धन्यवाद (566)

अति प्राचीन कथानक है कि एक बार एक मानव को भगवान से मिलने और देवलोक में जाने का अवसर हुआ जहाँ उस अतिमानव ने ईश्वर से कहा कि मुझे अपने देवलोक के दर्शन करा दीजिए हैं.

देवलोक में प्रभुजी ने तीन अतिरिक्त कमरे भी दिखाए जिनके बारे में अतिमानव की जिज्ञासा बड़ी ही अद्भुत हुई. उसने पूछा कि इन विशिष्ट कक्षों का क्या अर्थ है जहाँ चिट्ठियों के अंबार हैं. इस बार प्रभु प्रथम कक्ष को दिखाया जहाँ पर चिट्ठी पत्री के ढेर अपार संख्या में उपस्थिति थी. यह पूछे जाने पर कि यह क्या है ?

तो प्रभुजी ने कहा ये पृथ्वी में मानव जाति की ओर से ही ईश्वर को माँगी गई इच्छाओं की पूर्ति के आवेदन हैं जिनके ऊपर समय-अनुसार कार्रवाई की कर की जाकर इच्छापूर्ण आदेश जारी किए जाते हैं

अगले कक्ष में प्रभु जी ने अति मानव को दिखाया कि यह पत्रों का जावक ढेर है जो प्रथम कक्ष में प्राप्त इच्छापूर्ति के पैट्रन के विरुद्ध आदेशों का जारी किए जाने का कक्ष है जो प्रथम कक्ष का एक चौथाई है.

तृतीय कक्ष में मात्र दो चार पत्रों और लिफ़ाफ़ों का ढेर लगा था यह पूछे जाने पर कि हे भगवान, ये कैसा कक्ष है तो प्रभु ने कहा कि यह मानव द्वारा दिए उसकी इच्छापूर्ति के पूर्ण हो जाने पर प्रभु को दिए गए धन्यवाद की चिट्ठियाँ हैं जो यहाँ पर उपस्थित है मानव स्वभाव धन्यवाद ज्ञापित करने के लिए क़तई राज़ी नहीं है.

धन्यवाद एक अजीब शब्द है जो चेतन मन की एक ऐसी स्थिति उत्पन्न करता है जिसके सामने अहंकार की मज़बूत लोहे की दीवार खड़ी होती है. इसलिए व्यक्ति धन्यवाद नहीं का पाता है

कृतज्ञता का भाव होना, विकसित करना और अनुभव करना कदाचित संस्कारों की थाती हो परंतु “धन्य हूँ” की स्थिति इंसान को विनम्र नैतिक और सत्यनिष्ठ बनाए रखती है. हर पल में ली जाने वाली स्वाँस में वायुमंडल की प्राण वायु के प्रति अत्यन्त सहज भाव पृथ्वी से उपजे अन्न , अनाज, फल, जल इत्यादि के सेवन के भाव की उत्पत्ति अजीब ज़रूर प्रतीत होती हो परंतु पंच तत्व के प्रति यह निश्चित करता भी है

धन्यवाद और शिकायत का भाव एक ही सिक्के के दो पहलू के रूप में महसूस किए जा सकते हैं जहाँ धन्यवाद का भाव ख़राब से ख़राब परिस्थिति में भी स्वीकार्यता की अभिव्यक्ति है वहीं शिकायत का भाव अच्छी से अच्छी परिस्थिति में भी असंतोष और दुख का परिचायक हो सकती है.

धन्यवाद और शिकायत के भाव में शिकायत में माँग का तत्व उपस्थित होना सिक्के का मूल तत्व है यदि माँग है तो धन्यवाद है यदि माँग है तो शिकायत है चाहे माँग पूरी हो या न हो!

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  1. बहुत खुब, बढ़िया सुंदर प्रस्तुति।।🙏🚩🕉️🚩🕉️🚩🙏🙏🙏🙏🙏

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