बचपन में सांकेतिक कथा कही सुनाई जाती थी पढ़ी भी जाती थी कि एक राजा मिडास था उसने ईश्वर की भक्ति की और सोने से अतिशय प्रेम होने के कारण उसने भगवान से कहा कि जिस चीज़ को छू लूँ वह सोना हो जाए. ये बात अलग है कि वो परेशान बहुत हुआ उसके बाद परंतु लोगों ने शिक्षा ली और कभी कभी इस कलियुग में भी मिडास टच वाले प्रसंग उपस्थित होते हैं जिसमें झाल मूड़ी भी सम्मिलित हो गई है.
भारत के प्रधानमंत्री आदरणीय श्री नरेंद्र मोदी ने बंगाल के चुनाव अभियान के दौरान एक छोटी दुकान पर सेव परमल के मिक्सचर का सेवन क्या किया यह भारतीय स्नैक्स लगभग विश्व स्तर पर प्रचलन में आ गया. बंगाल में इस सेव परमल के मिश्रण को झाल-मूड़ी कहा जाता है जहाँ झाल याने मिर्ची और मुड़ी याने चावल से बने हुए परमल जो एक अल्पाहार की भाँति दिन में दोपहर के समय में आमतौर पर खाया जाता है.
और इस परवल में मिश्रित होता है सेव मूंगफली मसाला बून्दी इत्यादि के साथ नींबू नमक जीरावण बुकनू दोनों प्रकार की लाल और हरी मिर्ची के साथ मौसम अनुसार कच्चे आम के टुकड़े और लगभग सदैव ही प्याज़ का आनंद अत्यंत स्वादिष्ट संगम को प्रस्तुत करता है जिसके खाने से जीभ के चारों ओर उपस्थित दाँतों के बीच में क्रश होते परमल, सेंगर बूंदी प्याज़ इत्यादि की धुन न केवल मस्तिष्क को उत्तेजित कर देती है बल्कि पेट की भूख को भी शांत रखने के कार्य में एक नया आयाम प्रदान करती है
झलमुड़ी ऊर्जा का एक हल्का फुल्का स्रोत तो है ही इसके खाते समय उपस्थित मित्रो की रंगत भी एक अद्भुत समायोजन करती है. और प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के मिडास टच ने इस झालमुड़ी के माध्यम से चुनावों की दशा और दिशा कुछ इस प्रकार बदली कि दो तिहाई बहुमत प्राप्त करने में झालमुड़ी का भी सहयोग दिखाई पड़ता है
सही कहा है हनुमान जी की आराधना में कि है “बल्ली कृपा की लगा देना” तो यहाँ झाल मूड़ी ने जीत की कृपा लगाने में वाक़ई बड़ी सहायता की है.
सही कहा न!

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