ऐसे दो विशिष्ट जीवन घटक हैं जिन पर यह मानव जीवन की सबसे महत्वपूर्ण मानसिक घटनाओं का उतार चढ़ाव का जीवन माना जाएगा. प्रथ्वी पर परिभ्रमण करते मानविकी की यह भावना अनमोल है.
पुरानी कहावत है कि सत्य और निष्ठा से अपने कार्य का सम्मान करते हुए कार्य संपादन और संपन्न करोगे तो किसी को भी प्रणाम नहीं करना पड़ेगा चरण वंदन नहीं करना पड़ेगा.
परंतु इससे उलट हो जाएँ जब कामचोरी, आलस, अकर्तव्य से चलते हुए आप कार्य सम्पन्न करने का प्रयास न करें तो आपके कार्य का क्रिटिकल एनालिसिस होगा और दुनिया भर के अधीनस्थों और अधिकारियों के पाँव भी छूना पड़ेंगे, प्रणाम भी करना पड़ेगा, सब्ज़ी भी लाकर देना पड़ेगी और गाली भी सहना पड़ेगी.
सत्कर्म सर्वोपरि

Leave a comment