है परंतु उन सुधि नागरिकों सज्जन पुरुषों स्त्रियों के संदर्भ में यह वाक्य कहना चाहता हूँ कि स्वयं को प्रेम करने के लिए क्या करना चाहिए जो शरीर के भौतिक स्वरूप तथा अभौतिक मानस को भी स्वस्थ बनाए रखने में समर्थ है

  1. प्रातः भ्रमण – प्रातः का पैदल भ्रमण स्वयं सिद्ध है. मन और तन के स्तर पर क्या अच्छा होता है क्या ख़राब इसे स्वयं अनुभव कर देखिए. तो आप अपने आप से प्रेम विकसित कर पाएंगे
  2. पर्याप्त निंद्रा – स्वयं हीलिंग का यह उत्तम उदाहरण है जहाँ विश्राम के क्षणों में शरीर और मानस दोनों ही अपनी टूट फुट को अपने आप से रिपेयर करते हैं तो आप अपने आप से प्रेम विकसित कर पाएंगे
  3. नये कृत्य – अनजान व्यक्ति से चर्चा, बाजार की यात्रा, खेल गतिविधि का समावेश ( मैदानी या टेबल गेम्स जैसे चेस, लूडो, ताश या सुडोकू जैसे ब्रेन गेम्स) तो आप अपने आप से प्रेम विकसित कर पाएंगे. नया खेल, नए मित्र, नया प्रयोग कि जैसे बाइक पर लोंग ड्राइव धीरे धीरे या जंगल यात्रा या नदी किनारे बाथ बस तकना.
  4. नया सृजन – कुछ नया चित्र, व्यंजन, विचार बनाओ और नया लिखो थोड़ा थोड़ा और उसे संवारो तो आप अपने आप से प्रेम विकसित कर पाएंगे
  5. कौशल विकास – अपनी रुचि अनुसार मैदानी/ सामाजिक/व्यावहारिक/ रोज़गारी/ व्यवसायिक कौशल का प्रशिक्षण और प्रैक्टिस से मानसिक विकास संभव है तो आप अपने आप से प्रेम विकसित कर पाएंगे
  6. नकारात्मकता का परित्याग – हर व्यक्ति के जीवन में उसकी ऊर्जा को चूस लेने वाले नकारात्मक ऊर्जा के स्रोत कृत्य, परिजन, मित्र, घटना संभावित होता है और इसे पहचान कर उससे बचना अनिवार्य है. समय से पहचान हो जाए तो ऐसी नकारात्मक ऊर्जा का त्याग करना सीखना होगा तो आप अपने आप से प्रेम विकसित कर पाएंगे.
  7. थोड़ा पागलपन कभी कभी – कभी बच्चा बन जाना कभी अपना स्वयं का Pet जहाँ कोई उत्पादकता न दिखे परंतु तनाव से मुक्ति का मार्ग मिले ऐसा कार्य कर गुजरना तो तो आप अपने आप से प्रेम विकसित कर पाएंगे.
  8. थोड़ा संतोष – क्यों? कारण आप जानते हैं ! तो आप अपने आप से प्रेम विकसित कर पाएंगे.
  9. सब ठीक होगा की धनात्मक स्वयं चर्चा – पॉजिटिव सेल्फ टॉक आपके अंतर्मन का टॉनिक है. तो आप अपने आप से प्रेम विकसित कर पाएंगे.
  10. नर सेवा नारायण सेवा

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