नशे का अजब संसार

सत्ता का नशा,
यौवन का नशा,
धन का नशा,
सौन्दर्य का नशा
बाहुबल का नशा तो
वाक्-पटुता का नशा या
मेधावी होने का नशा या
सफल होने का नशा
कुछ अच्छे नशे की श्रेणी में उपलब्ध है तो वहीं कुछ नशे घातक ही नहीं प्राणघातक होते हैं

वे न केवल मादक द्रव्यों के नशे हैं बल्कि समाज और देश को भी खोखला करने वाले नशे हैं. मादक द्रव्यों की श्रेणी में नारकोटिक पदार्थ के साथ साथ साइको-टॉपिक औषधीय पदार्थ भी सम्मिलित होते हैं जिनके का उपयोग निर्धारित है जो चिकित्सकों द्वारा कई रोगों में इस्तेमाल किए जाते हैं.

निषिद्ध श्रेणी की दवाओं से उत्पन्न होने वाला नशा एक भिन्न स्तर की मानसिक आनंद उत्पन्न करता ही है शीघ्र ही लत में बदल भी जाता है.
नशे की परिभाषा में मादक द्रव्यों की लंबी शृंखला उपलब्ध है जो शरीर के मानसिक स्वास्थ्य और भौतिक स्वास्थ्य के लिए हानिकर है

  1. आख़िर कैसे फँसता है नौजवान नशे के जाल में-

हालांकि यह कहना आसान है कि नशे से दूर बनाए रखें परंतु जिस प्रकार इस खुले समाज में नव युवक को नशीले पदार्थ अपने जाल में फँसाते हैं, वह लगभग आश्चर्य करने योग्य है.

युवा होते बालक – बालिकाएं जब जन्मदिन या परीक्षा में सफलता की या नए साल के आगमन की उत्सव रूप में पार्टी देते हैं तो कहीं आहिस्ता से, हौले से, धीरे से इन नौसिखियों के बीच में अनायास ही सिगरेट, शराब से प्रथम साक्षात्कार करते हैं. और ये ड्रग पेडलर कुछ इस प्रकार की झाँकी प्रस्तुत करते हैं कि –
आज यह नशा नहीं किया तो तुम्हारा जीवन बर्बाद है,
आकर्षक और हीरो नुमा छवि बनाने के लिए ऐसे नशे करना ही पड़ते हैं,
नौकरी में आगे बढ़ना है प्रमोशन पाना है ये नशा तुम्हारे मदद करेगा,
फ़िल्म में रोल लेना है तो ये नशा तुम्हारे मदद करेगा,
इस नशे जैस आनंद तुम को कभी जीवन में प्राप्त नहीं हुआ होगा,
ये नशा नहीं किया तो तुमने जीवन में कुछ नहीं किया.
जैसे ब्रह्म वाक्य आपको केवल उत्तेजित करने के प्रयास करेंगे ल जाएँगे बल्कि आपके मस्तिष्क की निर्णय लेने की क्षमताओं को भी बाधित करेंगे और आपइस धोखे में नशे मन हो जाएँगे.

  1. कैसे कैसे नशे –

समय के साथ अन्य उच्च स्तरीय नार्कोटिक ड्रग्स जैसे अफीम, मॉर्फीन, हेरोइन, फेंटेनाइल, ब्राउन शुगर तथा
साइकोट्रॉपिक पदार्थ जो दिमाग और व्यवहार पर असर डालते हैं जैसे
कोकीन, हेरोइन, फेंटेनाइल, मॉर्फीन, एल एस डी का आमंत्रित करता हुआ नशा जीवन बर्बाद करने तक में सक्षम है.
कैनाबिस श्रेणी के पदार्थ गांजा, भांग, चरस की नशे की आदत भी हर रूप में घातक है.

  1. नशे से पहली मुलाकात –

किसी भी नशीले पदार्थ या साइकोट्रोपिक ड्रग्स जैसे ब्राउन सुगर, स्मैक आदि से जब युवक का प्रथम साक्षात्कार होता है तो मन में बैठे संस्कार की एक बड़ी दीवार सदैव खड़ी होती है. किसी भी जातक को इस तरह के नशे को प्रयोग में लेने से मना करती है परंतु वही सुधि या बदी मित्र जो रात-दिन, ज्ञान शिक्षा शुचिता शुद्धता और नैतिकता और प्राकृतिक न्याय की बातें किए साथ में बढ़ता चलता है कहता है कि
एक बार कश ले ले कुछ नहीं होता है या

एक खुराक में कुछ नहीं होगा या

एक घूँट में कुछ नहीं होगा और
नतीजतन एक रात का नशा अगले कुछ वर्षों में एक आदत बन जाता है. कभी कभी नशे की आदत कब दैनिक आदत बन जाति है और जीवन पर बड़ी की और अग्रसर हो जाता है यह माता पिता को भी बड़ी देर से समझ में आता है

  1. उपाय क्या है?

सड़क पर वाहन चलते समय आप ट्रैफिक नियमों के पालन करते हैं और कोई पुलिस कर्मी कह भी दे कि आप चले जाओ नो एंट्री में तो मस्तिष्क में पड़ा एक बैरियर आपको इस ग़लत कार्य को करने से रोक देगा. इसी प्रकार नस्ले द्रव्यों जय तंबाकू सिगरेट गुटका शराब या अन्य उच्च स्तरीय नस्ले पदार्थों के सेवन आपको ऑफर मिले तो मस्तिष्क में उपस्थित बारिया को तुरंत गिरा दीजिए और एक कठोर मुद्रा के साथ माना कीजिए ताकि दोबारा कहना की हिम्मत आपके मित्र की बने और आप नशे से बच सकें नशे से बचने वाले हर व्यक्ति कि जवान स्त्री पुरुष से सुरक्षित समाज के निर्माण होगा देश उन्नत होगा और विकसित बनेगा.

नशे के प्रति जानकारी और मानसिक दृढ़ता ही नशे से बचने की एकमात्र सफल उपाय है.

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